चमगादड़ों को बचाए रखना क्यों जरूरी है | विज्ञान | DW | 30.04.2021
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विज्ञान

चमगादड़ों को बचाए रखना क्यों जरूरी है

कुछ चमगादड़ खून चूसते हैं और कुछ कोविड-19 जैसे वायरस एक जगह से दूसरी जगह ले जाते हैं. इन सब के बावजूद, हम चमगादड़ों के बिना जिंदा नहीं रह सकते. आखिर क्यों?

चमगादड़ों को अक्सर बुरा माना जाता है - लेकिन हमें जिंदा रहने के लिए उनकी जरूरत है

चमगादड़ों को अक्सर बुरा माना जाता है - लेकिन हमें जिंदा रहने के लिए उनकी जरूरत है

सदियों से चमगादड़ों को लेकर कई तरह की धारणाएं बनाई गई हैं. ये धारणाएं पौराणिक कथाओं में साफ तौर पर झलकती हैं. इनमें चमगादड़ों को रहस्यमय, मायावी और कभी-कभी रात के शैतानी जीवों के तौर पर भी बताया गया है. दरअसल, गुफा में रहने वाले सुपरहीरो चमगादड़ों के बारे में कहा जाता है कि यह माया सभ्यता में बताए गए "डेथ बैट” से प्रेरित है. माया सभ्यता की पौराणिक कथाओं में, "डेथ बैट” अंधेरे और बलिदान का एक देवता है जिसे कैमाजोत के नाम से जाना जाता है.

हाल के दिनों में यह छवि और अधिक भयावह हो गई है क्योंकि चमगादड़ों को इबोला, सार्स और अब कोविड 19 जैसे जूनोटिक रोगों का स्रोत कहा जाता है. हालांकि, शोधकर्ताओं का कहना है कि असली अपराधी मानव हैं क्योंकि वे आवास और जैव विविधता को नष्ट कर रहे हैं. ये आवास और जैव विविधता मानव को उन खतरनाक बैक्टीरिया, वायरस, और माइक्रोऑर्गनिज्म से बचाते थे जिन्हें जानवर एक जगह से दूसरी जगह ले जाते हैं.

चमगादड़ों की करीब 1400 प्रजातियां हैं. चमगादड़ दुनिया के किसी भी अन्य जानवर की तुलना में सबसे ज्यादा पौधों का सेचन करते हैं. इन चमगादड़ों के नहीं रहने पर, जैव विविधता में गिरावट जारी रहेगी और बीमारी बढ़ने का खतरा बढ़ जाएगा.

चमगादड़ों के बिना केला नहीं

पृथ्वी पर मौजूद सभी स्तनधारियों में चमगादड़ 20% हैं. उनके बिना, कई पारिस्थितिक तंत्र नष्ट हो जाएंगे. ये चमगादड़ ही हैं जो केले, आम और एगेव जैसे भोजन पैदा करने वाले पौधों की प्रजातियों में फूलों को सेचित करते हैं. चमगादड़ 500 से अधिक प्रकार के पौधों को फैलाते और उन्हें पुनर्जीवित करते हैं, जिसमें कोको बीन्स भी शामिल हैं. वे फलों को खाते हैं और अंकुरित होने के लिए जमीन पर बीज फैला देते हैं.

हर साल वसंत के महीने में चमगादड़ पूरे महाद्वीप में घूमने के लिए निकलते हैं, लेकिन अब उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. वनों की कटाई और विकास के कारण जाम्बिया से लेकर जर्मनी तक, चमगादड़ के आवासों में लगातार कमी हो रही है. इस सच्चाई के बावजूद कि वे शहरी क्षेत्रों में इमारतों और पार्कों में ठहरने की जगह ढूंढते हैं, उनकी संख्या कम होने लगी है. कभी फ्लाइंग फॉक्स या फ्रूट बैट (फलों वाले चमगादड़) की करीब 200 प्रजातियां थीं, लेकिन अब आठ विलुप्त हो चुकी हैं और 22 विलुप्त होने के कगार पर हैं. चमगादड़ों के कम होने पर जैव विविधता में कमी होगी और केलों का उत्पादन कम होगा.

खून चूसने वाले चमगादड़ भी सामाजिक जानवर हैं

चमगादड़ की अधिकांश प्रजातियां कीड़े, फल या परागकण खाती हैं. हालांकि, इनकी तीन प्रजातियां ऐसी भी हैं जो खून चूसती हैं. ये मूल रूप से अमेरिका में पाई जाती हैं. हालांकि ऐसा काफी कम ही देखा गया है कि ये चमगादड़ इंसानों का खून पीते हों. वे ज्यादातर दूसरे पक्षियों का खून चूसते हैं. उनकी इस भयावह छवि के बावजूद, जर्मन शोधकर्ताओं की एक टीम ने दिखाया है कि खून चूसने वाले चमगादड़ भी समुदायिक मानसिकता वाले होते हैं.

जीवविज्ञानी साइमन रिप्जर कहते हैं, "वे बहुत जटिल सामाजिक व्यवहार दिखाते हैं. एक-दूसरे के बाल संवारते हैं. मिल-बांट कर भोजन करते हैं. अगर कोई चमगादड़ शिकार से भूखा वापस आता है, तो समूह के अन्य चमगादड़ ‘खून की उल्टी कर' भूखे चमगादड़ को खून दे देते हैं. यह वह खून होता है जो वे खुद के भोजन के तौर पर दूसरों से चूसते हैं.”

इस तरह की जागरूकता में, तबीयत खराब होने के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग (सामाजिक दूरी) का पालन करना भी शामिल है. जब कोई चमगादड़ अस्वस्थ महसूस कर रहा होता है, तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करता है. वह सुस्त हो जाता है और अपने समूह के लोगों से काफी कम मिलता है.

वीडियो देखें 06:06

चमगादड़ों को रोशनी से कैसे बचाएं

चमगादड़ों को दोष न दें

काफी कम संख्या में होने के बावजूद खून चूसने वाले चमगादड़ ज्यादा ध्यान आकर्षित करते हैं. हालांकि, चमगादड़ों की कई और प्रजातियां हैं जो वायरस को जानवरों के सहारे फैलाती हैं. ये वायरस मनुष्यों में तेजी से फैलते हैं. माना जाता है कि इबोला, सार्स, मर्स (मध्य पूर्व रेस्पिरेटरी सिंड्रोम) और कोविड-19 चमगादड़ों से उत्पन्न हुए हैं.

शरीर का तापमान ज्यादा होने की वजह से, चमगादड़ में उच्च प्रतिरक्षा होती है और संक्रामक रोगों को सहन कर सकता है. बुखार की स्थिति में, वे वायरस को रोक सकते हैं और उन्हें आगे फैला सकते हैं. इससे यह अन्य जानवरों में फैलता है.

संक्रामक बीमारी के प्रसार में चमगादड़ की भूमिका हैरान करने वाली बात नहीं है. वे चूहों के बाद दूसरे सबसे अधिक आबादी वाले स्तनपायी हैं, और सबसे ज्यादा गतिशील भी. यह एकमात्र स्तनपायी है जो उड़ सकता है. चमगादड़ घूमने के दौरान करीब 2000 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं.

#DontBlameBats कैंपेन में कहा जा रहा है कि आज महामारी के लिए चमगादड़ों को दोषी ठहराया जा रहा है, जबकि इसके लिए मनुष्य ही दोषी हैं जिन्होंने खुद को जूनोटिक रोगों के प्रति अधिक संवेदनशील बना लिया है.

हाल के अध्ययनों से पता चला है कि विशेष रूप से वनों की कटाई की वजह से जैव विविधता में भारी कमी आई है. इससे मनुष्यों और ऐसे वन्यजीवों के बीच की दूरी कम हो गई है जो चमगादड़ों में उत्पन्न होने वाले खतरनाक वायरस फैलाते हैं.

कुछ देशों में जूनोटिक बीमारियों से जुड़े होने के कारण चमगादड़ों को मारने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इन चमगादड़ों की वजह से ही जैव विविधता फिर से स्थापित होगी और मनुष्यों में वायरस का प्रसार सीमित होगा. चमगादड़ मच्छरों सहित रोग फैलाने वाले कीड़ों के विशाल समूह को भी खा जाते हैं. कुछ चमगादड़ प्रति घंटे 1,000 से अधिक कीड़े खाते हैं.

जंगल लगाने में भी मददगार हैं चमगादड़

फल खाने वाले चमगादड़ पूरी दुनिया में उनके बीज फैलाते हैं. इन चमगादड़ों से वनों की कटाई वाले क्षेत्र में ज़रूरी बीजों को फैलाने में मदद मिल सकती है. दक्षिण पूर्व एशिया के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में फिर से पेड़ लगाने में चमगादड़ मदद कर रहे हैं. चमगादड़ों की सहायता से ही हर साल 800 हेक्टेयर अफ्रीकी वुडलैंड को फिर से विकसित किया जा रहा है.

मेडागास्कर में चमगादड़ की प्रजातियां उन कीटों को खाती है जो फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं. साथ ही, वनों की कटाई वाली भूमि को फिर से हरा-भरा बनाने में भी ये चमगादड़ मदद कर रहे हैं. केंब्रिज यूनिवर्सिटी के जूलॉजिस्ट (प्राणी विज्ञानी) रिकार्डो रोचा के शोध से पता चलता है कि कैसे मेडागास्कर में चावल के किसान कीटों से होने वाले फसल के नुकसान की भरपाई के लिए अधिक जंगल काट रहे थे, लेकिन अब ये चमगादड़ उन कीटों को खाकर किसानों की मदद कर रहे हैं. रोचा का मानना है कि अब फसल का नुकसान कम होने और खेती के लिए जगह बनाने की वजह से होने वाले पेड़ों की कटाई में कमी आएगी.

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