किशोर मांओं की संख्या कम करने की कोशिश में सिएरा लियोन | दुनिया | DW | 06.09.2019
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages
विज्ञापन

दुनिया

किशोर मांओं की संख्या कम करने की कोशिश में सिएरा लियोन

सिएरा लियोन दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां बड़ी संख्या में लड़कियां शादी से पहले ही कम उम्र में ही मां बन जाती हैं. लेकिन यह गरीब अफ्रीकी देश अब इस समस्या से निपटने में जुटा है.

उमू बंगूरा की उम्र 16 साल की थी जब वह गर्भवती हो गई. एक आदमी ने उसे पैसे दिए थे और कहा था कि वह उससे प्यार करता है. लेकिन उमू के गर्भवती होने के बाद वह लापता हो गया. अस्तित्व का ये संकट बहुत सी युवा मांए भुगतती हैं, खासकर पश्चिम अफ्रीका के देश सिएरा लियोन में. यह दुनिया के उन देशों में है जहां किशोर मांओं की तादाद सबसे ज्यादा है. उमू ने तीन महीने तक गर्भवती होने की बात छुपाकर रखी. तब तक उसने हाई स्कूल अच्छे रिजल्ट के साथ पास कर लिया था और घर छोड़कर चली गई. उसे पता था कि उसका परिवार उसके गर्भवती होने को स्वीकार नहीं करेगा.

उन दिनों को याद करते हुए उमू कहती है, "किसी ने मुझे खोजने की कोशिश नहीं की. ऐसा लगा कि उन्होंने सोचा, वह गई, उसे भूल जाओ." वह सालों तक एक जगह से दूसरी जगह भटकती रही, कई बार सिर पर छत नहीं होती. खुद और अपने बच्चे को पालने के लिए वह कभी चावल बेचती तो कभी घरों में काम करती. अब 22 साल की हो चुकी उमू बंगूरा ने बताया, "जब मैंने अपने बच्चे को जन्म दिया तो बहुत रोई क्योंकि मेरे पास उसके लिए कुछ भी नहीं था."

विकासशील देशों में हर साल 15 से 19 साल की 2.1 करोड़ से ज्यादा लड़कियां गर्भवती हो जाती हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि इस उम्र में दुनिया भर में होने वाली मौतों में मुख्य वजह गर्भावस्था की जटिलता और प्रसव के दौरान होने वाली मौतें हैं. हालांकि पिछले दो दशकों में किशोरावस्था में होने वाले जन्मदर में कमी आई है लेकिन विश्व की आबादी में लगातार वृद्धि के कारण किशोरावस्था में गर्भधारण की तादाद बढने की संभावना है. सिएरा लियोन 2017 में विश्व भर में किशोरावस्था में गर्भधारण के मामलों में 13वें नंबर पर था. प्रति 1000 किशोरियों में 113 बच्चों की पैदाइश के साथ वहां यूरोप की तुलना में 10 गुना बच्चे पैदा हुए.

शिक्षा के अभाव, गरीबी और यौन शोषण से होने वाली गर्भावस्था सिएरा लियोन में अक्सर बाल विवाह से पहले होती है. यह दूसरे अफ्रीकी देशों में गर्भावस्था की ऊंची दर से कुछ अलग है. जो लड़कियां गर्भवती हो जाती हैं उनकी या तो शादी कर दी जाती है या उन्हें घर से बाहर निकाल दिया जाता है. हालांकि सरकार और बाल संरक्षण संस्थाएं सालों से बर्थ कंट्रोल और सशक्तिकरण के जरिए किशोरियों में गर्भधारण की समस्या को कम करने की कोशिश कर रही हैं. कुछ शोधकर्ता परिवारों की भूमिका और समाज के रवैयों में बदलाव की कोशिश कर रहे हैं. थिंक टैंक ओवरसीज डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट की लीजा डेनी कहती हैं, "गर्भनिरोधक दवाओं और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता के बारे में लड़कियों को जानकारी देना अच्छा है, लेकिन ये जानकारी के अभाव की समस्या है."

शर्मऔरपरित्यक्ता

सिएरा लियोन दुनिया के सबसे गरीब देशों में एक है. विवाह पूर्व सेक्स पर वहां बहुत उदारवादी रवैया है. युवा लड़कियों और उम्रदराज लोगों के बीच संबंध बहुत सामान्य हैं जो लड़कियों को खाना, पैसा और कपड़े देते हैं. लेकिन जब लड़कियां गर्भवती हो जाती हैं तो परिवार वाले उनका परित्याग कर देते हैं. वे सोचते हैं कि उन्होंने बेवजह बेटियों की पढ़ाई पर खर्च किया. विकास संस्था की रेगिना बाश तकी कहती हैं, "गर्भ को शर्मनाक माना जाता है." असल समस्या अपनी जिंदगी पर लड़कियों के अधिकार और संबंधों में ताकत की है. कई संस्थाएं सेक्स और जेंडर को लेकर रवैये में बदलाव पर काम कर रही हैं जो सिएरा लियोन में किशोरियों में गर्भधारण की जड़ है. इन संगठनों के कार्यकर्ता सिर्फ लड़कियों से ही नहीं बल्कि उनके माता पिताओं, पुरुषों और लड़कों के साथ भी बात करते हैं.

सिएरा लियोन में 2013 में कराए गए एक सर्वे के अनुसार 15 से 19 साल की तीस प्रतिशत लड़कियां या तो गर्भवती थीं या मां बनी थीं जबति 20 प्रतिशत लड़कियों की शादी हो गई थी. गांवों में आम तौर पर लड़कियों की शादी कर दी जाती है जबकि शहरों में सिंगल मांओं को बिना किसी बाहरी मदद के अपनी जिम्मेदारी खुद उठानी पड़ती है. 2015 में गर्भवती लड़कियों को स्कूल आने पर रोक लगा दी गई थी. हालांकि इस कानून को अदालत में चुनौती दी गई है लेकिन बहुत से लोगों का कहना है कि ज्यादातर गर्भवती लड़कियां यूं भी स्कूल छोड़ देती हैं. राजधानी फ्रीटाउन के स्लम में रहने वाली 17 वर्षीया मां आद्या कहती है, "मेरे माता पिता ने कहा कि मैं बच्चे के बाप के साथ रहूं, लेकिन मैं उसके साथ नहीं रहना चाहती थी. ये मेरी गलती थी." उसे घर छोड़ना पड़ा और अब वह बहन के साथ रहती है और सड़क पर भुट्टे बेचती है.

किशोरगर्भधारणकेखिलाफअभियान

समाज के रवैये में बदलाव का अभियान पिछले एक साल से चल रहा है. वह यूं तो अच्छा चल रहा है लेकिन बहुत कम जरूरतमंद लोगों तक पहुंच रहा है. किशोरावस्था में गर्भधारण को कम करने के अभियानों का समन्वय एक राष्ट्रीय सचिवालय करता है, उसके प्रतिनिधि मोहम्मद कार्गबो कहते हैं, "हम माता पिता को बताते हैं कि वे जन्म के बाद अपनी बच्चियों को स्कूल भेजें." लेकिन ज्यादातर अपने बच्चियों को छोड़ देते हैं और वे सड़कों पर चली जाती हैं और फिर से गर्भवती हो जाती हैं. हालांकि सिएरा लियोन में किशोरावस्था में गर्भवती होने वाली लड़कियों की तादाद घट रही है लेकिन उसकी गति तेज नहीं है.

अब प्रयासों को अगले स्तर पर ले जाने की जरूरत है. इसके लिए लोगों के विश्वास और बर्ताव को समझना होगा जिसकी वजह से किशोर लडकियां गर्भवती होती हैं. मसलन ये कि जब मांओं को पता होता है कि उनकी बेटियां सेक्स कर रही हैं तो उन्हें वे बर्थ कंट्रोल के बारे में क्यों नहीं बतातीं. रेगिना बाश तकी कहती हैं कि इसके विपरीत मांएं बेटियों के गर्भवती होने पर नाराज हो जाती हैं. 'सेव द चिल्ड्रेन' संस्था युवा लोगों को इस बात की ट्रेनिंग दे रही है कि सामाजिक मान्यताएं उनके व्यवहार को कैसे प्रभावित करती हैं और उन्हें कैसे बदला जाए. मसलन रेप और यौन शोषण को दूसरे अपराधों की तुलना में कम गंभीरता से लिया जाता है.

उमू बंगूरा ने अपनी जिंदगी अपने हाथों में ले ली है और वह एक राहत संस्था के साथ किशोरी माताओं की मदद कर रही है. वह कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रही है और माता पिता के साथ समझौता कर लिया है. इसका श्रेय वह अपनी एक दोस्त को देती है जिसने कहा था, मां बनने के साथ जिंदगी खत्म नहीं हो जाती.

एमजे/एके (थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन)

_______________

हमसे जुड़ें: WhatsApp | Facebook | Twitter | YouTube | GooglePlay | AppStore

देखिए लड़कियां क्या क्या झेल रही हैं

DW.COM

संबंधित सामग्री

विज्ञापन