कैसे पहुंचता है अंतरिक्ष यात्रियों तक खाना | मंथन | DW | 24.10.2014
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मंथन

कैसे पहुंचता है अंतरिक्ष यात्रियों तक खाना

इस बार मंथन में आप देख सकेंगे कि कैसे हर बार बढ़िया हो फसल, साथ ही जानेंगे कि कैसे पहुंचता है अंतरिक्ष यात्रियों तक खाना.

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मंथन 108 में खास

कई बार किसान शिकायत करते हैं कि एक फसल तो अच्छी हुई लेकिन दूसरी नहीं. इसकी वजह समझने के लिए एक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है फीनोटाइपिंग. फसल को कब, कितनी और किस चीज की जरूरत है, फीनोटाइपिंग में ये सब सेंसर के जरिए पता चलता है.

अंतरिक्ष की ओर

यूरोपियन स्पेस एजेंसी ईएसए के पास एक ऐसा अंतरिक्ष यान है जो इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन आईएसएस तक सब सामान पहुंचाता है. भले ही वो अंतरिक्ष यात्रियों का खाना पीना हो या फिर स्पेस शटल का फ्यूल. नाम है ऑटोमेटिड ट्रांसफर वेहिकल या एटीवी. करीब 30 टन लोड के साथ उड़ान भरता यूरोप का स्पेस कार्गो रॉकेट. एटीवी यूरोप में बनाया गया अब तक सबसे जटिल अंतरिक्ष यान है.

क्या आप जानते हैं कि मधुमक्खियां एयर यातायात को नियंत्रित करने में मदद भी करती हैं क्योंकि ये हवा की गुणवत्ता के बारे में जानकारी देती हैं. हैम्बर्ग की हवाई पट्टी पर पाली जानी वाली मधुमक्खियों के छत्ते से मिलने वाले पराग, मोम और शहद की हर साल लैब में जांच की जाती है. पता लगाया जाता है कि एयरपोर्ट की मधुमक्खियों को कोई परेशानी तो नहीं.

मधुमक्खियों के इतना मददगार होने के बावजूद, सच्चाई यह है कि इनकी आबादी कम होती जा रही है. यहां तक कि यूरोप में तो इस बात का भी डर खड़ा हो गया कि आने वाले समय में ठीक तरह से फूलों का परागन यानि पॉलिनेशन तक नहीं हुआ करेगा.

मंथन में चलेंगे टैक्सी के सफप पर भी. मिलेंगे एक ऐसे टैक्सी ड्राइवर से जिसकी जिन्दगी वाकई किसी फिल्म से कम नहीं है.

देखना नहीं भूलिए मंथन हर शनिवार सुबह साढ़े दस बजे डीडी-1 पर.

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