चलिए चांद की सैर पर | विज्ञान | DW | 07.12.2012
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विज्ञान

चलिए चांद की सैर पर

चांद की सैर का सपना जल्दी ही पूरा होगा. इस सैर का इंतजार तो दुनिया को पिछले 50 साल से रहा है, लेकिन अब चांद पर सैलानियों के पहुंचने का वक्त आ गया है. नासा के दो पुराने विमान इस का में जुट रहे हैं.

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नासा के दो पूर्व अधिकारियों ने घोषणा की है कि नासा के दो पुराने विमान चांद पर पर्यटन के लिए इस्तेमाल किए जा सकेंगे. ये अंतरिक्षयान अभी तक सरकार के लिए थे. इन्हें हाल के साल में व्यावसायिक नजरिए से देखा जाने लगा है क्योंकि निजी कंपनियों ने सफलतापूर्वक रॉकेट प्रक्षेपण किए हैं. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा खर्च कम करने में लगी हुई है और इसलिए उसने 2011 में अंतरिक्ष यात्रा का कार्यक्रम भी खत्म कर दिया. नासा ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर सामान और लोगों को भेजने के लिए रूस को आर्थिक मदद दी.

हालांकि कम होते बजट के साथ मानव सहित यान भेजे जाने पर रोक लग गई. अब नासा सौर मंडल की जांच के लिए पूरी तरह रोबोटों पर निर्भर है. गोल्डन स्पाइक कंपनी इस नए निजी स्पेसफ्लाइट में हिस्सेदारी चाहती है. साथ ही अंतरिक्ष पर्यटन का नया अध्याय भी शुरू करना चाहती है.

कंपनी का कहना है कि चांद की इस यात्रा के लिए कम से कम डेढ़ अरब डॉलर यानी करीब 75 अरब रुपये प्रति व्यक्ति लगेंगे. यह उतना ही है जितना सरकार को एक रोबोट अंतरिक्ष भेजने में लगता है. गोल्डन स्पाइक का कहना है कि वह इस खर्च को मौजूदा रॉकेटों के बूते पर और नए व्यावसायिक चालक दल वाले अंतरिक्षयान को विकसित कर कम कर सकता है.

कंपनी ये उड़ानें उन देशों, लोगों या कॉर्पोरेशन को बेचना चाहती है जिनका उद्देश्य और महत्वाकांक्षा चांद पर खोजबीन की हो. साथ ही कंपनी का दावा है कि यह खर्च चांद पर जाने के किसी भी कार्यक्रम का सिर्फ एक हिस्सा ही है.

गोल्डन स्पाइक दो साल से इस बिजनेस प्लान पर काम कर रहा है और उन्होंने चांद की सैर की घोषणा ऐसे समय पर की है जब चंद्र अभियान की 40वीं सालगिरह है. अपोलो17 पहली बार चालीस साल पहले चांद पर भेजा गया था.

इस कंपनी की नींव में जो दो लोग हैं उनमें से एक अपोलो फ्लाइट के निदेशक गेरी ग्रिफिन हैं. वह नासा के जॉन्सन स्पेस सेंटर निदेशक रहे हैं. उनके साथ नासा के पूर्व विज्ञान प्रमुख एलेन स्टर्न हैं. कंपनी के सलाहकारों में काफी जाने माने लोग हैं. नासा का अपोलो अभियान 1963 से 1972 तक चला. इसी में अपोलो 11 मिशन के तहत नील आर्मस्ट्रांग भी चांद पर गए थे.

जबकि चांद पर आखिरी अभियान सात दिसंबर 1972 के दिन भेजा गया था. यह 12 दिन बाद आ गया था. इस यान में यूजीन सेरनान ने चांद पर आखिरी कदम रखा था.

एएम/एन आर (एएफपी)

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