क्या आपको भी सताता है बोतल वाले पानी में घुले प्लास्टिक का डर | विज्ञान | DW | 23.08.2019
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विज्ञान

क्या आपको भी सताता है बोतल वाले पानी में घुले प्लास्टिक का डर

विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानें तो प्लास्टिक वाली पानी की बोतलों से पानी में घुले माइक्रोप्लास्टिक से डरने की जरूरत नहीं है. हालांकि डब्ल्यूएचओ ने इसकी पुष्टि के लिए और रिसर्च किए जाने की जरूरत बताई.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया कि प्लास्टिक बोतलों से पानी में जितना माइक्रोप्लास्टिक घुला होता है, उसका मौजूदा स्तर काफी कम पाया गया है. यही कारण है कि उससे सेहत पर पड़ने वाले असर को भी एक "हल्का" खतरा माना जा सकता है.

पिछले एक साल में कई स्टडीज में नलके के पानी और बोतल के पानी में प्लास्टिक घुले होने की बात सामने आई है. इसके कारण आम जनता में इसे लेकर काफी चिंताएं पैदा हो गई थीं. संगठन की इस स्टडी से वे चिंताएं कुछ कम हो सकती हैं. संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी ने प्लास्टिक कणों के मुंह के रास्ते सेवन किए जाने से सेहत पर खतरे से जुड़ी पहली रिपोर्ट जारी की है. 

रिपोर्ट में बताया गया है कि कचरे के पानी में मिलने के कारण पीने के पानी के स्रोतों में प्लास्टिक पहुंचता है. पानी की बोतलों में प्लास्टिक मिला होने के तार अकसर बोटलिंग प्रक्रिया से या फिर बोतल के प्लास्टिक वाले ढक्कनों से जु़ड़े मिले.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण विभाग के ब्रूस गॉर्डन ने मीडिया को बताया, "यहां मुख्य बात यही है कि पूरी दुनिया में पानी पीने वाली जनता को यह जान कर सुकून मिले कि इस परीक्षण के आधार पर खतरे का स्तर हल्का पाया गया."

रिपोर्ट के एक लेखक और विश्व स्वास्थ्य संगठन की तकनीकी विशेषज्ञ जेनिफर दे फ्रांस ने बताया कि पानी में घुले ज्यादातर प्लास्टिक कणों का व्यास 150 माइक्रोमीटर से ज्यादा होता है और वे शरीर द्वारा उत्सर्जित कर दिए जाते हैं, जबकि "छोटे कण पाचन तंत्र की दीवार को पार कर शरीर के दूसरे ऊत्तकों तक पहुंच जाते हैं.

रिपोर्ट में उन्होंने बताया है कि इसी कारण से ज्यादा चिंता पानी में घुले इन बेहद छोटे कणों को लेकर है. हालांकि जेनिफर दे फ्रांस बताती हैं, "इन सबसे छोटे आकार वाले कणों के बारे में भी बहुत कम साक्ष्य हैं. हमें अभी पता लगाना है कि क्या सोखा जा रहा है, वो शरीर में फैल कैसे रहा है और उसका असर कैसा हो रहा है."

ब्रिटेन के नेशनल ओशेनोग्राफी सेंटर में माइक्रोप्लास्टिक पर रिसर्च करने वाली एलिस हॉर्टन बताती हैं, "अहम ये जानना है कि माइक्रोप्लास्टिक हमारे शरीर में केवल पानी के रास्ते ही नहीं पहुंचते. इसके और भी कई स्रोत हैं." जैसा कि पर्यावरण चैरिटी डब्ल्यूडब्ल्यूएएफ इंटरनेशनल की जून में आई एक स्टडी में बताया गया कि हमारे वातावरण में प्लास्टिक का इतना प्रदूषण है जिसके कारण इंसान हर हफ्ते में करीब पांच ग्राम प्लास्टिक को अपने अंदर ले रहा है जो हर हफ्ते एक क्रेडिट कार्ड खाने के बराबर होगा. उस स्टडी में पाया गया कि पीने के पानी के अलावा प्लास्टिक का एक स्रोत शेलफिश का सेवन है.

आरपी/एके (रॉयटर्स)

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