कैंसर की खेती | दुनिया | DW | 19.01.2011
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दुनिया

कैंसर की खेती

बीकानेर के रेलवे स्टेशन पर अल-सुबह पंजाब के भटिंडा से चली भारतीय रेल 339 आ पहुंची है. ट्रेन का असली नाम भूल कर लोग इस ट्रेन को कैंसर ट्रेन के नाम से पुकारने लगे हैं कारण ट्रेन में बड़ी संख्या में कैंसर मरीज सवार हैं.

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ये कैंसर रोगी इलाज के लिए बीकानेर के सरकारी अस्पताल आते हैं. यात्रियों में शामिल हैं पंजाब के मुक्तसर के किसान अमनदीप सिंह जो अपनी कैंसर पीड़ित माँ के इलाज के लिए आयें हैं. अमनदीप के दो और रिश्तेदार पहले से ही बीकानेर में हैं जो कैंसर के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती हैं. अमनदीप पंजाब के किसानों में बढ़ रहे कैंसर का प्रमुख कारण प्रदूषित पानी का उपयोग बताते हैं. वे कहते है अगर गंदे पानी का उपयोग किया जायेगा तो बीमारियाँ तो होंगी ही.

Indien Bikaner Krebs Patient

यात्रियों में उतरे भटिंडा के कीरत सिंह भी पानी के साथ-साथ खेती में काम में लिए जा रहे " रासायनिक खाद" को कैंसर का कारण मानते हैं . वे कहते हैं कि हरित क्रांति तो पंजाब के किसानों ने ला दी पर अब उस के लिए काम में लिए गए हानिकारक दवाओं और केमिकल्स का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है. वे कहते हैं "हम तो ज़हर की खेती कर रहे है साहब".

ट्रेन में से उतरे साठ- सत्तर लोगों की मंजिल एक ही है " आचार्य तुलसी कैंसर चिकित्सा एवं अनुसंधान केंद्र" .

केंद्र के मुखिया डॉक्टर आर. के. चौधरी पंजाब से कैंसर पीड़ितों के इतने बड़ी संख्या में आने की वजह बीकानेर में उपलब्ध सस्ता इलाज और पंजाब से बीकानेर की कम दूरी मानते हैं.

Indien Bikaner Krebs Krankenhaus

डॉक्टर चौधरी कहते हैं वैसे तो कैंसर का कोई कारण नहीं होता पर " प्रदूषित जल और हानिकारक कीटनाशक एक वजह हो सकते हैं. अस्पताल में अपनी बीमार बुआ का इलाज करवा रहे जगजीत सिंह पंजाब सरकार से कैंसर के इलाज की बेहतर सुविधाएँ और ज़हरीले पदार्थों वाले रासायनिक खादों की बिक्री तुरंत रुकवाने की मांग करते हैं.

अपनी पत्नी के गले के कैंसर का इलाज करवा रहे भटिंडा के मलखाना गाँव के दिलबाघ सिंह भी पंजाब में कैंसर रोगियों का इलाज अत्यंत महंगा और बहुत कम संख्या में उपलब्ध होना बताते हैं.

कैंसर ट्रेन का हाल ही में पंजाब सरकार के स्वास्थ्य मंत्री के साथ दौरा कर के आये पंजाब के स्वास्थ्य सचिव सतीश चन्द्र भी कैंसर रोगियों की बढती संख्या को लेकर चिंतित हैं वे बताते हैं कि अगले एक साल में पंजाब में भी कैंसर का बेहतर और सस्ता इलाज मुहैया होने लगेगा.

उधर, पटियाला के पंजाबी विश्व विद्यालय में हुए एक शोध में हानिकारक कीटनाशकों के प्रयोग से किसानों का डी. एन.ए ख़राब होने का तथ्य सामने आने से स्वास्थ्य सम्बन्धी चिंताएं और बढ़ गयी हैं. अन्य शोध में यह भी सामने आया है कि हानिकारक कीटनाशकों ,पानी और भारी धातु का उपयोग, कैंसर को फैलाता जा रहा है. कपास की खेती करने वालों के लिए तो सबसे अधिक खतरा है क्योंकि कपास में सबसे ज्यादा कीटनाशकों का प्रयोग होता है.

पंजाब के राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष जे. एस. बजाज द्वारा किये गए शोध में तो पंजाब में होनी वाली मोतौं का सबसे बड़ा कारण "प्रदूषित जल" का उपयोग माना गया है. "नाइट्रेट" के पानी में मिलने से खतरा और भी बढ़ता जा रहा है.

जानकार बताते हैं कि जैविक खेती,समस्या से निबटने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

पंजाब का मालवा क्षेत्र तो अब मौत की खेती वाला क्षेत्र बनता जा रहा है.

यह क्षेत्र पंजाब का सर्वाधिक "ब्रेस्ट कैंसर" वाला इलाका भी है. यहाँ के लोग इसे " कैंसर-ज़ोन" घोषित करने की मांग भी लम्बे समय से करते आ रहे हैं. हालात पर तुरंत काबू नहीं पाया गया तो रेल की पटरियों पर न जाने कितनी " कैंसर ट्रेनों" को और दौड़ाना पड़ेगा.

रिपोर्टः जसविंदर सहगल

संपादनः एन रंजन

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