गुरुद्वारे में गोलीबारी कर छह लोगों की जान ली | दुनिया | DW | 06.08.2012
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दुनिया

गुरुद्वारे में गोलीबारी कर छह लोगों की जान ली

रविवार को अमेरिका में मिलवाउकी विस्कोन्सिन के पास ओक क्रीक के एक गुरुद्वारे में एक शख्स ने अंधाधुंध फायरिंग कर कम से कम छह लोगों को मौत की नींद सुला दिया. बाद में वह पुलिस की गोली से मारा गया.

मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी ने इस घटना को "घरेलू आतंकवाद" कहा है हालांकि इस हत्याकांड के मकसद का अभी पता नहीं चला है. अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी (एफबीआई) पुलिस के साथ मिल कर घटना की जांच करने में जुट गई है. ओक क्रीक के पुलिस प्रमुख जॉन एडवर्ड ने बताया कि अधिकारियों को फोन पर इस बारे में पता चला और वे तुरंत गुरुद्वारे में पहुंचे. हत्यारे ने एक पुलिस अधिकारी पर भी कई गोलियां चलाई और वह बुरी तरह घायल है. हत्यारे के अलावा छह लोगों की मौत हुई और पुलिस अधिकारी समेत तीन लोग जख्मी हुए हैं. इन लोगों को मिलवाउकी के अस्पताल ले जाया गया है जहां डॉक्टरों का कहना है कि उनकी हालत गंभीर बनी हुई है.

मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि रविवार को गुरुद्वारे में साप्ताहिक कीर्तन चल रहा था इसी दौरान एक बंदूकधारी वहां दाखिल हुआ और अंधाधुंध गोली चलाने लगा. बहुत देर तक तो लोग समझ ही नहीं पाए कि हो क्या रहा है. अपने पिता को गुरुद्वारे में छोड़ने आए जपाल सिंह ने बताया कि उसने बंदूकधारी को देखा था. उसके मुताबिक वह एक लंबा गोरा युवक था जिसके सिर पर बाल नहीं थे और उसने दो लोगों को पार्किंग में ही गोली मार दी. जपाल सिंह के मुताबिक, "इसके बाद वह गुरुद्वारे के उस कमरे में दाखिल हुआ जहां गुरु ग्रंथ साहिब है, वहां उसने कई लोगों पर गोली चलाई." वहां मौजूद एक और शख्स ने बताया कि कुछ ही देर में वहां औरतों और बच्चों की चीखें गूंजने लगी. खून से लथपथ पड़ी लाशें दिखने लगी.

पुलिस ने हत्यारे का नाम नहीं बताया है हालांकि यह साफ है कि उन्होंने उसकी पहचान कर ली है. स्थानीय पुलिस और एफबीआई के अधिकारियों ने ओक के उपनगर क्यूडेही की एक हाउसिंग सोसायटी के तीन ब्लॉक्स खाली करवा दिए और उसके घर को भी सील कर दिया है. पत्रकारों ने भारी हथियारों से लैस पुलिस को वहां आग बुझाने वाली गाड़ी की सीढ़ी से एक घर पर बाहर से निगरानी करते देखा है. पुलिस अधिकारी एडवर्ड का कहना है, "हम देख रहे हैं कि इस घटना के और क्या परिणाम हो सकते हैं. हम इस घटना को घरेलू आतंकवाद मान रहे हैं."

गोलीबारी की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में सिख समुदाय के लोग वहां पहुंच गए. पुलिस ने उन्हें बाहर ही रोक दिया. जो वहां पहुंच नहीं सके हैं वे लोग फोन के जरिए अपने रिश्तेदारों और मित्रों के बारे में पता करने में जुटे हैं. मौके पर पहुंची 22 साल की छात्रा हरिंदर कौर ने कहा, "हमारे गुरु की मौत हो गई है, मेरे एक दोस्त के दादा जी भी मारे गए हैं. यह आपस में करीबी से जुड़ा एक समुदाय है. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन मरा है, हम सब एक परिवार हैं." फैक्टरी में काम करने वाले 42 साल के नवरीत रमन ने कहा, "यह डरावना है, यह हमारी पूजा की जगह है. अगर यह सुरक्षित नहीं है तो कुछ भी सुरक्षित नहीं." रमन ने बताया कि गोलीबारी सुबह करीब 10.30 बजे हुई तब वहां ज्यादा लोग नहीं थे. दोपहर बाद की प्रार्थना के लिए तो 300 से ज्यादा लोग जमा होते हैं.

राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि वह और मिशेल ओबामा इस घटना के बारे में जान कर 'बेहद उदास' हुए हैं. चुनाव में उनके प्रतिद्वंद्वी रोमनी ने भी इस पर दुख जताया है. व्हाइट हाउस की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, "पूजा घर में हुई इस घटना पर दुख मनाते हुए हमें यह भी याद आ रहा है कि हमारा देश सिख लोगों की वजह से कितना समृद्ध हुआ है, जो हमारे विशाल अमेरिकी परिवार का हिस्सा हैं." अमेरिका में पांच से सात लाख सिख रहते हैं. कई बार दाढ़ी और पगड़ी की वजह से उन्हें मुस्लिम भी समझ लिया जाता है. 11 सितंबर के बाद से कई बार सिखों को मुस्लिम समझ कर उन पर इस्लाम विरोधियों ने हमले किये.

तीन हफ्ते के भीतर अमेरिका में दूसरी बार इस तरह नरसंहार की घटना हुई है. छह नवंबर को अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं. इन घटनाओं ने राष्ट्रपति ओबामा और उनके प्रतिद्वंद्वी मिट रोमनी पर देश में बंदूकों पर नियंत्रण के कानून के लिए दबाव बना दिया है.

एनआर/ओएसजे(एएफपी, रॉयटर्स)

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