कैमिस्ट्री का नोबेल भी कार्बन के नाम | विज्ञान | DW | 06.10.2010
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विज्ञान

कैमिस्ट्री का नोबेल भी कार्बन के नाम

कार्बन अणुओं के अद्बुत इस्तेमाल के लिए इस साल रसायन शास्त्र का नोबेल पुरस्कार तीन वैज्ञानिकों को दिया जा रहा है. इनके प्रयोग से कार्बन का प्रयोग कैंसर के इलाज से लेकर कंप्यूटर स्क्रीन के फिल्म तक में हो सकता है.

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अमेरिका में पुरड्रयू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर आई-इची नेगिशी गहरी नींद में सो रहे थे. तभी तड़के पांच बजे फोन की घंटी घनघना उठी. वह कहते हैं कि इससे अच्छी घंटी उन्होंने कभी नहीं सुनी. उन्हें फोन पर नोबेल पुरस्कार के बारे में बताया गया. नेगीशी का कहना है कि अगर वह कहें कि उन्हें इसकी उम्मीद नहीं थी, तो गलत होगा. वह पचासों साल से इसका इंतजार कर रहे थे.

इससे पहले मंगलवार को कार्बन पर काम करने के लिए ही रूस में जन्मे दो वैज्ञानिकों को 2010 का भौतिक शास्त्र का नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा की गई. आंद्रे गाइम और कोन्सान्टिन नोवोसेलोव ने साबित किया कि कार्बन बेहद सूक्ष्म रूप में, लगभग एक अणु जितने सूक्ष्म रूप में, अपने अंदर अद्भुत क्षमताएं रखता है.

प्रोफेसर नेगिशी, रिचर्ड हेक और अकीरा सुजूकी कई दशकों से पलाडियम कटालाइज्ड क्रॉस कपलिंग पर काम कर रहे हैं. इसके प्रयोग से लगभग नैसर्गिक रसायनों के समान रसायन तैयार किए जा सकते हैं. दवा कंपनियों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मार्केट तक में इसका खूब इस्तेमाल हो रहा है. कैंसर के इलाज के लिए समुद्री स्पंज से एक रसायन का प्रयोग होता है. लेकिन इन वैज्ञानिकों की रिसर्च के बाद कृत्रिम तौर पर भी यह रसायन तैयार किया जा सकता है.

फिलहाल अमेरिका की डेलवर यूनिवर्सिटी में काम कर रहे हेक 1960 और 1970 के दशक से इस शोध पर काम कर रहे हैं, जबकि नेगिशी और सुजूकी भी लगभग उसी वक्त से ऐसी ही रिसर्च में लगे हैं. जापान के 80 साल के सुजूकी ने नोबेल की घोषणा के बाद कि उन्हें नहीं पता अब वह कितने दिन और रहेंगे लेकिन वे युवाओं के लिए काम करते रहना चाहते हैं. जापान के प्रधानमंत्री ने भी इस बात पर खुशी जताई कि उनके दो नागरिकों को नोबेल पुरस्कार मिला है.

अमेरिकी केमिकल सोसाइटी के अध्यक्ष जोजेफ फ्रांसिस्को का कहना है कि उन्हें इस एलान से ज्यादा ताज्जुब नहीं हुआ क्योंकि वे ऐसी उम्मीद कर रहे थे. उन्होंने कहा कि इन वैज्ञानिकों ने क्रांतिकारी रिसर्च की हैं, जिससे नई दवाइयां, नई प्लास्टिक और नई धातु बनाने में मदद मिली है. इनके सामने सबसे बड़ी समस्या कार्बन के अणु तैयार करने की थी, जिससे उन्होंने पार पा लिया.

नोबेल पुरस्कार के तहत एक करोड़ स्वीडिश क्राउन यानी लगभग साढ़े छह करोड़ रुपये की रकम दी जाती है. विज्ञान के क्षेत्र में तीनों नोबेल के बाद अब साहित्य और शांति के नोबेल पुरस्कार का इंतजार है.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए जमाल

संपादनः ए कुमार

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