कुत्तों से प्यार पर पड़ी अदालत की मार | लाइफस्टाइल | DW | 30.12.2009
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लाइफस्टाइल

कुत्तों से प्यार पर पड़ी अदालत की मार

मद्रास हाई कोर्ट के एक फ़ैसले से जानवर पालने के शौक़ीनों की मुश्किल बढ़ सकती है. अदालत ने कहा है कि कोई भी व्यक्ति अधिकार के तहत रिहायशी इलाक़े में कुत्ते या फिर दूसरे जानवरों को नहीं रख सकता.

30 कुत्ते रखने के ख़िलाफ़ शिक़ायत

30 कुत्ते रखने के ख़िलाफ़ शिक़ायत

मद्रास हाई कोर्ट ने अपने फ़ैसले में यह भी कहा है कि कुत्ते के भौंकने, गुर्राने या उससे फैलने वाली बदबू से किसी को भी समस्या हो सकती है. जस्टिस एस तमिलवानन ने कोयम्बटूर के अधिकारियों के आदेश को सही ठहराते हुए यह फ़ैसला दिया.

इसमें डी विक्रम नाम के एक व्यक्ति को अपने घर से कुत्तों को हटाने को कहा गया क्योंकि उनसे वहां रहने वाले दूसरों लोगों को परेशानी होती थी. डी विक्रम के पास 30 कुत्ते थे. अधिकारियों ने कुछ लोगों की शिकायत के बाद यह आदेश दिया.

जज ने कहा, "इस बात पर कोई विवाद नहीं हो सकता कि शोर या बदबू से किसी को भी परेशानी हो सकती है. इसलिए कोई भी व्यक्ति अधिकार के तहत कुत्तों या फिर दूसरे जानवरों को रिहायशी इलाक़े में नहीं रख सकता."

पिछले हफ़्ते दिए गए इस फ़ैसले में आगे कहा गया है कि रिहायशी इलाक़े में कुत्तों को रखने से एक बदबू फैलती है जो सेहत के लिए नुक़सानदेह हो सकती है. अदालत के मुताबिक़ कुत्ते के भौंकने से होने वाला ध्वनि प्रदूषण और उसकी बदबू से होने वाला वायु प्रदूषण किसी भी किसी फ़ैक्ट्री से कम नहीं है. जज के मुताबिक़ इस मामले से साबित हो गया है कि कुत्ते के भौंकने और गुर्राने से लोगों को परेशानियां हुई हैं.

अदालत ने कोयम्बटूर के डी विक्रम की समीक्षा याचिका को भी ख़ारिच कर दिया. कम से कम तीन लोगों ने विक्रम के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई कि उसके लगभग 30 कुत्ते रात भर भौंकते और गुर्राते रहते हैं. साथ उनकी वजह से इलाक़े में एक अजीब सी बदबू फैली है. विक्रम में अपनी शिकायत में कहा कि अदालत ने इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया है कि उसके पड़ोसी उससे जलते हैं.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः एस गौड़

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