खेल खेल में पेंटर बने टेरमान की बुलंदी का सफर | मनोरंजन | DW | 30.09.2016
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मनोरंजन

खेल खेल में पेंटर बने टेरमान की बुलंदी का सफर

इंटरनेट ने उन्हें दुनिया भर में आसानी से अपनी कला दिखाने का विकल्प दिया है. हॉलैंड के थीमे टेरमाट भी इसके गवाह है. उनकी एक फिल्म आई पेंट यूटयूब के जरिये करो़ड़ों बार देखी गई.

तीन मिनट में करीब हजार तस्वीरें. अपनी शॉर्ट फिल्म आई पेंट पर हॉलैंड के थीमे टेरमाट ने तीन साल काम किया. फिल्म की शुरुआत बहुत ही साधारण सवाल से हुई. 29 साल के टेरमाट कहते हैं, "बहुत से लोग मुझसे पूछते थे कि तुम ये क्या करते हो? तुम्हारा पेशा क्या है? मैं बताने की कोशिश करता कि मैं पेंटर हूं. इससे मुझे ये आयडिया आया कि मैं एक फिल्म बनाऊं जो मेरे काम को दिखाए. इसी तरह इसकी शुरुआत हुई."

उन्होंने 2012 में अपनी फिल्म आई पेंट को नेट पर डाला. लाखों क्लिक के साथ फिल्म वायरल हो गई. टाइम लैप्स क्लिप, बहुत सारी तस्वीरों से बनाई गई. तस्वीरें उन्होंने रिमोट कंट्रोल की मदद से खींची. फिर सबको एक साथ जोड़ा. बिना किसी डिजिटल इफेक्ट के वे ऑप्टिकल इल्यूजन तैयार करने में कामयाब रहे. हर दिन औसत एक तस्वीर बनी.

इस बीच आई पेंट को करीब 10 करोड़ बार क्लिक किया गया है. ऐसी और कोई फिल्म अब तक नहीं बनी है. पेंटिंग करने फैसला भी उन्होंने अचानक खेल खेल में लिया, "छोटी उम्र में भी मैं ड्रॉइंग किया करता था. और जब मैं डिजायन स्कूल में था तो एक साथी ने कुछ पेंट करने की चुनौती दी. उसने कहा कि मैं बेहतर ड्रॉइंग कर सकता हूं लेकिन वह बेहतर पेंटर है. मैं चुनौती स्वीकार कर ली. यह पहला मौका था जब मैंने पेंटिंग की थी. मुझे फौरन पेंटिंग से प्यार हो गया. अगले दिन मैंने फिर एक पेंटिंग बनाई, उसके अगले दिन एक और. उसके बाद मैंने स्कूल छोड़ दिया और अपने माता पिता के पास चला गया, पेंटिंग और पेंटर का बिजनेस शुरू करने."

थीमे टेरमाट की गिनती आज नामी पेंटरों में होती है. उनकी तस्वीरें 368 यूरो से लेकर 7,500 यूरो तक में बिकती हैं. उनकी सरीयल तस्वीरें बहुत से डिटेल्स के साथ होती हैं. कुछ तस्वीरों पर तो वे महीनों लगाते हैं. तो कुछ तस्वीरें कुछ घंटों में पूरी हो जाती हैं. वह शब्दों के परे बसने वाले अहसास दुनिया सामने ले आते हैं, हर बार नई और अद्भुत तस्वीरों के जरिये.

(शरीर पर कपड़े नहीं कला का आवरण है)

 

फ्रांसिस्का वार्टेनबर्ग/ओएसजे

 

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