चीनी कंपनी हुआवे के सीएफओ को क्यों गिरफ्तार किया गया? | दुनिया | DW | 07.12.2018
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दुनिया

चीनी कंपनी हुआवे के सीएफओ को क्यों गिरफ्तार किया गया?

चीन और अमेरिका के बीच चल रहे कारोबारी जंग में कथित युद्धविराम की खबरों का अभी विश्लेषण चल ही रहा था कि हुआवे कंपनी की सीएफओ और कंपनी के संस्थापक की बेटी को कनाडा में गिरफ्तार कर लिया गया. मंग वानजोउ को क्यों पकड़ा गया?

कनाडा में हुआवे कंपनी की सीएफओ और कंपनी के संस्थापक की बेटी मंग वानजोउ की गिरफ्तारी कई महीनों से चल रही जांच का नतीजा है और सूत्रों के हवाले से आ रही खबरों के अनुसार कंपनी पर ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों के उल्लंघन का आरोप है.

अमेरिकी मीडिया ने सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद हुआवे कंपनी एक ब्रिटिश बैंक के जरिए विदेशी मुद्रा का अवैध लेन-देन कर रही थी. ट्रंप प्रशासन या अमेरिकी न्याय मंत्रालय ने औपचारिक रूप से इस गिरफ्तारीकी वजह पर कोई बयान नहीं दिया है.

चीनी कंपनी हुआवे दुनिया की सबसे बड़ी दूरसंचार उपकरण निर्माता और मोबाइल फोन बनानेवाली दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है. चीन के कॉरपोरेट जगत में एक तरह का शाही रूतबा रखनेवाली मंग वानजोउ को पिछले रविवार को अमेरिका के अनुरोध पर वैंकूवर में गिरफ्तार किया गया था और अब उनके प्रत्यर्पण की मांग की जा रही है.

Huawei (picture-alliance/dpa/Blanches)

मंग वानजोउ के पिता और कंपनी के संस्थापक रेन जेंगफेइ

कंपनी की फाइनेंस प्रमुख की गिरफ्तारी ने जहां दुनिया भर के शेयर बाजारों में खलबली मचा दी है वहीं पहले से ही तनावों में घिरे अमरीका और चीन के व्यापारिक रिश्ते और मुश्किलों में घिर गए हैं.

माना जा रहा है कि देर शनिवार जब कनाडा के एयरपोर्ट पर मंग की गिरफ्तारी को अंजाम देने के लिए ट्रंप प्रशासन वहां के अधिकारियों के साथ मशविरे में जुटा था, उस वक्त राष्ट्रपति ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिन पिंग अर्जेंटीना में रात्रिभोज पर आपसी व्यापारिक रिश्तों के तनाव को कम करने की बातचीत में लगे हुए थे.

फिलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप को उस वक्त चीन की बड़ी कंपनी की प्रमुख की गिरफ्तारी की जानकारी थी या नहीं लेकिन उसी भोज में मौजूद उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बॉल्टन को इस गिरफ्तारी की खबर  थी. एनपीआर रेडियो को दिए साक्षात्कार में बॉल्टन ने कहा कि न्याय मंत्रालय ने उन्हें ये सूचना दे दी थी.

ट्रंप प्रशासन ने पिछले महीनों में कई बार ये बयान दिया है कि ईरान पर अमेरिका के अभूतपूर्व दबाव अभियान के तहत जो प्रतिबंध लगाए गए हैं उसका उल्लंघन करने वाले देशों और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

हालांकि विश्लेषक इसे एक राजनीतिक चाल की तरह देख रहे हैं और उनका कहना है कि ट्रंप प्रशासन ने इस वक्त ये गिरफ्तारी व्यापारिक रिश्तों में चल रही बातचीत में चीन पर दबाव डालने के लिए की है.

वहीं कई हैं जो हुआवे कंपनी की पूर्व गतिविधियों की वजह से इस गिरफ्तारी को सही ठहरा रहे हैं.

न्यूयॉर्क के हॉफ्स्ट्रा विश्वविद्यालय इस तरह के मामलों पर काम कर रहे प्रोफेसर जूलियन कू ने ट्विटर पर  लिखा है, "अमेरिका की कई ऐसी टेक्नोलॉजी हैं जिन्हें अमेरिकी कानून कुछ देशों को निर्यात करने की अनुमति नहीं देता. जब हुआवे कंपनी अमेरिकी टेक्नोलॉजी का लाइसेंस खरीदती है तो उसमें निहित होता है कि ईरान जैसे देशों को उसका निर्यात नहीं करेगी. इसलिए इस नियम के उल्लंघन के लिए हुआवे को सजा देना अनुचित नहीं कहलाएगा."

गौरतलब है कि हुआवे कंपनी ओबामा प्रशासन के दौरान भी निर्यात नियमों और प्रतिबंधों के उल्लंघन के लिए अमेरिका के निशाने पर आ चुकी है.

दो साल पहले अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने कानूनी आदेश जारी कर कंपनी से उन देशों को अमेरिकी टेक्नोलॉजी निर्यात करने के बारे में जानकारी मांगी थी जिनपर प्रतिबंध लगे हुए हैं या फिर जिन्हें अमेरिका आतंकवाद का समर्थन देने वाले देशों की सूची में रखता है. इनमें ईरान, सीरिया, उत्तर कोरिया का खासतौर से जिक्र आया था.

कंपनी पर अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में अपने उपकरणों के जरिए जासूसी और दूसरी नुकसानदेह गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे हैं.

भारत में भी हुआवे से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं की वजह से कंपनी पर प्रतिबंध लग गए थे लेकिन फिर उन्हें हटा लिया गया था.

पिछले साल अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने अपने सभी फौजी ठिकानों पर मौजूद स्टोर्स में हुआवे के मोबाइल उपकरण बेचने पर रोक लगा दी थी.

अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, ब्रिटेन और कनाडा में कंपनी की 5G टेक्नोलॉजी पर प्रतिबंध लगे हैं.

माना जा रहा है कि ये हवा अगर यूरोप, मध्य-पूर्व और अफ्रीका में बहने लगी और साथ ही यदि उसे अमेरिकी टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से पूरी तरह से वंचित कर दिया गया तो कंपनी की मुश्किलें काफी बढ़ जाएंगी.

ऐसे हालात में माना जा रहा है कि अब अमरीका और चीन के बीच जो व्यापारिक मोलभाव चल रहा है हुआवे के इस संकट को उससे अलग करके नहीं देखा जा सकता.

विश्लेषकों का कहना है कि चीन दूरसंचार की दुनिया में वर्चस्व के लिए इस कंपनी को अहम मानता है और अमेरिका उसकी आकांक्षाओं से अनभिज्ञ नहीं है.

ये अलग बात है कि ट्रंप प्रशासन और चीनी अधिकारी दोनों ही सार्वजनिक बयानों में इस बात पर जो दे रहे हैं कि इस गिरफ्तारी और व्यापारिक बातचीत को जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिए

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