क्या वाकई फायदेमंद है इंटरमिटेंट फास्टिंग? | मंथन | DW | 28.06.2019
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मंथन

क्या वाकई फायदेमंद है इंटरमिटेंट फास्टिंग?

कुछ लोग धार्मिक कारणों से उपवास करते हैं तो कुछ वजन कम करने के लिए डायट. विज्ञान की भाषा में दोनों ही फास्ट हैं. पर क्या खाना छोड़ने से शरीर को सच में फायदा मिलता है?

एक या दो हफ्तों तक अगर सिर्फ पानी, चाय और सूप के अलावा कोई ठोस भोजन ना लिया जाए, तो इससे शरीर को कोई फायदा मिलता है? वैज्ञानिक कहते हैं कि उपवास करने से फायदा होता है. लेकिन यह थ्योरी अब गलत साबित हो चुकी है कि इसके जरिए शरीर से जहरीले तत्व निकल जाते हैं. मेडीकुम हैम्बर्ग के पोषण विशेषज्ञ डॉक्टर मथियास रिडल का कहना है कि जिन चीजों की शरीर को जरूरत नहीं होती, वे पहले ही किडनी और लीवर के जरिए बाहर निकल जाते हैं, "लेकिन फास्टिंग का एंटीइनफ्लेमेट्री प्रभाव जरूर होता है, जो शरीर की मरम्मत करने की प्रक्रिया को बेहतर बनाता है."

उपवासरखने के सिर्फ एक दिन बाद ही शरीर एक तरह से फास्टिंग मोड में चला जाता है और फिर अपने अंदर मौजूद ग्लूकोज को इस्तेमाल करने लगता है. इससे ब्लड शुगर और इंसुलिन लेवल कम होने लगते हैं, शरीर का फैट घटने लगता है, पेट में जलन घटने लगती है और रक्तचाप भी बेहतर होता है. जर्मनी की एक अन्य पोषण विशेषज्ञ डॉ. अनेटे युंगहंस का इस बारे में कहना है, "कुछ मामलों में तो कोलेस्ट्रॉल का लेवल पहले के घटकर एक तिहाई रह जाता है." 

क्या आप यकीन मानेंगे कि कसरत भी फास्टिंग का हिस्सा है . दरअसल शरीर को प्रोटीन की जरूरत होती है. अगर खाने से प्रोटीन नहीं मिल रहा है, तो शरीर मांसपेशियों से प्रोटीन लेता है. ऐसे में फास्टिंग के दो दिन बाद मांसपेशियां कमजोर पड़ने लगती हैं. डॉ. मथियास रीडल के अनुसार, "खासकर बुजुर्ग और कुपोषण के शिकार लोगों को काफी दिक्कत होती है, जिन्हें फिर से मांसपेशियां बनाने में समस्या होती है. इसलिए उपवास रखने के दौरान सावधानी की जरूरत है."

ऐसे में बार बार बीमार होने वाले या फिर दिल के मरीजों को सिर्फ डॉक्टर की देखरेख में ही फास्टिंग करनी चाहिए. और जरूरी नहीं है कि फास्टिंग का फायदा उठाने के लिए आपको कई दिन भूखा रहना पड़े. रिसर्चरों ने पता लगाया है कि कम अवधि में लेकिन नियमित रूप से खाना ना खाया जाए, तो वो भी फायदेमंद होता है. नैचुरोपैथी प्रैक्टिशनर डॉ. आंद्रेआस मिषाल्सेन का कहना है, "फास्टिंग का फायदा तो होता है, भले ही कुछ घंटों या फिर एक-दो दिन के लिए हो. पहले लोग सोचते थे कि हफ्ते भर फास्टिंग करेंगे. लेकिन इसका असर बहुत जल्दी शुरू हो जाता है."

इंटरवल फास्टिंग या इंटरमिटेंट फास्टिंग अच्छा आइडिया है. चूहों पर हुए प्रयोग दिखाते हैं कि हर दिन अगर 16 घंटे तक कुछ ना खाया जाए तो शरीर पर इसका वैसा ही असर होता है जैसा उपवास रखने से होता है. डायबिटीज विशेषज्ञ प्रोफेसर अनेटे शुरमन बताती हैं, "इंटरवल फास्टिंग आपके पाचनतंत्र को फिर से दुरुस्त करती है. चूंहों में हमने देखा है कि वे शुगर और फैट मेटाबोलिज्म के बीच बेहतर तरीके से विचरण कर सकते हैं. इससे फैट मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है." इससे चूहों के लीवर में कम जहरीले तत्व जमा हुए और चूहे अपने शरीर में बने इंसुलिन को बेहतर इस्तेमाल कर पाए. दोनों ही बातें डायबिटीज को रोकने में मददगार हैं. इंटरवल फास्टिंग वजन कम करने के लिए भी अच्छी है.

रिपोर्ट: उलरीके हाइमेस/आईबी

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उपवास के वैज्ञानिक फायदे

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