चरमपंथ के खिलाफ ब्रिटिश मुस्लिम | दुनिया | DW | 18.11.2013
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दुनिया

चरमपंथ के खिलाफ ब्रिटिश मुस्लिम

अगले सप्ताह लंदन के वूलविच में ब्रिटिश सैनिक की हत्या के आरोपी अदालत के सामने होंगे. मई में हुई इस हत्या की दुनिया भर के धर्म गुरुओं ने आलोचना की थी लेकिन ब्रिटेन के मुसलमानों में इस घटना से बेचैनी है.

ब्रिटिश सैनिक ली रिगबी को दक्षिणी लंदन में उनके बैरक के बाहर दिन दहाड़े मार दिया गया था. इस हमले के कारण लोगों में भारी आक्रोश पैदा हुआ. हत्या के आरोपी ने सड़क पर चल रहे एक व्यक्ति से कहा कि ब्रिटिश सैनिकों से वह मुसलमानों को मारने का बदला ले रहा है. हत्या के आरोपी माइकल आदेबोलाजो और माइकल आदेबोवाले ने अपना धर्म परिवर्तन कर इस्लाम धर्म अपना लिया और सितंबर में सुनवाई के दौरान खुद को बेगुनाह बताया.

इस हमले की धार्मिक नेताओं ने कड़ी आलोचना की लेकिन इस हत्या के बाद मुसलमानों और मस्जिदों को मिलने वाली धमकियां बढ़ गई थीं. पूर्वी लंदन की मस्जिद में शायनुल खान बताते हैं कि माहौल काफी तनावपूर्ण था, "मैंने मस्जिदों और संस्थानों के कई मामले सुने और लोगों को भी कहते सुना कि वुलविच मामले के बाद उन पर हमला हुआ. तो मुझे लगता है कि उस समय समुदाय में डर फैल गया था."

अब शांति

हालांकि अब इतने महीनों बाद शांति है. पूर्वी लंदन की मस्जिद से नमाज के वक्त लोगों को लाउडस्पीकरों से हमेशा की ही तरह बजाया जा रहा है. यहां रहने वाले कई बांग्लादेशी मूल के लोग हर सप्ताह इस मस्जिद में नमाज के लिए आते हैं. खान कहते हैं, "जो वूलविच में हुआ वह जल्दी भूला नहीं जा सकता. इसलिए उसका असर तो थोड़े दिन हमारे साथ रहेगा ही."

ब्रिटेन में 30 लाख मुसलमान रहते हैं और उनके सामने कई चुनौतिया हैं. एक ओर इंग्लिश डिफेंस लीग जैसे कट्टर दक्षिण पंथी इन लोगों के खिलाफ आम जनता को भड़काते हैं. वूलविच की घटना के बाद ईडीएल ने इस्लाम विरोधी प्रदर्शन किए. तो दूसरी ओर इस्लामी कट्टरपंथी असंतुष्ट लोगों को अपनी ओर खींचने की कोशिश करते हैं.

Osama Hasan

किलियम फाउंडेशन के ओसामा हसन

कुछ ऐसे भी संगठन हैं जो मुस्लिम समुदय के साथ समेकन बढ़ाने और कट्टरपंथ से लोगों को बचाने के लिए काम कर रहे हैं. किलियम फाउंडेशन जैसे थिंक टैंक कट्टरपंथी नजरिए को चुनौती देते है.

धमकियां

ओसामा हसन किलियम फाउंडेशन के लिए काम करते हैं. उन्हें कट्टरपंथ के खतरे अच्छे से मालूम हैं. उग्रपंथी इस्लामियों से नजर फेर कर वह और उनके साथी कट्टरपंथियों का निशाना बन गए हैं. लंदन में उनके ऑफिस में अब बम हमलों से सुरक्षित खिड़कियां लगाई गई हैं.

ओसामा को लगता है कि 2005 की जुलाई में लंदन अंडरग्राउंड और बसों पर हुए बम हमले के बाद मुस्लिम समुदाय ने काफी प्रगति की है. तब इस्लामी कट्टरपंथियों के हमले में 50 लोग मारे गए थे. वो कहते हैं, "वूलविच की घटना के बाद एक अच्छी बात यह थी कि सामान्य ब्रिटिश मुसलमानों में पूरे देश की ही तरह घृणा थी. और उनकी प्रतिक्रिया थी, बहुत हो गया..."

Abu Mumin

ओसमान सेंटर के अबू मुमिन

युवाओं का सहयोग

युवा लड़के ही कट्टरपंथ के सबसे आसान शिकार होते हैं. इसलिए पूर्वी लंदन की मस्जिद के पास बना ओस्मानी यूथ सेंटर युवाओं की मदद करता है. अबू मुमिन ने डीडब्ल्यू से बातचीत में कहा, "हमें लगता है कि खेल इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका है. खेल की भाषा सब समझते हैं और हर धर्म और देश के युवाओं के लिए यह अच्छा है. यह हमारे सबसे सफल कार्यक्रमों में एक है."

मुमिन को लगता है कि ब्रिटिश मीडिया में मुसलमानों की बुरी खबरें ही छपती हैं, जबकि वह कहते हैं कि अधिकतर लोग यहां ब्रिटिश समाज में अच्छे से घुल मिल गए हैं. पूर्वी लंदन के शायनुल खान उनसे सहमत हैं. उनके लिए ब्रिटेन मुसलमानों के लिए दुनिया में सबसे अच्छी जगहों में शामिल है. वो कहते हैं, "मैं यहां बड़ा हुआ हूं. मेरे लिए घर यानी ब्रिटेन, और जो आजादी मुझे यहां है, वो दुनिया में किसी भी और चीज से अच्छी है. मुझे ब्रिटेन का निवासी होने पर गर्व है."

रिपोर्टः योआना इम्पे/एएम

संपादनः निखिल रंजन

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