चीनी नहीं, मशरूम से चॉकलेट | विज्ञान | DW | 26.07.2014
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विज्ञान

चीनी नहीं, मशरूम से चॉकलेट

मीठा खाने वाले अमेरिका ने एक ऐसी तरीका खोज लिया है जिससे कोकोआ का कड़वापन कम हो जाए और चॉकलेट को मीठा करने के लिए चीनी भी नहीं लगे.

अमेरिकी फूड टेक्नोलॉजी कंपनी मायको टेकनोलॉजी ने खमीर पैदा करने की किण्वन की एक खास प्रक्रिया विकसित की है. इसके तहत कोकोआ का कड़वापन कम करने के लिए मशरूम का इस्तेमाल किया जाएगा. यानि मशरूम को फर्मेंट किया जाएगा. कंपनी का दावा है कि इससे चॉकलेट को मीठा करने के लिए चीनी का इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा.

एक साल पहले कंपनी ने किण्वन की ये प्रक्रिया लॉन्च की थी. अब माइको टेक्नोलॉजी कंपनी मंगलवार को अपनी प्रक्रिया भी लॉन्च करेगी. कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर लिखा है, "हम अच्छे मशरूम की सफाई की प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हैं. हम ऐसा कर पाए कि वह चॉकलेट का कड़वापन सोख लें. मशरूम अपने भोजन के साथ प्रतिक्रिया करके उसे ऐसे पौष्टिक तत्व देते हैं, जो सामान्य तौर पर चॉकलेट में नहीं पाए जाते. इनमें सबसे अहम पदार्थ है बीटा ग्लूकन्स जो हमारी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं."

कॉफी और कोकोआ के बाद मायको टेकनोलॉजी धान और दूसरे अनाज पर भी काम करना चाहती है. कंपनी फर्मेंटेड बीन्स लेती है, उन्हें स्टरलाइज करते हैं फिर मशरूम की खास प्रजाति लेते हैं जिसकी जड़ें काम करती हैं. कोकोआ बीन्स को सील बैग्स में रखा जाता है, सात से 21 दिन तक इस दौरान मशरूम की जड़ें अपना काम करती हैं. मशरूम नमी, ऑक्सीजन और चीनी खाते हैं.

राह नहीं आसान

बाजार छोटा है लेकिन संभावनाएं काफी बड़ी हैं क्योंकि दुनिया में ऐसे लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है जो स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हैं और चीनी की मात्रा कम करना चाहते हैं. मायको टेकनोलॉजी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एलैन हान ने बताया, "चॉकलेट का कड़वापन एक अहम समस्या है. हम उसे हटा देते हैं और इसलिए चीनी के इस्तेमाल की जरूरत बहुत ही कम हो जाती है."

आधी से ज्यादा मिल्क चॉकलेट चीनी से बनी होती हैं. अब मायको टेकनोलॉजी कंपनी बाजार की कई बड़ी कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है. कंपनी के प्रमुख विज्ञान अधिकारी ब्रूक्स जे केली ने ऐसी तकनीक बनाई है कि एक चॉकलेट बार में चीनी की जरूरत 31 ग्राम से घट कर सिर्फ 15 ग्राम रह जाती है.

लेकिन ये तकनीक मुश्किल भी खड़ी कर सकती है, खासकर बेकरी उद्योग में. अगर केक बनाने में चीनी की कटौती कर दी जाए तो दूध और कोकोआ की मात्रा बढ़ानी पड़ेगी जो चीनी से कहीं महंगा पड़ता है. साथ ही पेनसिल्वेनिया में चॉकलेट उत्पादों पर लंबे समय से रिसर्च कर रहे एड सिगीन कहते हैं, "अगर आप चीनी कम करते हैं और कोकोआ का किण्वन करते हैं यानि उसमें अल्कोहोल की मात्रा बढ़ाते हैं तो इससे चॉकलेट में वसा बढ़ जाएगा जो कि काफी कैलोरी वाला है."

एएम/ओएसजे (रॉयटर्स)

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