गुरुद्वारे में गोलीबारी ′बेहूदा हिंसा′ | दुनिया | DW | 06.08.2012
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दुनिया

गुरुद्वारे में गोलीबारी 'बेहूदा हिंसा'

भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिका में गुरुद्वारे में हुई गोलीबारी पर अफसोस जताया है. अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई मामले की जांच में मदद कर रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा खुद जांच पर नजर रखेंगे.

मनमोहन सिंह ने कहा, "इस तरह की बेहूदा हिंसा अगर किसी धार्मिक स्थल पर हो तो इससे और दिक्कत होती है." सिंह ने उम्मीद जताई कि विस्कोन्सिन के ओक क्रीक में सरकारी अधिकारी पीड़ितों की मदद करेंगे और कोशिश करेंगे कि आगे ऐसी वारदात न हो. शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के कुछ सदस्य भारतीय प्रधानमंत्री से मिलने भी जा रहे हैं.

इस बीच अमेरिकी पुलिस ने गोली चलाने वाले शख्स की पहचान कर ली है. वाड माइकल पेग नाम का यह शख्स पहले सेना में था और उसकी उम्र 40 साल थी. वह उत्तरी कैरोलाइना की फोर्ट ब्राग यूनिट में तैनात था. मीडिया में उसे काले लोगों से घृणा करने वाले लोगों में से बताया जा रहा है. हालांकि अभी तक इस हत्याकांड के मकसद का पता नहीं चल सका है. एफबीआई सभी आशंकाओं के तार जोड़ने में जुटी है.

भारत में रह रहे सिखों ने भी हिंसा की निंदा की है. जम्मू में सैंकड़ों सिखों ने प्रदर्शन किया और अमेरिका में बंदूकों पर रोक लगाने की मांग की.

अमेरिका में भारत की राजदूत निरुपमा राव ने हमले की आलोचना की है. राव ने कहा कि राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ आतंकवाद के खिलाफ काम कर रहे सलाहकार जॉन ब्रेनन ने उनसे बात की है और हमले की निंदा की है. अमेरिका में तैनात पाकिस्तानी की राजदूत शेरी रेहमान ने भी ट्विटर में गोलीबारी को लेकर दुख जताया. वॉशिंगटन में भारतीय दूतावास ने कहा है कि वह व्हाइट हाउस की सुरक्षा समिति से संपर्क में है और एक राजनियक भी विस्कोन्सिन पहुंच चुके हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने भी हालात की ताजा खबर ली है और एफबीआई के प्रमुख रॉबर्ट म्युलर से इस सिलसिले में बात की है. उन्होंने मामले की जांच के आदेश दिए हैं. व्हाइट हाउस ने एक बयान में कहा, "राष्ट्रपति ने कहा है कि वे सुरक्षित करना चाहते हैं कि हम इस बेहूदा हिंसा की निंदा करते हैं और हम कहना चाहते हैं कि हमारे देश को सिख समुदाय से कितना कुछ मिला है और यह हमारे बड़े अमेरिकी परिवार का हिस्सा हैं." 2012 राष्ट्रपति चुनाव में ओबामा के प्रतिद्वंद्वी मिट रोमनी ने भी हिंसा की आलोचना की है और कहा है कि अमेरिका में हर कोई पीड़ितों के दुख में उनके साथ है. अमेरिका में पांच से लेकर सात लाख सिख रहते हैं. 2001 में न्यूयॉर्क हमलों के बाद पगड़ी और दाढ़ी के चलते इन्हें मुस्लिम समझा जाने लगा और यह कई हमलों का शिकार बने.

एमजी/ओएसजे(एएफपी, पीटीआई)

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