चीन ने विदेशी एनजीओ पर कसा शिकंजा | दुनिया | DW | 29.04.2016
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दुनिया

चीन ने विदेशी एनजीओ पर कसा शिकंजा

चीन की साम्यवादी नियंत्रण वाली संसद ने एक विवादास्पद कानून पास कर विदेशी गैर सरकारी संगठनों पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं. अमेरिकी सरकार और नागरिक संगठनों ने नए कदमों पर गहरी चिंता व्यक्त की है.

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जर्मनी और चीन के एनजीओ प्रतिनिधि

नया कानून विदेशी चैरिटी संगठनों पर नियंत्रण के व्यापक अधिकारों के अलावा स्थानीय सदस्यों की भर्ती और चंदा इकट्ठा करने पर रोक लगाता है. अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता नेड प्राइस ने एक बयान में कहा, "अमेरिका इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त करता है कि चीन का नया विदेशी एनजीओ गतिविधि प्रबंधन कानून देश में सिविल सोसायटी के दायरे को और कम करेगा. अमेरिका ने चीन से मानवाधिकार की रक्षा करने वालों के अलावा पत्रकारों, कारोबारी दलों और सिविल सोसायटी बनाने वाले अन्य ग्रुपों के अधिकारों और स्वतंत्रताओं का आदर करने की मांग की.

चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की एक समिति ने लगभग सर्वसम्मति से नया कानून पास कर दिया. उसके पक्ष में 147 वोट पड़े जबकि सिर्फ एक सांसद ने उसका विरोध किया. अनुमान है कि चीन में करीब 1,000 विदेशी एनजीओ सक्रिय हैं जिनमें सेव द चिल्ड्रेन, ग्रीनपीस, चैंबर ऑफ कॉमर्स और यूनिवर्सिटी सेंटर जैसी विकासोन्मुखी संस्थाएं भी शामिल हैं. जनवरी से लागू होने वाला कानून पुलिस को विदेशी एनजीओ के पंजीकरण का अधिकार भी देता है. नए कानून के अनुसार राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाने या समाज के हितों को खतरा पहुंचाने पर पुलिस किसी संस्था का रजिस्ट्रेशन रद्द कर सकती है. पीपुल्स कांग्रेस के अधिकारी झांग योंग ने कहा, "कुछ विदेशी एनजीओ हैं जिन्होंने समाज की स्थिरता को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियां की हैं."

नए कानून में यह नहीं बताया गया है कि विदेशी एनजीओ क्या है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि इसके दायरे में विदेशी चैरिटी संस्थाएं और व्यावसायिक संगठन आएंगे. यह हॉन्ग कॉन्ग और ताइवान स्थित संगठनों पर भी लागू होगा लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्कूलों और अस्पतालों को इससे बाहर रखा गया है. यूएस चीन बिजनेस काउंसिल के उपाध्यक्ष जेक पार्कर ने कहा है, "हमारी शुरुआती प्रतिक्रिया निराशा की है कि सुरक्षा एजेंसियां एनजीओ के रजिस्ट्रेशन के लिए जिम्मेदार होंगी." नया कानून ऐसे समय में बना है जब राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सरकार सिविल सोसायटी के खिलाफ कदम उठा रही है. राज्यसत्ता के खिलाफ विद्रोह जैसे आरोप में बहुत से वकीलों, बुद्धिजीवियों और एक्टिविस्टों को गिरफ्तार किया गया है.

भविष्य में विदेशी एनजीओ को हर साल काम की योजना और वित्तीय जानकारी देनी होगी. उन पर चीन की स्टेट काउंसिल से विशेष अनुमति लिए बिना सदस्य भर्ती करने और चंदा इकट्ठा करने पर भी रोक होगी. जनवरी में चीन ने स्वीडन के एक मानवाधिकार कार्यकर्ता को गिरफ्तार कर देश से बाहर निकाल दिया था जो मानवाधिकार के मुद्दे पर काम करने वाले चीनी वकीलों और विदेशी एनजीओ के कर्मचारियों को ट्रेनिंग दे रहा था. विदेशी राजनयिकों ने इस कानून पर चीन सरकार से अपनी चिंता जताई थी. यूरोपीय संघ के राजदूत हंस डिटमार श्वाइसगूट ने चीन सरकार को लिखा था, "यदि कानून में गंभीर संशोधन नहीं किए जाते तो उसके लोगों के बीच आपसी संपर्क, एकैडेमिक आदान प्रदान और व्यावसायित गतिविधियों में बाधा पड़ने का खतरा है, सारे हमारे पारस्परिक संबंध को महत्वपूर्ण तत्व हैं."

एमजे/ओएसजे (एएफपी)

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