क्या स्पेस एक्स के रॉकेट ने अंतरिक्ष में नई होड़ शुरू कर दी है | दुनिया | DW | 02.06.2020
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दुनिया

क्या स्पेस एक्स के रॉकेट ने अंतरिक्ष में नई होड़ शुरू कर दी है

करीब एक दशक बाद अमेरिका रूसी मदद के बिना अपने अंतरिक्ष यान के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पहुंचा है. क्या यह बाहरी अंतरिक्ष में एक नई होड़ की शुरुआत है, जिसमें सैन्य इरादे भी शामिल होंगे.

अंतरिक्ष में नई होड़

अब अंतरिक्ष अनुसंधान में निजी कंपनियां भी दाखिल हो रही हैं

बीते नौ साल से सिर्फ रूसी यान ही अंतरिक्ष यात्रियों को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) तक पहुंचा और वहां से वापस ला रहे थे. लेकिन 31 मई को जैसे ही अमेरिकी रॉकेट फॉल्कन 9 ने सफल उड़ान भरी, वैसे ही यह तय हो गया कि रूस पर यह निर्भरता अब खत्म हो चुकी है. और वह भी बड़े नए अंदाज में, जिसमें निजी कंपनियां अहम किरदार बन गई हैं.

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने आखिरी बार अपने यान से जुलाई 2011 अंतरिक्ष यात्रा की थी. उसके बाद से उसके और बाकी देशों के अंतरिक्ष यात्री रूसी यानों के जरिए ही यात्रा कर रहे थे. लेकिन टेस्ला कंपनी के संस्थापक इलॉन मस्क की एक और कंपनी स्पेस एक्स के रॉकेट ने एक नई शुरुआत कर दी है. पहली बार किसी प्राइवेट कंपनी का रॉकेट यान आईएसएस से जुड़कर पृथ्वी पर वापस लौटा है. अमेरिका की दिग्गज विमान निर्माता कंपनी बोइंग भी एक अंतरिक्ष यान बना रही है. उसे स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट नाम दिया गया है. कंपनी का लक्ष्य है कि 2021 में वह इंसान को अपने यान में सवार कर अंतरिक्ष यात्रा कराए.

सहयोग से एकाधिकार तक

संकेत साफ हैं कि इंसान को बाहरी अंतरिक्ष की यात्रा कराने वाले एलीट क्लब में अमेरिका लौट रहा है. फिलहाल रूस और चीन ही ऐसा कर रहे थे. अगर अमेरिकी कंपनियां एक और अलग किस्म का अंतरिक्ष यान बनाने में सफल हुईं तो अनाधिकारिक रूप से एक नई होड़ शुरू होगी. रूस को एक नई प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा.

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अब तक अंतरिक्ष के मामले में रूस और अमेरिका एक दूसरे को प्रतिद्वंद्वी की तरह नहीं देख रहे थे. सोवियत संघ के विघटन के बाद दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष में सहयोग लगातार बढ़ता गया. पहले अमेरिकी यान रूसी अंतरिक्ष यात्रियों को रूसी स्पेस स्टेशन मीर तक पहुंचाते रहे. अमेरिकी यानों के चालक दल में रूस के कॉस्मोनॉट्स भी होते थे.

लेकिन 2003 में अमेरिका का कोलंबिया स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष स्टेशन से लौटते समय हादसे का शिकार हुआ. फ्लोरिडा में उतरने से चंद मिनट पहले शटल जलते हुए भस्म हो गया. हादसे में भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला समेत सात क्रू मेम्बर मारे गए. इस हादसे के दो साल बाद तक अमेरिका ने सभी स्पेस फ्लाइट्स निलंबित कर दीं.

इसके बाद 2011 में वह लम्हा आया जब नासा के अंतरिक्ष यान डिस्कवरी ने अपनी आखिरी यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की. इसके बाद अमेरिका ने अपना कोई यान अंतरिक्ष में नहीं भेजा. तब से रूसी अंतरिक्ष यानों ने अमेरिकी और दूसरे देशों के अंतरिक्ष यात्रियों को आईएसएस तक पहुंचाने की जिम्मेदारी ले ली. कजाखस्तान के बाइकोनूर स्पेसपोर्ट से नियमित रूप से रूसी यान उड़ान भरने लगे. धीरे धीरे अंतरिक्ष यात्रियों के ट्रांसपोर्ट में रूस का एकाधिकार हो गया.

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लेकिन इस बीच नासा और रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कॉसमॉस के बीच खटपट भी खबरें भी आती रहीं. 2018 में रूसी यान सोयुज ने आईएसएस में डॉक किया और उसी दौरान अंतरिक्ष स्टेशन के भीतर मौजूद हवा का दबाव लीक होने लगा. जांच में आईएसएस में एक छेद मिला जिसे सील किया गया. रोस्कॉसमॉस ने इसे साजिश करार दिया. रूसी मीडिया रिपोर्टों में अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया गया.

बेहद खर्चीला सोयुज

रूस की सोयुज कैप्सूल एक बार में तीन लोगों को अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचा सकती है. बीते बरसों में रोस्कॉसमॉस ने इसका किराया भी काफी बढ़ा दिया. अमेरिकी सूत्रों के मुताबिक पहले आईएसएस तक जाने और वहां से लौटने के लिए 2.1 करोड़ डॉलर खर्च होते थे. लेकिन हाल के समय में रोस्कॉसमॉस ने 8 करोड़ डॉलर की मांग की. अब रूसी और अमेरिकी एजेंसियां साथ में सिर्फ एक और उड़ान भरने जा रही हैं. 2020 के पतझड़ में होने वाली इस यात्रा का खर्च 9 करोड़ डॉलर है.

जानकारों के मुताबिक इस खर्चीले सहयोग के बावजूद दोनों देशों को यह संतुष्टि थी कि बाहरी अंतरिक्ष का इस्तेमाल व्यावसायिक और सैन्य इरादों से नहीं किया जा रहा है.

अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन

आने वाला समय अंतरिक्ष में बढ़ती चुनौतियों का गवाह बनेगा

अंतरिक्ष में मंडराती आशंका

अब स्पेस एक्स के रॉकेट ने यह सोच बदल दी है. स्पेस एक्स पहले ही सैटेलाइट लॉन्च के मामले में रूस को कड़ी चुनौती दे रही है. अब दोनों देशों के बीच बाहरी अंतरिक्ष में सैन्य विस्तार की होड़  दिखने लगी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप 2019 के रक्षा बजट में स्पेस फोर्स बनाने का एलान कर चुके हैं. वहीं रूस भी नए हाइपरसॉनिक हथियारों का परीक्षण कर रहा है.

स्पेस ट्रैवल एक्सपर्ट आंद्रेई इयोनिन कहते हैं कि इंसान को अंतरिक्ष यात्रा कराने के अलावा रूस के पास ऐसा कुछ नहीं है, जो उसकी स्पेस में ताकत दिखाता हो. अंतरिक्ष यात्रा में एकाधिकार के जरिए रूस इस तथ्य को छुपाने में सफल रहा. वह कहते हैं, "प्रेरणा की कमी और तकनीकी पिछड़ेपन को छुपाने वाला आखिरी पर्दा गिर चुका है.”

लेकिन इसके साथ ही एक जोखिम भी शुरू हो रहा है. इयोनिन कहते हैं, आपसी सहयोग के संदेश देने वाले आईएसएस प्रोग्राम से अब तक जो कुछ हासिल हुआ है, वो इस होड़ की बलि चढ़ सकता है. इयोनिन के मुताबिक अकेले अंतरिक्ष यात्रा करना 1960 के दशक जैसी गलाकाट होड़ को बढ़ावा देगा.

रिपोर्ट: रोमान गोंशारेंको/ओएसजे

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