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प्रेस कांफ्रेंस में चीन के विदेश मंत्री वांग यी
प्रेस कांफ्रेंस में चीन के विदेश मंत्री वांग यीतस्वीर: Li Xin/Xinhua/picture alliance

क्वाड को लेकर अमेरिका पर बिफरा चीन

८ मार्च २०२२

चीन ने अमेरिका पर नाटो का एशियाई संस्करण बनाने का आरोप लगाया है. अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत के गुट पर चीन ने नाराजगी दिखाई है. चीन ने उत्तर कोरिया से रिश्ते सुधारने की जिम्मेदारी भी बाइडेन प्रशासन पर डाली है.

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चीन के विदेशमंत्री वांग यी का कहना है कि पूर्वी एशिया और हिंद महासागर के लिए अमेरिकी नीति और जापान, ऑस्ट्रेलिया, भारत के साथ सैन्य संबंधों को मजबूत करना एक त्रासदी है जो क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बिगाड़ देगा.  चीनी विदेश मंत्री ने ये बातें सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में कही. यह प्रेस कांफ्रेंस बीजिंग में 13वें नेशनल पीपुल्स कांफ्रेंस के दौरान अलग से हुई जिसे विदेश मंत्री ने वीडियो लिंक के जरिए संबोधित किया और पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए. 

इन बातों से अंदाजा हो जाता है कि चीन की सत्ताधारी पार्टी एशिया की सर्वोच्च शक्ति बनने की महत्वाकांक्षा रखती है और दक्षिण चीन सागर या फिर हिमालय के क्षेत्र में पड़ोसियों के इलाकाई दावों या प्रतिरोध से उसे परेशानी हो रही है.

यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद चीन का जो रुख रहा है, उससे भी इन बातों का पता चलता है. चीन ने बातचीत की मांग और संप्रभुता का सम्मान करने की बात कह कर इस जंग से दूरी बना ली है. चीन का यह भी कहना है कि इस संघर्ष के लिए अमेरिका पर आरोप लगने चाहिए क्योंकि उसने रूस की सुरक्षा चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया.

बीजिंग में 13वें नेशनल पीपुल्स कांफ्रेंस के दौरान अलग से प्रेस कांफ्रेंस हुई
बीजिंग में 13वें नेशनल पीपुल्स कांफ्रेंस के दौरान अलग से प्रेस कांफ्रेंस हुईतस्वीर: Lu Ye/Xinhua/picture alliance

भूराजनीति के खेल

वांग यी का कहना है, "अमेरिका क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने के नाम पर भूराजनीति के खेल, खेल रहा है." उनका यह भी कहना है कि यह क्षेत्रीय सहयोग की इच्छाओं के "विरुद्ध" है और "इसका कोई भविष्य नहीं है." चीनी विदेश मंत्री ने शिकायत की है कि अमेरिका, "चीन को दबाने के लिए" अपने सहयोगियों को संगठित कर रहा है.

चीन क्वाड यानी अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग से चिढ़ गया है. चीन ने अमेरिका के उस फैसले की आलोचना की है जिसमें ऑस्ट्रेलिया को उसके पहले परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी को तैनात करने में तकनीकी मदद दी गई है. वांग यी का कहना है, " 'भारत प्रशांत रणनीति' का असली उद्देश्य नाटो का भारत प्रशांत संस्करण तैयार करना है." रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पश्चिमी देशों के संगठन के विस्तान को यूक्रेन पर हमले का एक बड़ा कारण बताते हैं.

यह भी पढ़ेंः एक हाथ में क्वाड और एक हाथ में ऑकुस अमेरिका चाहता क्या है

विवादित इलाकों पर चीन के दावे

चीन की आक्रामक विदेश नीति और दक्षिण चीन सागर के साथ ही हिमालय के क्षेत्र में विवादित इलाकों पर दावों ने जापान, भारत और उसके दूसरे पड़ोसियों के साथ दुश्मनी पैदा कर दी है. वांग यी ने बाइडेन प्रशासन से मांग की है कि वह 1970 में हुए समझौतों की भावना को दोबारा जिंदा करें, जिसने अमेरिका के साथ साम्यवादी चीन के रिश्तों की शुरुआत की थी. विदेश मंत्री ने कहा, "अमेरिका अभी भी चीन के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा है, वह लगातार हमले कर रहा है और चीन की गहरी दिलचस्पी वाले मुद्दों में समस्याओं को उकसा रहा है."

मेलबर्न में क्वाड के विदेशमंत्रियों की बैठक
मेलबर्न में क्वाड के विदेशमंत्रियों की बैठक तस्वीर: Kevin Lamarque/AP/picture alliance

चीनी विदेश मंत्री ने यह भी मांग की है कि अमेरिका को उत्तर कोरिया के साथ रिश्ते सुधारने के लिए कदम उठाने चाहिए. उन्होंने बाइडेन प्रशासन पर उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के "बातचीत को बढ़ावा देने" के लक्ष्य से उठाए "सकारात्मक कदमों" का जवाब देने में नाकाम रहने का भी आरोप लगाया.

यह भी पढ़ेंः क्वाड की बैठक में क्या बात हो रही है

अमेरिका पर जिम्मेदारी डाली

वांग यी के मुताबिक, "किस तरफ जाना है, यह मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर है कि अमेरिका क्या करता है. क्या वह समस्या के हल के लिए ठोस कदम उठाएगा या फिर कोरियाई प्रायद्वीप के मुद्दे को रणनीतिक मोलभाव करने के लिए इस्तेमाल करेगा." चीन का यह भी कहना है कि अमेरिका को उत्तर कोरिया की वैध सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए कदम उठाना चाहिए और भरोसा पैदा करना चाहिए.

विदेश मंत्री ने इस बारे में कोई ब्यौरा नहीं दिया कि ये कदम क्या हों. उन्होंने यह जरूर कहा कि चीन एक रचनात्मक भूमिका निभाना चाहता है और इसके लिए कोशिश कर रहा है. दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर लौटते हुए वांग यी ने शिकायत की है कि बाहरी लोग कोड ऑफ कंडक्ट तैयार करने में दखल दे रहे हैं, इस मामले में चीन और दक्षिण एशियाई सरकार को बातचीत के लिए अकेला छोड़ देना चाहिए.

अमेरिका और दूसरे देशों ने दक्षिण चीन सागर के कुछ इलाकों में जंगी जहाज भेजे हैं, जिन पर चीन अपना दावा करता है. इन देशों का कहना है कि इन इलाकों का इस्तेमाल सभी देशों के लोग अपने जहाजों की आवाजाही के लिए कर सकते हैं. 

इसी तरह क्वाड की हाल के दिनों में हुई कई बैठकों ने चीन को परेशान किया है. वह नहीं चाहता कि उसके इलाके में उसे बाहर रख कर कोई संगठन या देश अपने पैर जमा सके.

एनआर/एसएम(एपी)

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