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अपराधजर्मनी

चीनी नागरिकों को तस्करी से जर्मनी लाने वाले गैंग पर छापा

१७ अप्रैल २०२४

जर्मनी में अवैध तरीके से चीनी नागरिकों को लाने वाले गैंग पर पुलिस कार्रवाई में दस संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है. लाखों यूरो की रकम ले कर गलत तरीके से दिलाया जा रहा था रेजिडेंस परमिट.

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सोलिंगन में छापा मारने पहुंचे संघीय पुलिस अधिकारी
बुधवार को शुरू हुई छापेमारी में संघीय पुलिस के 1,000 अधिकारी शामिल हैंतस्वीर: Gianni Gattus/dpa/picture alliance

जर्मनी के आठ राज्यों में बुधवार सुबह शुरू हुई छापेमारी में संघीय पुलिस और कानून का पालन कराने वाली दूसरी एजेंसियों के 1,000 ज्यादा अधिकारी शामिल थे. अधिकारियों ने कुल मिला कर 101 आवासीय और कारोबारी इमारतों की तलाशी ली. सांक्ट ऑगस्टिन में संघीय पुलिस के अधिकारी ने बताया कि जिन ठिकानों पर छापा मारा गया उनमें लॉ फर्मों के दो दफ्तर भी शामिल थे.

कुशल कामगारों के लिए बने नियमों का दुरुपयोग

विदेशों से कुशल कामगारों को लाने के लिएबने विशेष नियमों का फायदा उठा कर संदिग्धों के गैंग ने करीब 350 लोगों के लिए रेजिडेंस परमिट हासिल कर लिया. इनमें ज्यादातर लोग चीन के नागरिक हैं. इसके बदले में इन लोगों से लाखों यूरो की रकम वसूली गई है.

सांक्ट ऑगस्टीन में पत्रकारों को जानकारी देते पुलिसअधिकारी
कई राज्यों में एक साथ पुलिस ने छापा मारा हैतस्वीर: Oliver Berg/dpa/picture alliance

इस मामले में प्रमुख संदिग्ध दो वकील हैं. पुलिस के मुताबिक ये कोलोन में रहते हैं. इनमें से एक की उम्र 42 जबके दूसरे की 46 साल है. संदिग्धों के बारे में कहा जा रहा है कि अपनी लॉ फर्मों के माध्यम से इन लोगों ने मुख्य रूप से चीन और अरब इलाके में अमीर विदेशी लोगों को नियुक्त किया था. पुलिस के मुताबिक, "स्थायी निवास की मंजूरी के बदले आरोपियों ने इन फर्मों को 30,000-350,000 यूरो तक की रकम का भुगतान किया था."

जर्मनी से अनाधिकृत आप्रवासियों को निकाला जाएगा

जर्मनी में कुशल कामगारों की कमी की वजह से विदेशी लोगों को यहां लाने के लिए सरकार ने बीते कुछ सालों में नियमों को बदला है. इनके जरिए काम के लिए विदेशी लोगों को यहां लाना आसान बनाया जा रहा है. इन्हीं नियमों का दुरुपयोग कर कुछ लोग मानव तस्करीजैसे अपराध को अंजाम दे रहे हैं.

जर्मन अधिकारियों को धोखा

इन पैसों का इस्तेमाल फर्जी कंपनियां बनाने, कथित घरों को पैसा देने और नकली वेतन भुगतान के दस्तावेज बनाने पर खर्च किए गए. इनके माध्यम से जर्मनी के अधिकारियों को धोखा दिया गया. पुलिस का कहना है कि इन लोगों ने कथित पर, "अच्छी खासी रकम अपनी जेब में भी डाली."

सोलिंगन में एक इमारत के बाहर खड़े पुलिस अधिकारी
जर्मनी की संघीय पुलिस ने 8 राज्यों में 101 ठिकानों पर छापे मारे हैंतस्वीर: Gianni Gattus/dpa/picture alliance

इस मामले की जांच मुख्य रूप से जर्मनी की सबसे ज्यादा आबादी वाले नॉर्थ राइन वेस्टफालिया में केंद्रित है. यहीं से 10 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है. इनमें ये दो वकील भी शामिल हैं. एक संदिग्ध ड्यूरेन के आप्रवासन दफ्तर में काम करता था. यहां वह तस्करी की कोशिशों में शामिल था और उसने रिश्वत भी लिया था.

जर्मनी के जिन राज्यों में छापे मारे गए हैं उनमें नॉर्थ राइन वेस्टफालिया, श्लेषविग होल्स्टाइन, हैम्बर्ग, बर्लिन, हेस्से, राइनलैंड पलैटिनेट, बाडेन वुर्टेमबर्ग और बवेरिया शामिल हैं. संपत्तियों को जब्त किया गया है और दूसरे सबूत जमा किया गए हैं. 2022 में संघीय कानून का पालन कराने वाली एजेंसियों ने पूरे जर्मनी में मानव तस्करी के कुल 4,936 मामले दर्ज किए थे. यह संख्या इससे पहले के साल की तुलना में 30 फीसदी से ज्यादा बढ़ी है.

एक तरफ जर्मनी में कुशल कामगारों की कमी हो रही है तो दूसरी तरफ अवैध तरीके से देश में घुसने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है. इन दोनों के बीच संतुलन बनाना जर्मन अधिकारियों के लिए बड़ा सिरदर्द बन रहा है.

एनआर/एए (डीपीए)