चीन की बढ़ती दखलअंदाजी से चिंतित हैं कंबोडिया के लोग | दुनिया | DW | 23.08.2019
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दुनिया

चीन की बढ़ती दखलअंदाजी से चिंतित हैं कंबोडिया के लोग

कंबोडिया में हाल के दिनों में चीन ने काफी निवेश किया है. बीते कुछ वर्षों में यहां भारी संख्या में चीनी कामगार और पर्यटक पहुंचे हैं. लेकिन चीन की बढ़ती दखलअंदाजी की वजह से कंबोडिया में कई लोग चिंतित हैं.

चीन द्वारा निवेश से कंबोडिया में किस तरह बदलाव हुआ है, यह वहां के समुद्र किनारे बसे शहर सिहानूकविले को देखकर पता चलता है. चीनी कसीनो, होटल और फैक्ट्रियों को स्थापित किए जाने के बाद करीब 1 लाख 60 हजार की आबादी वाला यह शहर पूरी तरह बदल गया है. कई सारी चीनी कंपनियों ने शहर में अपनी फैक्ट्रियां स्थापित की हैं. व्यवसाय का मुख्य केंद्र सिहानूकविले स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एसएसईजेड) बन गया है, जो कि चीन-कंबोडिया टैक्स फ्री इकोनॉमिक जोन है. इस जोन में चीनी कंपनियों की एक हजार से अधिक फैक्ट्रियां चल रही हैं. चीन की एक कंपनी कंबोडिया की राजधानी फ्नोम पेन्ह से सिहानूकविले को जोड़ने वाली फोर लेन सड़क बना रही है. दोनों देशों के बीच संबंधों में तेजी 2010 में व्यापक रणनीतिक साझेदारी स्थापित होने के बाद आई है.

2013 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव (बीआरआई) का अनावरण किया था जो एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच संपर्क को बेहतर बनाने के लिए पुरानी सिल्क रोड के पुनर्निर्माण का काम कर रहा है. इस प्रोजेक्ट के एक हिस्से के तौर पर चीन कंबोडिया सहित विभिन्न देशों में परिवहन और अन्य बुनियादी ढांचे जैसे सड़क, रेलवे, बंदरगाह और पाइपलाइन का निर्माण कर रहा है. दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र कंबोडिया भी बीआरआई का समर्थक है. चीन के धन से कंबोडिया को काफी लाभ मिला है. देश में कई बुनियादी ढांचों का निर्माण और विकास हुआ है.

बीजिंग ने अब तक सात हाइड्रोपावर बांध के निर्माण के लिए भी धन दिया है. ये सात हाइड्रोपावर बांध कंबोडिया में बिजली की आधी जरूरत को पूरा करने में सक्षम हैं. 1990 के मध्य से चीन ने कंबोडिया में करीब तीन हजार किलोमीटर हाइवे और कई सारे पुलों का भी निर्माण किया है. साथ ही चीन द्वारा किया गया निवेश कंबोडिया का सबसे ज्यादा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश है.

नकारात्मक प्रभाव

चीन द्वारा किए गए निवेश ने कंबोडिया के आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाई है लेकिन इसका ज्यादा लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिला है. ऐसा लगता है कि कंबोडिया के समाज का कुछ विशेष वर्ग ही इससे लाभान्वित हुआ है. यह वह वर्ग है जिसके पास अपनी जमीन है या जे चीनी लोगों के साथ व्यवसाय करता है. स्थानीय लोगों को नौकरी पर रखने की जगह कई चीनी कंपनियों ने चीन से कामगारों को बुलाया. इससे कंबोडिया के लोगों के बीच आक्रोश है.

चीनी कंपनियां चीनी कामगारों को इसलिए तवज्जो देती हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि भाषा, रहन-सहन और कार्य करने के समान तरीके की वजह से उन्हें आसानी होगी. कंबोडिया के गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार 2 लाख 50 हजार से ज्यादा चीनी कर्मचारी उनके देश में काम कर रहे हैं. यह संख्या कंबोडिया में रह रहे कुल विदेशी लोगों का 60 प्रतिशत है.

विशेषज्ञ कहते हैं कि कंबोडिया के लोगों की तुलना में चीनी कामगारों को अधिक वेतन दिया जाता है. अमेरिका में ऑक्सीडेंटल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर सोफल ईयर कहते हैं कि कंबोडिया की अर्थव्यवस्था के चीनी वर्चस्व से चिंता बढ़ रही है. सोफल कहते हैं कि आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के बावजूद चीनी निवेश से नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. इसकी वजह यह है कि धन का एक बड़ा हिस्सा कसीनो और रियल एस्टेट में जा रहा है, जो आर्थिक अपराध और मनी लॉन्डरिंग को बढ़ावा देता है. कंबोडिया के कुछ अधिकारी यह मानते हैं कि भारी संख्या में चीनी आप्रवासियों के आने से सबकुछ अच्छा नहीं है.

बिना परमिट रह रहे चीनी कामगार

कंबोडिया पुलिस की वेबसाइट ने गृह मंत्रालय में एक सचिव सोक फाल के हवाले से लिखा है कि प्रेयाह सिहानूक प्रांत में 78 हजार से ज्यादा चीनी नागरिक रहते हैं और सिर्फ 20 हजार के पास काम करने का परमिट है. मंत्रालय ने कहा है कि 2014 से जुलाई 2019 तक 2,700 से ज्यादा चीनी नागरिकों को उनके देश वापस भेजा गया है.

हाल के कुछ वर्षों में कंबोडिया ने वित्तीय और कूटनीतिक सहायता के लिए चीन का रूख किया है. वजह यह है कि देश ने लोकतंत्र और मानवाधिकार को लेकर पश्चिमी देशों की ओर से काफी दबाव का सामना किया है. इस वर्ष की शुरुआत में यूरोपीय संघ ने एवरीथिंग बट आर्म्स (ईबीए) योजना के तहत कंबोडिया के तरजीही दर्जा को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की. यूरोपीय आयोग ने कहा कि मानवाधिकारों के उल्लंघन का मतलब है कि कंबोडिया इस योजना का लाभ नहीं ले सकता है.

हाल के वर्षों में चीन और कंबोडिया के बीच व्यापार तेजी से बढ़ा है. 2017 में यह छह अरब डॉलर तक पहुंच गया. कंबोडिया के कुल आयात का 87 प्रतिशत चीन से होने लगा. कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन सेन ने कहा कि चीन का लक्ष्य दोनों देशों के बीच के व्यापार को 2023 तक दस अरब डॉलर तक पहुंचाने का है. कंबोडिया के पर्यटन मंत्रालय के अनुसार 2018 में करीब 20 लाख चीनी पर्यटक कंबोडिया पहुंचे जो 2017 के मुकाबले 70 प्रतिशत ज्यादा था. 2020 तक इसकी संख्या 30 लाख तक पहुंचने की उम्मीद है.

रिपोर्ट: सोमेथेया टान/आरआर

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