चक्रव्यूह के सत्ताइस द्वार | दुनिया | DW | 31.05.2015
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दुनिया

चक्रव्यूह के सत्ताइस द्वार

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने मतदाताओं से यूरोपीय संघ की सदस्यता पर जनमत संग्रह का वादा किया था. अब वे संघ में सुधारों के लिए 27 देशों को मनाने के अभियान पर हैं. सबको मनाना चक्रव्यूह के 27 द्वार तोड़ने जैसा है.

कैमरन यूरोपीय संघ के सुधारों पर दूसरे सदस्य देशों को मनाने के लिए इन दिनों जर्मनी सहित कई देशों का दौरा कर रहे हैं. जर्मनी में चांसलर अंगेला मैर्केल ने कैमरन से हुई बातचीत में यूरोपीय संघ में परिवर्तन की संभावना से इंकार नहीं किया और कहा कि उन्होंने ब्रिटेन की उम्मीदों और इच्छाओं के बारे में बात की. चांसलर ने कहा कि यूरोप में आवाजाही की आजादी के साथ सामाजिक कल्याण के दुरुपयोग जैसे कुछ इलाके हैं जिनमें जर्मनी की भी चिंताएं हैं. यहां होने वाले सुधार जर्मनी के भी हित में हो सकते हैं.

इसके विपरीत पोलैंड ने यूरोप में आवाजाही पर रोक लगाने के ब्रिटेन के सुधार प्रस्तावों को ठुकरा दिया है और कहा है कि भेदभाव वाले सुधारों को पोलैंड नहीं मानेगा. पोलैंड के यूरोप मंत्री ने चेतावनी दी कि यदि हर देश अपनी विशेष इच्छा के साथ आएगा तो यह यूरोपीय ढांचे का अंत होगा, वह चरमरा जाएगा. चांसलर मैर्केल ने कहा कि जर्मनी ब्रिटेन में जनमत संग्रह तक की प्रक्रिया में रचनात्मक तरीके से साथ देगा. उन्होंने कहा कि यूरोप ने दिखाया है कि जहां चाह होती है वहां राह भी होती है. इस बार भी ऐसा ही होगा. पहले मुद्दों पर चर्चा होगी, उसके बाद संभावित परिवर्तनों पर विचार होगा.

दौरे पर निकलने से पहले उन्होंने भरोसा जताया था कि उन्हें जरूरी सुधार करवाने में कामयाबी मिलेगी. हालांकि उन्होंने सुधारों के बारे में खुलकर नहीं कहा है लेकिन आम तौर पर वे एकीकरण की प्रक्रिया का विरोध करते रहे हैं, वे सदस्य देशों को अधिक अधिकार दिए जाने के पक्षधर हैं. उनका सबसे बड़ा हथियार है कि यदि सुधार नहीं होते हैं तो ब्रिटेन के लोग यूरोपीय संघ छोड़ने का फैसला कर सकते हैं. लेकिन दूसरी ओर जर्मनी और फ्रांस यूरोपीय एकता को और मजबूत किए जाने की वकालत कर रहे हैं. अगले हफ्ते यूरो मुद्रा वाले 19 देशों की शिखर भेंट के लिए पेरिस और बर्लिन ने यूरो जोन में रिश्तों को और सघन बनाने का प्रस्ताव दिया है.

हालांकि ब्रिटिश जनमत संग्रह पर यूरोप में बढ़ती असहजता के बीच फ्रांस के विदेश मंत्री लौरां फाबिउस ने सदस्यता पर मतदान को बहुत जोखिम भरा और खतरनाक बताया है. ब्रिटेन के विदेश मंत्री फिलिप हैमंड का कहना है कि यूरोप पर सुधारों के एक व्यापक पैकेज की जरूरत होगी. इसका मतलब सभी सदस्य देशों में नए सिरे से यूरोपीय संघ का अनुमोदन होगा. वित्तीय संकट के बाद पिछले महीनों यूरोप में हुए चुनावों में उग्र दक्षिणपंथी और यूरोप विरोधी दलों की ताकत बढ़ी है जबकि दूसरी ओर ब्रिटेन में जनमत संग्रह के फैसले के बाद दूसरे देशों को अपने यहां इस तरह की मांगों से बचना मुश्किल होगा.

ब्रिटेन में जनमत संग्रह की कोई तारीख अभी तक तय नहीं की गई है जब मतदाताओं से पूछा जाएगा, "क्या यूके को यूरोपीय संघ का सदस्य बने रहना चाहिए?" यह सवाल ईयू जनमत संग्रह विधेयक में शामिल है जिसे ब्रिटेन की संसद में पेश किया गया है. विधेयक पर पहली बार 9 जून को चर्चा होगी. ब्रिटेन के यूरोप मंत्री डेविड लिडिंग्टन का कहना है कि सरकार के अंदर मूड यह है कि जितना जल्दी हो जाए उतना अच्छा है. हालांकि जनमत संग्रह 2017 के खत्म होने से पहले कराने की बात है लेकिन इसे निश्चित तौर पर जर्मनी और फ्रांस में होने वाले आम चुनावों से पहले कराना होगा ताकि इन देशों के चुनावों का उस पर असर न हो.

एमजे/आरआर (डीपीए, एएफपी)

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