कार्टून प्रदर्शनी के बाहर फायरिंग | दुनिया | DW | 04.05.2015
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

कार्टून प्रदर्शनी के बाहर फायरिंग

पैगंबर मोहम्मद कार्टून प्रदर्शनी के बाहर अमेरिकी पुलिस ने दो बंदूकधारियों को मारा. अमेरिकी इंटेलीजेंस ग्रुप ने हमले के लिए इस्लामिक स्टेट को जिम्मेदार ठहराया.

अमेरिकी प्रांत टेक्सस की गारलैंड पुलिस के मुताबिक रविवार शाम कार में सवार दो हथियारबंद व्यक्ति कॉन्फ्रेंस सेंटर की बढ़े. उन्होंने सेंटर के बाहर मौजूद सुरक्षाकर्मियों पर फायरिंग की. पुलिस ने अपने बयान में कहा, "गारलैंड पुलिस के अफसर बंदूकधारियों के साथ उलझे, दोनों को गोली मारकर खत्म किया गया."

पुलिस के मुताबिक बंदूकधारियों ने एक सिक्योरिटी गार्ड को जख्मी किया. सुरक्षाकर्मी के पैर में गोली लगी. प्राथमिक उपचार के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.

हमलावरों की पहचान पुख्ता करने की कोशिश की जा रही है. साइट इंटेलीजेंस ग्रुप के मुताबिक इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों ने हमले की जिम्मेदारी ली है. साइट के मुताबिक अबु हुसैन अलब्रिटानी ने ट्वीट कर कहा है कि, "हमारे दो भाइयों ने" टेक्सस में हो रही पैगंबर मोहम्मद प्रदर्शनी में "फायरिंग की." इस्लामिक स्टेट के ब्रिटिश लड़ाके ने चेतावनी देते हुए कहा, "उन्हें लगा कि वे टेक्सस में इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों से सुरक्षित हैं."

USA Texas Mohammed Karikaturen Anschlag

हमलावरों की पहचान अभी साफ नहीं

हमले के वक्त करीब 200 लोग प्रदर्शनी में मौजूद थे. इसमें हॉलैंड के अति दक्षिणपंथी और विवादित नेता गीर्ट विल्डेर्स ने भी हिस्सा लिया. प्रतियोगिता अमेरिकी दक्षिणपंथी संगठन अमेरिकन फ्रीडम डिफेंस इनिशिएटिव ने आयोजित कराई. मुसलमानों के खिलाफ खुलकर बोलने वाले डच नेता गीर्ट विल्डेर्स को इसका मुख्य चेहरा बनाया गया.

स्थानीय पुलिस के मुताबिक प्रतियोगिता की संवेदनशीलता देखते हुए उसने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये थे. पुलिस को संभावित हमले का अंदेशा था.

विल्डेर्स ने फायरिंग की घटना पर हैरानी जताई, "मैं हैरान हूं. मैंने सिर्फ आधे घंटे तक कार्टून, इस्लाम और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बात की और उसके बाद मैंने परिसर छोड़ दिया."

बाहर फायरिंग होते ही पुलिस ने विल्डेर्स को अपनी सुरक्षा में ले लिया. डच नेता ने इसे मूल्यों पर हमला करार दिया, "यह हम सब की स्वतंत्रता पर हमला है. मुझे उम्मीद है कि यह अल कायदा की हत्या सूची से नहीं जुड़ा होगा."

इस्लाम में मूर्ति पूजा नहीं की जाती. लेकिन बीते एक दशक में कई अखबारों और पत्रिकाओं ने इस्लामिक कट्टरपंथ पर तंज कसने के लिए कार्टूनों का सहारा लिया है. 2005 में डेनमार्क के एक अखबार ने पैगंबर मोहम्मद के कार्टून प्रकाशित किए, कुछ मुस्लिम देशों में इसके खिलाफ उग्र प्रदर्शन हुए.

इसी साल जनवरी में फ्रांस की पत्रिका शार्ली एब्दॉ ने भी पैगंबर मुहम्मद के कार्टून बनाए. पत्रिका के कार्यालय पर हमला हुआ, जिसमें 12 लोग मारे गए.

अमेरिका में कई लोग प्रतियोगिता आयोजित कराने वाले संगठन अमेरिकन फ्रीडम डिफेंस इनिशिएटिव की आलोचना कर रहे हैं. संगठन पर इस्लाम के खिलाफ भावनाओं को भड़काने के आरोप लगते हैं.

ओएसजे/आरआर (एपी, एएफपी)

DW.COM

संबंधित सामग्री

विज्ञापन