क्या संपत्ति कर लगाने से दूर होगी आर्थिक असमानता? | दुनिया | DW | 28.08.2019
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दुनिया

क्या संपत्ति कर लगाने से दूर होगी आर्थिक असमानता?

जर्मनी की सोशल डेमोक्रेट पार्टी पूरे देश में संपत्ति कर लगाने की बात कर रही है. यह विचार तेजी से क्यों फैल रहा है और क्या यह अमीरों और गरीबों के बीच बढ़ती खाई को पाटने में मदद करेगा?

जर्मनी की सेंटर-लेफ्ट सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (एसपीडी) ने इस हफ्ते तब सुर्खियां बटोरी जब उसने देश में असमानता को रोकने के लिए संपत्ति कर लगाने की योजना फिर से पेश की. कुछ एसपीडी नेताओं ने प्रस्ताव न माने जाने पर चांसलर अंगेला मैर्केल की कंजरवेटिव पार्टी के साथ तथाकथित महागठबंधन को समाप्त करने का भी आह्वान किया है.

एसपीडी ने यह घोषणा जर्मनी के दो राज्यों सेक्सनी और ब्रांडेनबुर्ग में होने वाले चुनाव से कुछ समय पहले की. दोनों राज्यों में 1 सितंबर को वोट डाले जाएंगे. मैर्केल की कंजरवेटिव सीडीयू पार्टी के साथ सरकार में शामिल होने के बाद एसपीडी की लोकप्रियता तेजी से कम हुई है. पार्टी के कई सारे सदस्यों ने आरोप लगाया है कि एसपीडी अपने पारंपरिक कामकाजी तबके वाले वोटरों से दूर हो रही है. क्या संपत्ति कर लगाने से सही में जर्मनी में अमीरों और गरीबों के बीच बढ़ रही खाई दूर होगी? जिस देश में यह कर लागू हैं, वहां की स्थिति देखने पर 'हां और न' दोनों तरह का जवाब सुनाई देता है.

असमानता कितनी बड़ी समस्या

वर्ष 2018 की विश्व असमानता रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के लगभग सभी हिस्सों में 1980 के बाद तेजी से संपत्ति की असमानता बढ़ी है. इसके पीछे कई कारण हैं. भारत और चीन जैसे विकासशील देशों में धन कुछ ही लोगों के पास सिमट कर रह गया है. वहीं अमेरिका में असमानता बढ़ने की वजह शैक्षणिक विषमता, कम प्रगतिशील टैक्स सिस्टम और उच्च पद पर आसीन अधिकारियों के लिए बड़ा बोनस बतायी जाती है.

वर्ष 1980 से 2016 के बीच मात्र एक प्रतिशत अमेरिकी लोगों के पास देश का 20 प्रतिशत धन जमा हो गया. वहीं 50 प्रतिशत अमेरिकी लोग इसी अवधि में और गरीब होते गए. सामाजिक रूप से जागरूक यूरोपीय लोगों के बीच अमेरिका की तरह असमानता नहीं बढ़ी, लेकिन वे भी इस ट्रेंड से अछूते नहीं हैं. वर्ष 2000 से 2005 के बीच ओईसीडी के अन्य देशों की तुलना में जर्मनी में आय में असमानता और गरीबी तेजी से बढ़ी है. जर्मन इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक रिसर्च के अनुसार देश की आधी गरीब आबादी के बराबर संपत्ति सिर्फ 45 लोगों के पास है.

एसपीडी नेतृत्व ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि समाज के धनी व्यक्तियों की संपत्ति पर एक से 1.5 प्रतिशत कर लगाने के लिए यह कारण पर्याप्त है. इस तरह के टैक्स ने अमेरिका में भी लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया, जहां डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार सीनेटर एलिजाबेथ वारेन ने हाल ही में 'अल्ट्रा मिलियनियर टैक्स' का प्रस्ताव रखा.

जर्मनी के फ्रैकफर्ट स्थित एक लॉ फर्म एलपीएजीजीवी के साझेदार और टैक्स के जानकार ओलिवर फॉन श्वाइनित्स कहते हैं, "इस तरह के टैक्स से राज्य के खजाने में अरबों की राशि जमा होती है. इन पैसों का इस्तेमाल नए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और किफायती आवास के निर्माण जैसे सामाजिक कार्यक्रमों के लिए हो सकता है. इससे युवा पीढ़ी में असमानता को लेकर बढ़ रहे गुस्से को कम करने में मदद मिलती है. यही कारण है कि इस तरह की टैक्स योजनाएं राजनीतिक रूप से काफी लोकप्रिय होती है." जर्मन समाचार पत्र डी वेल्ट के अनुसार जर्मनी के 58 प्रतिशत लोगों ने एसपीडी के इस प्रस्ताव का समर्थन किया है. लेफ्ट समर्थित वोटरों को जोड़ दें तो यह आंकड़ा 90 प्रतिशत से पार हो जाता है.

कई और भी उपाय मौजूद

वर्तमान में सिर्फ तीन देशों स्विट्जरलैंड, स्पेन और नॉर्वे में संपत्ति टैक्स लिया जाता है. आंकड़ों के अनुसार पिछले एक दशक में स्विट्जरलैंड में धन असमानता में उल्लेखनीय कमी नहीं देखी गई है. वहीं नॉर्वे में गरीबी लगातार बढ़ रही है. श्वाइनित्स का कहना है, "संपत्ति पर टैक्स विरासत या उपहार के रूप में किसी को देने के वक्त लगाया जाए." ऐसे में अधिकारियों के लिए ट्रैक करना भी आसान हो जाता है. लोग हर साल पैसा देने की जगह एक बार पैसे देने की स्थिति में कम विरोध जताते हैं.

संपत्ति पर कर लगाने के नियम को लागू करने से पहले आर्थिक और कानूनी पहलू पर भी विचार करना पड़ेगा. नौकाओं, कलाकृतियों और घरों व जमीनों की कीमतें प्रायः अलग-अलग होती है. यही वजह है कि जर्मनी की संवैधानिक अदालत ने 1996 में देश के पिछले संपत्ति कर को समाप्त कर दिया था.

जर्मनी की इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक रिसर्च ने 2018 की एक रिपोर्ट में कहा कि संपत्ति कर से देश की आर्थिक गतिविधि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, चाहे वह किसी भी रूप में हो. इससे जर्मनी के छोटे और मध्यम आकार के व्यवसाय खतरे में पड़ सकते हैं. इन दोनों क्षेत्र में ही जर्मनी के आधे से अधिक लोग नौकरी करते हैं.

यह भी एक कारण है जिसकी वजह से फ्रांस ने 2017 में संपत्ति कर को समाप्त कर दिया. इससे अर्थव्यवस्था पर काफी ज्यादा प्रभाव पड़ा था. कई सारे अमीर लोग देश छोड़ कर चले गए थे. श्वाइनित्स कहते हैं, "असमानता से गुस्से की भावना बढ़ती है. इसलिए मुझे लगता है कि एसपीडी के पास अपने प्रस्ताव के लिए एक तर्क है. गुस्से का मतलब राजनीतिक प्रणाली में अस्थिरता. लेकिन यह प्रस्ताव अभी तक अस्पष्ट है. यदि जिस मूल्य पर सम्पत्ति कर लगे उसकी सीमा काफी कम हो तो इससे मध्यम दर्जे के व्यवसाय पर चोट पहुंचेगी."

रिपोर्टः ऑस्टिन डेविस

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