गूगल पर ईयू की नकेल | दुनिया | DW | 28.11.2014
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दुनिया

गूगल पर ईयू की नकेल

यूरोपीय संघ के सांसदों ने गूगल पर नकेल कसने वाला प्रस्ताव बहुमत से पारित कर दिया है. ईयू के सांसदों ने अबाध्यकारी प्रस्ताव पारित किया है कि सभी सर्च इंजिन अपनी व्यावसायिक सेवाओं को उनके बिजनेस से अलग कर दें.

वैसे तो प्रस्ताव में गूगल का साफ नाम नहीं लिया गया है. लेकिन वह निश्चित तौर पर लक्ष्य है. यूरोपीय संघ गूगल को अलग करने का अधिकार नहीं रखता. लेकिन यह इस बात का संकेत जरूर है कि कंपनी को लेकर यूरोप नाराज है.

यूरोपीय संघ के नियामक अधिकारियों की नजर में गूगल 2010 से खटक रहा है खासकर निजता के मुद्दे को लेकर. यूरोपीय अदालत ने भूलने के अधिकार के बारे में फैसला दिया था ताकि लोगों के पास एक समय के बाद सर्च इंजिन से अपने बारे में सारी जानकारी हटाने का विकल्प हो. साथ ही ईयू में कॉपीराइट के बारे में चिंता और टैक्स विवाद भी एक अहम बिंदू हैं

यूरोपीय संसद में इस अबाध्यकारी प्रस्ताव के समर्थन में 384 और विरोध में 174 मत डले. जर्मनी के रुढ़िवादी नेता आंद्रेयास श्वाब ने कहा कि यह यूरोपीय परिषद के लिए राजनैतिक संकेत है. उन्होंने कहा, "किसी भी मार्केट में मोनोपली कभी फायदेमंद नहीं रही है, न तो उपभोक्ताओं के लिए और न ही कंपनियों के लिए." हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह गूगल सर्च इंजिन का नियमित इस्तेमाल करते हैं.

गूगल ने इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं दी है. गूगल पर दबाव तब और बढ़ा जब जर्मनी और फ्रांस ने यूरोपीय संघ के प्रतिस्पर्धा नियमों का पुनरिक्षण करने की मांग की ताकि वैश्विक इंटरनेट कंपनियों को लक्षित किया जा सके. यूरोपीय आयोग एप्पल और अमेजॉन की टैक्स डील के बारे में पहले से जांच कर रहा है.

चार साल जांच

इस प्रस्ताव में गूगल या किसी और सर्च इंजिन का नाम नहीं लिया गया है, हालांकि यूरोप में गूगल का बहुत बड़ा बाजार है और कंपनी के पास करीब 90 फीसदी मार्केट है. सांसदों ने आयोग से सर्च इंजिन को उसके बाकी सर्विसों से अलग करने की सलाह पर ध्यान देने के लिए कहा है.

हालांकि कुछ नेताओं ने इस प्रस्ताव का विरोध भी किया है. आयोग गूगल की वैसे भी चार साल से जांच कर रहा है. लॉबिइंग ग्रुप कंप्यूटर एंड कम्यूनिकेशंस इंडस्ट्री असोसिएशन का कहना है कि ऑपरेशन को विभाजित करना बहुत ही ज्यादा और असाध्य हल होगा. इसका तेजी से बदलने वाले ऑनलाइन मार्केट के परिदृश्य में कोई अर्थ भी नहीं है.

इस ग्रुप के सदस्यों में गूगल, ईबे, फेसबुक, माइक्रोसॉफ्ट और सैमसंग शामिल हैं. उन्होंने कहा, "गूगल को साफ तौर पर लक्षित करते हुए संसद असल में सभी सर्च कंपनियों या सर्च इंजिन सुविधा वाली सभी ऑनलाइन कंपनियों के बारे में संकेत दे रही है कि उनके ऑपरेशन को विभाजित कर दिया जाए. यह बहुत चिंता की बात है क्योंकि हम डिजिटल सिंगल मार्केट बनाने की कोशिश कर रहे हैं."

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