गैरबराबरी वाले इलाकों में सबसे ज्यादा गरीबी | दुनिया | DW | 12.07.2019
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages
विज्ञापन

दुनिया

गैरबराबरी वाले इलाकों में सबसे ज्यादा गरीबी

पूरी दुनिया में 1.3 अरब लोग गरीब हैं. संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक गरीब लोग दक्षिण एशिया और सब-सहारा अफ्रीका में रहते हैं, लेकिन उनकी संख्या कम हो रही है.

संयुक्त राष्ट्र के 2019 का वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) के अनुसार के देशों के बीच काफी अधिक आर्थिक असमानता है. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा 101 देशों को लेकर किए गए अध्ययन में यह बात सामने आयी है कि इन देशों में 2 उच्च आय, 68 मध्यम आय और 31 निम्न आय वाले हैं. इनमें 1.3 अरब लोग विभिन्न पैमानों के हिसाब से गरीब हैं. यहां गरीबी का पैमाना सिर्फ आय नहीं बल्कि खराब स्वास्थ्य, काम की खराब गुणवत्ता, संपत्ति, शिक्षा, शौचालय, पोषण और हिंसा का खतरा जैसे कारक भी शामिल हैं.

सभी विकासशील देशों में गरीबी

रिपोर्ट के अनुसार, सभी विकासशील देशों में गरीबी है, लेकिन जहां असमानता अधिक है, वह क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित है. सब-सहारा अफ्रीका और दक्षिण एशिया में सबसे ज्यादा करीब 84.5 प्रतिशत गरीबों की आबादी है. 1.3 अरब गरीब लोगों में 18 साल से कम उम्र के लोगों की संख्या करीब 66 करोड़ है. वहीं 10 साल से कम उम्र वाले बच्चों की संख्या 42 करोड़ है. इनमें 85 प्रतिशत बच्चे दक्षिण एशिया और सब-सहारा अफ्रीका में रहते हैं.

करीब 2 अरब की आबादी वाले 10 देशों ने पिछले सालों में गरीबी हटाने की गहन कोशिश की है. इनमें उच्च मध्यमवर्गीय आय वाला देश पेरू, निम्न मध्यमवर्गीय आय वाले देश बांग्लादेश, कंबोडिया, भारत, नाइजीरिया, पाकिस्तान, वियतनाम और निम्न आय वाले देश कांगो, इथोपिया व हैती शामिल हैं. और इन्हें अपने प्रयासों में कामयाबी भी मिली. सबसे तेजी से गरीबी भारत, कंबोडिया और बांग्लादेश में घटी. 2005-06 से लेकर 2015-16 के बीच भारत में 27 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया. 10 साल में गरीबी 55.1 प्रतिशत से कम होकर 27.9 पर पहुंच गई. बांग्लादेश में 2004 से 2014 के बीच 1.9 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया.

भारत के इन राज्यों में कम हुई गरीबी

भारत में पहले गरीबों की संख्या 64 करोड़ थी, जो 10 साल में कम होकर करीब 37 करोड़ रह गई है. भारत के अत्यंत पिछड़ा माने जाने वाले राज्य झारखंड में 2005-06 में गरीबी 74.9 प्रतिशत थी, जो 10 साल में घटकर 46.5 प्रतिशत पर पहुंच गई. वहीं, बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भी गरीबी तेजी से दूर हुई. इसके लिए भारत ने सभी 10 कारकों अर्थात पोषण, स्वच्छता, बाल मृत्यु दर, पीने का पानी, स्कूली शिक्षा, बिजली, स्कूल की उपस्थिति, आवास, खाना पकाने के ईंधन और संपत्ति के क्षेत्र में सुधार किए हैं.

जिन दस सालों के लिए अध्ययन किया गया है उसमें भारत में कुपोषण के मामले 44.3 प्रतिशत से घटकर 21.2 प्रतिशत हो गए. इसी तरह शिशु मृत्यु दर 4.5 प्रतिशत से घटकर 2.2 प्रतिशत हो गई. खाना पकाने के लिए ईंधन से वंचित लोगों की संख्या 53 प्रतिशत से घटकर 26 प्रतिशत, स्वच्छता से वंचितों की संख्या 50 प्रतिशत से घटकर 24 प्रतिशत, पेयजल से वंचित लोगों की संख्या 16 प्रतिशत से घटकर 6 प्रतिशत पर पहुंच गई. आवासविहीन लोगों की संख्या 45 से घटकर 23.6 प्रतिशत और संपत्तिविहीन लोगों की संख्या 37.6 प्रतिशत से घटकर 9.5 प्रतिशत हो गई.

रिपोर्ट: रवि रंजन

_______________

हमसे जुड़ें: WhatsApp | Facebook | Twitter | YouTube | GooglePlay | AppStore

 

विकसित हो चला है कभी गरीब देश रहा वियतनाम

DW.COM

संबंधित सामग्री

विज्ञापन