चीन में कार की बिक्री बढ़ाएगा फोल्क्सवागन | दुनिया | DW | 20.04.2013
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दुनिया

चीन में कार की बिक्री बढ़ाएगा फोल्क्सवागन

जर्मन कार कंपनी फोल्क्सवागन चीन में अपनी गाड़ियों की बिक्री बढ़ाएगी. इस साल वह 30 लाख कारें बेचेगा तो कंपनी के लिए काम करने वाले लोगों की संख्या भी बढाकर 100,000 कर दी जाएगी.

अर्थव्यवस्था की डांवाडोल स्थिति के बावजूद फोल्क्सवागन चीन के महत्वपूर्ण कार बाजार में इस साल अपनी बिक्री में भारी वृद्धि की सोच रहा है. चीन के लिए प्रभारी मैनेजर योखेम हाइत्समन ने कहा है कि चीन में बेची जाने वाली कारों की संख्या पिछले साल के 28 लाख के मुकाबले इस साल 30 लाख होगी. चीनी शहर शंघाई में मोटर शो शुरु होने से पहले हाइत्समन ने कहा, "भले ही चीनी बाजार में आर्थिक विकास दर उम्मीद के मुताबिक धीमी पड़ गई है, हम अभी भी स्वस्थ विकास के जारी रहने की उम्मीद कर रहे हैं."

शंघाई के मोटर शो में स्थानीय कार निर्माताओं के साथ साथ पश्चिमी देशों के नामी कार निर्माता भी अपनी नई कारें दिखा रहे हैं. खासकर बीएनडब्ल्यू, ऑडी और मर्सिडिज जैसी लक्जरी कार बननाने वाली कंपनियां अपने घरेलू बाजारों में आ रही मंदी से बचने के लिए चीनी बाजार से काफी उम्मीदें लगाए बैठी हैं. उन्हें चीनी बाजार में तेज विकास की उम्मीद है और इसी से पश्चिम यूरोप में हो रहे घाटे को पाटा जा सकेगा. इस समय अमेरिका के अलावा चीन अकेला ऑटोमोबाइल बाजार है जहां कारों की बिक्री बढ़ रही है, हालांकि विकास दर पिछले साल के मुकाबले धीमी हुई है.

फोल्क्सवागन के मैनेजर हाइत्समन का कहना है कि चीन में अगले तीन से पांच साल में नई कारों की बिक्री में 6 से 8 प्रतिशत की वृद्धि होगी. वे कहते हैं, "हम कम से कम उतनी तेजी से विकास करना चाहते हैं, जितनी तेजी से कुल बाजार का विकास होगा, शायद थोड़ा बहुत ज्यादा." जर्मनी के वोल्फ्सबुर्ग शहर की कार कंपनी के लिए चीन का बाजार उसका सबसे बड़ा बाजार है. कारों के मामले में वह मार्केट लीडर है. अमेरिका की जनरल मोटर्स का नंबर उसके बाद आता है.

नए कारखाने

चीन में फोल्क्सवागन सात नए कारखाने बना रहा है, जिनमें से पांच इसी साल उत्पादन शुरू कर देंगे. इनमें ऊरूम्ची, फोशान और निंगबो में कारों की एसेंब्लिंग करने वाले कारखाने और चांगचून तथा फोशान में कंपोनेंट बनाने वाले कारखाने शामिल हैं. नए कारखानों के बनने के साथ फोल्क्सवागन की चीन में हर साल 40 लाख कार बनाने की क्षमता हो जाएगी. इसके लिए उसे और ज्यादा कामगारों की भी जरूरत होगी. हाइत्समन ने शंघाई में बताया कि कर्मचारियों की संख्या इस समय के 75,000 से बढ़ाकर 1 लाख कर दी जाएगी.

इस साल के पहले तीन महीने में फोल्क्सवागन ने पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले तकरीबन एक चौथाई ज्यादा कारें बेची हैं. पहली तिमाही में फोल्क्सवागन ने चीन में 600,000 कारें बेचीं. पिछले साल फोल्क्सवागन ने अपने चीनी सहयोगियों एसएआईसी और एफएडब्ल्यू के साथ मिलकर 26 लाख कारें बनाईं. 2012 में कंपनी को चीनी ज्वाइंट वेंचर से सबसे ज्यादा फायदा हुआ. इन कंपनियों से फोल्क्सवागन को मुनाफे में 3.7 अरब यूरो का हिस्सा मिला जो एक साल पहले के मुकाबले 40 प्रतिशत ज्यादा था.

चीन में इस समय आर्थिक प्रगति का लाभ देश के पश्चिमी हिस्से में दिख रहा है, जबकि पूर्वी हिस्से में विकास दर ठंडा पड़ रहा है. इसकी वजह से फोल्क्सवागन आने वाले वर्षों में खास कर देश के पश्चिमी हिस्से में नए कारखाने बनाएगा. यह उसकी अपनी नीति ही नहीं है बल्किन चीन सरकार ने इसकी मांग भी की है. चीन सरकार का मानना है कि नया कारखाना लगने पर कंपोनेंट और कल पुर्जे बनाने वाले दूसरे फर्मों के अलावा अन्य औद्योगिक उद्यम भी इलाके में निवेश करेंगे. इससे इलाके के लोगों को रोजगार मिल सकेगा.

तटीय क्षेत्र के शहरों में गाड़ियों की तादाद बढ़ रही है और सड़कों की हालत खराब हो रही है. शहर के प्रशासन कड़े पर्यावरण कानूनों और लाइसेंस पर रोक लगाकर स्थिति पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं. लाखों की आबादी वाले चीन के मेगाशहरों में पर्यावरण के अनुकूल मोटर वाली गाड़ियों और इलेक्ट्रिक कारों की मांग बढ़ने की उम्मीद है. इस रुझान को देखते हुए फोल्क्सवागन 2014-15 में चीनी बाजार में इलेक्ट्रो कार उतारेगा और उसका एक हिस्सा चीन के अपने ज्वाइंट वेंचर कंपनियों में बनाएगा.

एमजे/एनआर (रॉयटर्स)

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