केजीबी के राज खोलते दस्तावेज | दुनिया | DW | 27.11.2012
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दुनिया

केजीबी के राज खोलते दस्तावेज

रूस से सटा देश लिथुआनिया उन दस्तावेजों को जारी कर रहा है, जिन्हें रूसी खुफिया एजेंसी केजीबी ने तैयार किया था. इसमें सोवियत दौर की उन बातों का जिक्र है, जो आज तक अंधेरे में रही हैं.

नरसंहार के मामलों में रिसर्च करने वाली लिथुआनिया की संस्था एलजीजीआरटीसी ने इस साल के शुरू से ही दस्तावेजों को इंटरनेट पर जारी करना शुरू कर दिया.

लोगों में उन लोगों को लेकर खास दिलचस्पी दिख रही है, जो कभी पड़ोसी हुआ करते थे. लोग जानना चाहते हैं कि आस पास के कौन से घर के लोग सरकार के लिए जासूसी किया करते थे या भेदिए थे.

संस्था प्रमुख बिरूटे बुराउसकाते का कहना है, "हमारा लक्ष्य है कि हम लिथुआनिया में केजीबी की कार्यवाही को लोगों के सामने रखें. और उन लोगों के नाम उजागर करें जो केजीबी के लिए काम करते थे."

लिथुआनिया की आबादी महज 32 लाख है. देश के कई लोगों का मानना है कि द्वितीय विश्व युद्ध से लेकर 1990 के बीच रूस ने उनकी जमीन पर कब्जा कर रखा था. अब लिथुआनिया यूरोपीय संघ और नाटो का सदस्य देश है.

रूसी भाषा में 2000 फाइलों को ऑनलाइन कर दिया गया है. लिथुआनिया के इतने ही लोगों के नाम भी सार्वजनिक किए गए हैं, जो केजीबी के लिए काम किया करते थे. हालांकि बहुत सी बातों को अभी नहीं बताया गया है. अभी करीब ढाई लाख फाइलें बची हैं.

Russland Zentrale Geheimdienst KGB

केजीबी का मुख्यालय रूस के लुब्यांका में

बताया जाता है कि सोवियत संघ के विघटन से ठीक पहले यहां से कई फाइलें मॉस्को ले जाई गई थीं. अनुमान है कि 1940 से 1990 के बीच करीब 1,18,000 सूत्र केजीबी के लिए काम किया करते थे. लिथुआनिया के लोग सोवियत रूस के अधिकार का विरोध करते थे, तो उन्हें बहुत ही नियमबद्ध तरीके से दबाया जाता था. हजारों लोगों को जेल भी भेजा गया. और कई लोगों को तो सर्द इलाके साइबेरिया में काम करने भेज दिया गया. सोवियत संघ जब 1990 में टूटा, तो लिथुआनिया भी उससे अलग हो गया.

जिन लोगों की सूची इंटरनेट पर डाली गई है, उन्हें खोजना बहुत आसान है. उपनाम के अनुसार उनकी सूची तैयार की गई है. ज्यादातर नाम ऐसे लोगों के हैं, जो केजीबी के लिए रिजर्व का काम करते थे. पूर्वी यूरोप के कुछ और देशों ने इस तरह का काम करने की योजना बनाई थी, जिसका विरोध हुआ. लेकिन लिथुआनिया में इसका जम कर स्वागत हुआ.

रूस के मौजूदा राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन भी कभी रूसी खुफिया एजेंसी केजीबी के जासूस थे और जर्मनी में तैनात थे.

एजेए/एएम (डीपीए)

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