चंद्रमा के अनछुए साउथ पोल पर जाएगा चंद्रयान-2 | भारत | DW | 12.07.2019
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भारत

चंद्रमा के अनछुए साउथ पोल पर जाएगा चंद्रयान-2

अपने चंद्रयान-2 मिशन के साथ ही भारत अंतरिक्ष में एक और ऊंची छलांग लगाने जा रहा है. दूसरा मानवरहित अभियान भेजने वाला भारत इसके साथ ही विश्व में पहली बार चंद्रमा के अनछुए साउथ पोल के राज खोलेगा.

Eis auf dem Mond bestätigt (NASA)

चंद्रमा के साउथ पोल (बाएं) और नॉर्थ पोल (दाहिने) की सतह पर मिले बर्फ के निशान.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अपनी स्वनिर्मित तकनीक से तैयार अंतरिक्षयान चंद्रयान-2 को 15 जुलाई को प्रक्षेपित करेगा. लंबी यात्रा करते हुए इसके 6 या 7 सितंबर तक चंद्रमा की सतह को छूने की उम्मीद है. कुल 14.1 करोड़ डॉलर की लागत से बने अंतरिक्षयान का लक्ष्य चंद्रमा की सतह का मानचित्र बनाना, उसके खनिजों का विश्लेषण करना और पानी की खोज करना होगा. इसरो ने अपने बयान में कहा है, कि वे "साहस के साथ वहां जाने वाले हैं जहां पहले कोई देश कभी नहीं गया है."

अंतरिक्षयान में एक लूनर ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर होगा. लैंडर में एक कैमरा, एक सीस्मोमीटर (भूकंप मापने का यंत्र), एक थर्मल उपकरण और एक नासा से मिला लेजर रेट्रोरिफ्लेक्टर लगा होगा जो कि धरती से चंद्रमा के बीच की दूरी नापने में मदद करेगा. चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के बारे में जानकारी जुटाना बहुत दिलचस्प होगा क्योंकि उत्तरी ध्रुव के मुकाबले इसका एक बड़ा हिस्सा छाया में है. इसका मतलब हुआ कि इस हिस्से में पानी के मिलने की संभावना ज्यादा है. कहीं भी जीवन को संभव बनाने के लिए पानी एक बुनियादी जरूरत है. यही कारण है कि अपने सौर मंडल में धरती के अलावा कहीं भी जीवन की संभावना तलाशने के बड़े लक्ष्य के अंतर्गत पानी तलाशना सबसे अहम है. साउथ पोल में पानी की तलाश करने वाला यह दुनिया का पहला रोवर होगा.

Modernes Indien, Raumfahrt (Dibyangshu Sarkar/AFP/Getty Images)

2008 में भारत से भेजे गए चंद्रयान-1 के प्रक्षेपण की तस्वीर.

भारत दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है. देश की जनता द्वारा दोबारा चुन कर भेजे गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को सुरक्षा और तकनीक के क्षेत्र में भारत का दमखम पूरी दुनिया के सामने दिखाने का मौका मिलेगा. इसी साल मार्च में भारत ने अपने एंटी-सैटेलाइट हथियार का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था, जिसने भारत को अंतरिक्ष क्षमताओं के मामले में अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों की कतार में ला खड़ा किया था. सन 2022 तक भारत इंसानों को भी अंतरिक्ष में भेजना चाहता है. ऐसा करने वाला वह दुनिया का चौथा देश बन सकता है. विश्व भर में छिड़ी हुई अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा में भारत लगातार मजबूती से अपने महत्वाकांक्षी कदम बढ़ा रहा है.

अमेरिका जुलाई 2019 में अपने अपोलो 11 मिशन की 50वीं वर्षगांठ मना रहा है. इसी मिशन का हिस्सा बन कर नील आर्मस्ट्रॉंग और बज ऐल्ड्रिन चंद्रमा पर पैर रखने वाले पहले इंसान बने थे. अमेरिका भी 2024 तक अपना एक मानव-सहित अंतरिक्षयान चंद्रमा के साउथ पोल पर भेजने की योजना बना रहा है. इसी साल अप्रैल में इस्राएल का एक मानवरहित अंतरिक्षयान चंद्रमा पर उतारने का सपना टूट गया जब यान चंद्रमा में कहीं क्रैश हो गया. यह निजी फंडिंग से भेजा जाने वाला पहला यान था.

कई दशकों के अंतरिक्ष रिसर्च की मदद से भारत ने 2008 में चंद्रयान-1 नाम का अपना पहला लूनर मिशन सफलतापूर्वक भेजा था. तब चंद्रमा का चक्कर लगाते हुए उसने इस बात की पुष्टि करने में मदद की थी कि चंद्रमा पर पानी मौजूद है. सन 2013 और 2014 में भारत ने मंगल ग्रह की कक्षा में अपना उपग्रह स्थापित किया, जो कि देश का पहला अंतर-ग्रह मिशन था.

आरपी/एए (एपी)

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