चीन के दौरे पर अंगेला मैर्केल ने की हांगकांग के अधिकारों को बचाने की बात | दुनिया | DW | 06.09.2019
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दुनिया

चीन के दौरे पर अंगेला मैर्केल ने की हांगकांग के अधिकारों को बचाने की बात

जर्मनी की चांसलर अंगेला मैर्केल ने कहा है कि हांगकांग के निवासियों के अधिकारों और आजादी को सुरक्षित रखना चाहिए. चीन के दौर पर उन्होंने कहा कि हिंसा छोड़ बातचीत के रास्ते से सुलझाएं राजनीतिक विवाद.

राजधानी बीजिंग में चीन के प्रधानमंत्री ले केचियांग से मुलाकात के बाद एक संयुक्त प्रेस ब्रीफिंग में जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल ने कहा, "मैंने अपनी वार्ता में इस ओर ध्यान दिलाया कि हांगकांग के बेसिक लॉ में जैसे अधिकार और स्वतंत्रता देने पर सहमति हुई थी उनकी रक्षा करनी चाहिए." बेसिक लॉ असल में हांगकांग का डि फैक्टो संविधान है. इसमें अर्ध-स्वायत्त चीनी शहर के रूप में हांगकांग के लिए कुछ ऐसे लोकतांत्रिक अधिकारों को स्वीकार किया गया है जो मुख्यभूमि चीन से अलग हैं.

मैर्केल ने हिंसा की बजाए वार्ता के जरिए तीन महीने से चले आ रहे संकट को सुलझाने की बात कही. इस दौरे में मैर्केल चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ रात के भोजन पर मिलने वाली हैं. जर्मन नेता के सामने अपने सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार देश के समक्ष मानव अधिकारों के हनन पर चिंता जताते हुए आर्थिक हितों को बचाने की चुनौती थी. पिछले साल एक देश के रूप में चीन ही जर्मनी का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर रहा. दोनों के बीच करीब 199 अरब यूरो (218 अरब डॉलर) का व्यापार हुआ. चीन के साथ व्यापारिक संबंध यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए अब और भी अहम हो गए हैं क्योंकि इस तिमाही में ही जर्मनी तकनीकी रूप से मंदी के दौर में प्रवेश कर सकता है.

बहुत लंबे समय से जर्मनी के चीन के साथ मधुर संबंध रहे हैं. जर्मन निर्यातकों ने अपनी मशीनों और उत्पादों से चीनी फैक्ट्रियां भर दीं. लेकिन हाल के कुछ सालों से जर्मनी को इस बात से शिकायत है कि नई तकनीकों को लेकर चीन की नीति और अपने बाजारों में पहुंच बनाने पर पाबंदियां महसूस हो रही हैं. चीन के प्रधानमंत्री ले केचियांग ने इसी प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पत्रकारों से बातचीत में कहा कि चीन में जर्मन कंपनियों का स्वागत है और दोनों देशों के बीच भरोसे की नींव होने के कारण उन्हें चीन में अनुमति पाने में ज्यादा परेशानी भी नहीं होगी. दोनों नेताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेल्स-ड्राइविंग वाहनों, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी के अधिकारों और निर्यात जैसे जरूरी मुद्दों पर बातचीत की.

अमेरिका के साथ चले आ रहे अपने ट्रेड वॉर में चीन ने पहले भी जर्मनी को अपने साथ शामिल करने की कोशिशें की हैं, जिससे जर्मनी बचता आया है. वैसे तो मैर्केल प्रशासन ने खुद भी कुछ ट्रंप के उन तरीकों की आलोचना की है जो वे यूरोप के खिलाफ इस्तेमाल करते हैं. अमेरिका-चीन की व्यापारिक खींचतान का असर जर्मन कारोबार पर भी पड़ा है. मैर्केल ने उम्मीद जताई कि चीन और जर्मनी के आपसी व्यापारिक रिश्ते बाकियों के लिए मॉडल का काम करेंगे. व्यापारिक हितों को सुनिश्चित करने की मजबूरी से बंधे होने के कारण मैर्केल चीन के सामने न तो तिब्बत और ना ही शिनजियांग प्रांत के अल्पसंख्यकों के बारे में कोई मुश्किल सवाल उठाती नजर आईं. 

आरपी/ओएसजे (एपी, रॉयटर्स)

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