क्या अमेरिकी समझौते से खत्म होगा कतर का संकट | दुनिया | DW | 12.07.2017
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दुनिया

क्या अमेरिकी समझौते से खत्म होगा कतर का संकट

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कतर के साथ एक नया आतंकवादरोधी समझौता किया है, जिसका मकसद बाकी खाड़ी देशों के साथ एक महीने से चले आ रहे कतर संकट को खत्म करना है. लेकिन प्रतिबंध लगाने वाले देशों पर इसका ज्यादा असर नहीं दिख रहा.

कतर संकट पर मध्यस्थता कर रहे अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने कतर के साथ "आतंकवाद" का मुकाबला करने के लिए एक संधि की है. कतरी विदेश मंत्री शेख मुहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी के साथ हुआ यह समझौता कट्टरपंथी संगठनों को वित्तीय मदद रोकने के बारे में है. टिलरसन ने बताया, "इस समझौते में उन कदमों का जिक्र है, जिन्हें दोनों देश आने वाले महीनों और सालों में उठाएंगे. इन कदमों का लक्ष्य आतंकियों को वित्तीय मदद रोकना और वैश्विक स्तर पर जारी आतंकवादीगतिविधियों से निपटना है."

खाड़ी क्षेत्र में करीब एक महीने से जारी राजनयिक संकट को दूर करने के लिए टिलरसन कई दौर की वार्ताएं और करने वाले हैं. भविष्य में ऐसे समझौते अन्य खाड़ी देशों के साथ भी किये जा सकते हैं. शेख अल-थानी ने "घेराबंदी करने वाले देशों से भविष्य में साथ आने" और ऐसी डील पर हस्ताक्षर करने की अपील की. इस पूरे विवाद में टिलरसन ने कतर के रवैये को "उचित" बताया है. कतर पर प्रतिबंध लगाने वाले देशों के विदेश मंत्रियों से टिलरसन बुधवार को मुलाकात करने वाले हैं.

लेकिन कतर पर प्रतिबंध लगाने वाले खाड़ी देशों ने इस समझौते को अपर्याप्त बताया है. कतर से राजनयिक संबंध तोड़ने वाले चार देशों सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और मिस्र ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि वे "बहुत ध्यान से देख रहे हैं कि कतरी प्रशासन आतंकवाद को हर तरह से रोकने के लिए क्या कर रहा है" और केवल इस बारे में प्रतिबद्धता जताने भर पर "विश्वास नहीं किया जा सकता."

इस समझौते के बाद टिलरसन कुवैत पहुंचे हैं. सन 1981 में खाड़ी सहयोग परिषद की स्थापना के बाद से इस क्षेत्र में पैदा हुआ यह सबसे गंभीर संकट है. 5 जून को सऊदी अरब के नेतृत्व में चार खाड़ी देशों ने कतर पर आतंकवाद के पोषण के आरोप लगाते हुए सभी राजनयिक संबंध तो़ड़ लिये थे. 22 जून को उन्होंने कतर को 13 मांगों की सूची सौंपी थी, जिसे कतर ने अस्वीकार कर दिया था.

इन 13 सूत्रीय मांगों में समाचार चैनल अल-जजीरा को बंद करना, ईरान के साथ राजनयिक संबंध तोड़ना और तुर्की का सैन्य अड्डा बंद करने समेत कई मांगें शामिल थीं. मांगें मानने के लिए दी गयी 10 दिनों की मियाद खत्म होने के बाद भी समयसीमा दो दिन और बढ़ायी गयी, लेकिन कतर ने इन मांगों को नहीं माना. एक महीना बीत जाने के बाद भी प्रतिबंध झेल रहे कतर की परेशानियां कम होती नहीं दिख रही हैं.

इस दौरान टिलरसन के अलावा संयुक्त राष्ट्र के कई राजनयिकों के अलावा जर्मनी और ब्रिटेन के विदेश मंत्री भी कतर के दौर पर जा चुके हैं. अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगी देशों के बड़े वित्तीय और राजनीतिक हित खाड़ी देशों से जुड़े हैं. इसी इलाके से विश्व के कुल तेल के पांचवे हिस्से की आपूर्ति होती है. खाड़ी क्षेत्र में ही प्राकृतिक गैस के भंडार का पांचवा हिस्सा और कच्चे तेल का एक तिहाई भंडार मौजूद है. कतर में स्थित अमेरिका का मिलिट्री एयर बेस पूरे खाड़ी क्षेत्र में उसका सबसे बड़ा ठिकाना है.

आरपी/एके (एएफपी)

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