कितनी आजाद है एशिया की प्रेस | दुनिया | DW | 03.05.2013
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दुनिया

कितनी आजाद है एशिया की प्रेस

अरब बसंत को दो साल हो गए हैं, लेकिन जनता की इस क्रांति के बाद भी दुनिया भर में सरकारें अभिव्यक्ति की आजादी का गला घोट रही हैं. एशिया प्रशांत इलाके में प्रेस आजादी की हालत काफी खराब है.

मीडिया पर निगरानी रखने वाले अमेरिकी संगठन फ्रीडम हाउस ने एक सर्वे किया है जिसमें एशिया प्रशांत देशों की साझा रेटिंग पहले से तो बेहतर हुई है लेकिन यहां के कुछ देशों में प्रेस की आजादी की हालत काफी खराब है. अपनी रिपोर्ट में संगठन ने लिखा है कि इलाके में ऐसे देश हैं जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता न के बराबर है. जैसे उत्तर कोरिया और चीन. पिछले सालों में अफगानिस्तान और म्यांमार के कुछ खुलने से वहां प्रेस आजादी की हालत बेहतर हुई है, लेकिन थाइलैंड में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की हालत फिर बिगड़ी है. कुछ ऐसी ही हालत कंबोडिया, हांगकांग, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका की है.

फ्रीडम हाउस के प्रमुख डेविड क्रेमर ने कहा, "मध्यपूर्व में क्रांति के दो साल बाद हम देख रहे हैं कि दुनिया भर में तानाशाह सरकारें ऑनलाइन और ऑफलाइन राजनीतिक बहस पर रोक लगाने की कोशिश कर रही हैं." क्रेमर के मुताबिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता घटने से दुनिया भर में लोकतंत्र की हालत नाजुक हो गई है. इसलिए स्वतंत्र पत्रकारिता को बनाए रखना और उसे सुरक्षित करना और भी जरूरी हो गया है.

Logo Freedom House

फ्रीडम हाउस संगठन का सर्वे

रिपोर्ट के मुताबिक बेलारूस, क्यूबा, एक्वेटोरियल गिनी, एरित्रिया, ईरान, उत्तर कोरिया, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान में प्रेस स्वतंत्रता सबसे ज्यादा खतरे में है. इलाके के हिसाब से मध्यपूर्व और उत्तर अफ्रीका की हालत सबसे खराब है. रिपोर्ट के मुताबिक लीबिया और ट्यूनीशिया क्रांति के बाद खुले और उनकी हालत अब अच्छी है लेकिन मिस्र में दोबारा प्रेस आजादी कम हो रही है. वहीं, बहरीन, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात में प्रेस की आजादी घटी है.

रिपोर्ट में रूस के बारे में लिखा है कि चीन की तरह ही वहां की सरकार भी पारंपरिक मीडिया पर अपनी पकड़ बनाए रखती है. यानी मीडिया पर सरकार का नियंत्रण है. चीन और रूस, दोनों की सरकारें उनके खिलाफ बोलने वाले कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लेती हैं, उन्हें गिरफ्तार करती हैं या उन पर कानूनी कार्रवाई करती हैं. फ्रीडम हाउस के मुताबिक आर्थिक मंदी का भी प्रेस की आजादी पर असर पड़ा है. ग्रीस और स्पेन में पत्रकारों की अभिव्यक्ति पर पहले से ज्यादा रोक लगाई गई है.

एमजी/एएम(डीपीए,एपी)

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