′गलत उम्मीद कि बच्चे सुरक्षित हैं′ | दुनिया | DW | 10.08.2015
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दुनिया

'गलत उम्मीद कि बच्चे सुरक्षित हैं'

पूर्वी पाकिस्तान के कसूर जिले में सालों से बच्चों के यौन शोषण ने पाकिस्तान को हिला दिया है. पुलिस द्वारा मामले को दबाने की कोशिशों के बीच अखबारों और सोशल मीडिया में इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा हुई है.

पाकिस्तानी दैनिक 'डॉन' ने कसूर जिले में सालों से हो रहे यौन शोषण पर अपने संपादकीय में लिखा है, "बढ़ते राष्ट्रीय आक्रोश और राजनीतिक नुकसान को रोकने की पंजाब सरकार की कोशिशों के बीच मामले के केंद्र में ताकतवर और कमजोर वर्ग के बीच बड़ा अंतर और कानून के पालन का राजनीतिकरण है." अखबार पूछता है, "सैकड़ों लड़के और लड़कियों पर घात लगाए एक परपीड़क आपराधिक गैंग प्रांतीय सरकार के मुख्यालय से थोड़ी ही दूरी पर ऑपरेट कर रहा है और सालों तक पूरे समुदाय को धमकाकर चुप रखने में कामयाब रहता है, ये आखिर संभव ही क्यों है?"

दैनिक 'द नेशन' ने बच्चों के यौन शोषण का पर्दाफाश करने में मीडिया की भूमिका के बारे में लिखा है, "मीडिया सरकार नहीं है. हम सामूहिक रूप से यही कर सकते हैं कि संगठित अपराध पर पुलिस का ध्यान दिलाने के लिए पर्याप्त सबूत जुटाएं. यही कर सकते हैं कि माता-पिता और बच्चों का इंटरव्यू कर दहशत की कहानी के टुकड़ों को जोड़ें." अखबार अपने एडिटोरियल में लिखता है, "मीडिया मामले की तहकीकात नहीं कर सकता. हमारे पास साधन नहीं हैं. हमने बेशक दिखाया है कि फिल्मों में फायदे के लिए बच्चों का शोषण किया गया. अब यह स्वतंत्र जांच से पता चलेगा कि शोषण का पैमाना क्या था और अपराधियों को कैसे खोजा और दंड दिया जाए."

दैनिक 'एक्सप्रेस ट्रिब्यून' ने एक महीने पहले 11 जुलाई के अपने संपादकीय में पाकिस्तान को बच्चों के लिए खतरनाक जगह बताते हुए कहा था कि पाकिस्तान में बच्चों के अधिकारों की बात अत्यंत खस्ता है. अखबार ने सुप्रीम कोर्ट के वकील जिया आवान की एक रिपोर्ट का हवाला देकर कहा कि माता-पिता अपने बच्चों को पाकिस्तान की सरजमीं पर पालने पर फिर से विचार करेंगे. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2014 में पाकिस्तान में 767 बच्चों का बलात्कार किया गया और हत्या हुई. अखबार लिखता है, "अपहरण, मानव तस्करी, आत्महत्या और ऑनर किलिंग पाकिस्तान के बच्चों के लिए हकीकत है. सभी प्रांत बच्चों की रक्षा करने में विफल रहे हैं..." अखबार का कहना है कि प्रांतीय सरकारों को इन 767 बच्चों की दशा के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए.

बच्चों के यौन शोषण पर सोशल मीडिया में भी प्रतिक्रिया हुई है. इस्लामिक स्टेट और मुसलमानों और यहूदियों के रिश्तों पर किताब लिखने वाले लेखक तारिक फतह ने ट्वीट किया है, "क्या पाकिस्तान में कोई ईमानदार इंसान जिंदा नहीं रहा? बेवकूफ लोग अब कह रहे हैं बाल यौन शोषण की कहानी पाकिस्तान को दुनिया में बदनाम करने के लिए है."

ओमर कुरैशी ने ट्वीट किया है कि यौन शोषण के शिकार बच्चों के टेप कसूर में 50 रुपये में बिक रहे हैं. साफ है कि पाकिस्तान में पीडोफीलिया का बाजार है.

टेलिविजन एंकर नदीम मलिक ने सालों से बच्चों का यौन शोषण करने वाले अपराधियों पर सैनिक अदालत में मुकदमा चलाने, तेज न्याय और कठोर सजा की मांग की है.

कराची की रबिया का कहना है कि पाकिस्तान में बच्चों का यौन शोषण इतना आम है, लेकिन इस पर ऐसे पर्दा किया जाता है कि बहुत से लोग इस गलत उम्मीद में जीते हैं कि उनके बच्चे सुरक्षित हैं.

और सिद्रा रिजवी इस मामले पर टिप्पणी करते हुए लिखती हैं, "यौन शोषण कांड एक और घटना है जो मुझे यह सोचने को मजबूर करती है कि हमारे लोग क्या हो गए हैं."

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