कालेधन में भारत सरकार ने बताए तीन नाम | दुनिया | DW | 27.10.2014
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दुनिया

कालेधन में भारत सरकार ने बताए तीन नाम

भारत सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के सामने विदेशी बैंकों में धन रखने वाले तीन लोगों के नाम जाहिर कर दिए. इनमें डाबर ग्रुप के चेयरमैन प्रदीप बर्मन का भी नाम है.

एटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू की बेंच के सामने कहा कि केंद्र सरकार विदेशों में खाता रखने वाले तीन खाताधारियों के नाम जाहिर करेगी. उनमें डाबर के ग्रुप चेयरमैन प्रदीप बर्मन, गुजरात के राजकोट शहर के कारोबारी पंकज चमनलाल लोधिया और गोवा की खान मालिक राधा एस टिंबलु के नाम शामिल हैं.

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कांग्रेस पार्टी के चार सदस्यों के खिलाफ इस समय जांच चल रही है, जिनमें एक मनमोहन सिंह की पूर्व सरकार में मंत्री रहे हैं. कहा जा रहा है कि जांच पूरी होने पर उनके नामों की भी घोषणा की जा सकती है. टेलिविजन रिपोर्टों का कहना है कि चार कांग्रेस पार्टी सदस्यों में दो महाराष्ट्र के ताकतवर राजनीतिक परिवार के हैं.

नाम के सार्वजनिक किए जाने के बाद डाबर ग्रुप ने आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि प्रदीप बर्मन का खाता कानूनी तौर पर खोला गया था जब वे अनिवासी भारतीय थे. डाबर ग्रुप ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि विदेशी खाता वाले सभी लोगों को एक ही ब्रश से रंगा जा रहा है.

प्रदीप बर्मन का नाम आने के बाद डाबर के शेयरों के भाव में भारी गिरावट आई है.

नरेंद्र मोदी की सरकार ने विदेशों में जमा काला धन वापस लाने का वादा किया है और केंद्र सरकार स्विट्जरलैंड पर वहां के बैंकों में जमा अवैध धन के भारतीय खाताधारियों के बारे में जानकारी के लिए दबाव बढ़ा रही है. मामले की जांच के लिए रिटायर्ड जस्टिस एमबी शाह के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय विशेष जांच दल का गठन किया है. वॉशिंगटन स्थित ग्लोबल फाइनैंशियल इंटिग्रिटी संस्था के अनुसार 1948 से 2008 के बीच में भारतीयों ने विदेशी बैंकों में 462 अरब डॉलर जमा छुपाकर रखे हैं.

एमजे/आईबी

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