काम कम और वेतन ज्यादा | दुनिया | DW | 01.06.2014
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दुनिया

काम कम और वेतन ज्यादा

क्या ऐसा हो सकता है कि काम के घंटे कम हो जाएं और आपको आराम करने का ज्यादा वक्त मिले. स्वीडन में इस तरह का प्रयोग किया जा रहा है. मिसाल के तौर पर रॉबर्ट नीलसन से मिलिए.

रॉबर्ट 25 साल के कार मैकेनिक हैं और टोयोटा के वर्कशॉप में काम करते हैं. वह हर रोज सुबह जल्दी उठ जाते हैं. लेकिन फौरन काम पर जाने की जगह आराम से तैयार होते हैं. नाश्ता करते हैं. फिर जरा जॉगिंग करने जाते हैं. तब कहीं दफ्तर का नंबर आता है. घूमते टहलते दोपहर को ऑफिस पहुंचते हैं. और शाम छह बजे तक विदा हो जाते हैं.

नीलसन कहते हैं, "मेरे दोस्त मुझसे जलते हैं. उन्हें लगता है कि मैं सिर्फ छह घंटे काम करता हूं और मुझे आठ घंटे के पैसे नहीं दिए जाने चाहिए." पहली बार स्वीडन आने वाले विदेशी हमेशा चक्कर में पड़ जाते हैं कि इतना अमीर देश इस तरह काम करने की इजाजत कैसे देता है.

क्या है राज

आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह यहां के कामगार लोगों का बहुत पढ़ा लिखा होना है, जो नई तकनीक को बहुत तेजी से समझ लेते हैं. स्वीडन में काम के घंटे की तुलना दूसरे देशों से हमेशा की जाती है.

राजधानी स्टॉकहोम के थिंक टैंक टिम्ब्रो में काम करने वाले मालिन सालेन कहते हैं, "हमारे यहां भी काम के लिहाज से 40 घंटे का हफ्ता होता है. लेकिन यहां लोग छुट्टियां दूसरी जगहों से ज्यादा लेते हैं. और हम देर से काम करना शुरू करते हैं क्योंकि हम ज्यादा देर तक पढ़ाई करते रहते हैं."

Insel Tjörn Schweden

स्वीडन का एक नजारा

पेरिस स्थित संस्था इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट ओईसीडी के मुताबिक 2012 में औसत स्वीडिश व्यक्ति ने 1621 घंटे काम किया. यह नीदरलैंड्स के 1381 घंटे से ज्यादा लेकिन ब्राजील के 1654 घंटे और अमेरिका के 1790 घंटे से कम है. चिली में साल में हर व्यक्ति 2029 घंटे और मेक्सिको में 2226 घंटे काम करता है. साहलेन कहते हैं, "हम ज्यादा काम कर सकते हैं. यह सच है."

काम कम नहीं होता

लेकिन स्वीडन के लोग यह साबित करना चाहते हैं कि कम काम करने से भी उत्पादकता बढ़ सकती है. इस मामले में अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग देने वाली संस्था का भी मानना है कि स्वीडन 61 देशों में 11वें नंबर पर है. अमेरिका तीसरे और नीदरलैंड्स पांचवें नंबर पर, जबकि ब्रिटेन 13वें और चिली और मेक्सिको सबसे नीचे हैं.

अब स्वीडन में गोथेनबुर्ग शहर की सरकार जुलाई से काम के घंटे घटाने का तजुर्बा करना चाहती है. वे सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों को दो हिस्सों में बांट रहे हैं. एक हिस्सा छह घंटे काम करेगा और दूसरा आठ घंटे. एक साल बाद नतीजे देखे जाएंगे. देखा जाएगा कि किस ग्रुप के लोगों ने बीमारी की कम छुट्टियां लीं या किस ग्रुप ने ज्यादा बेहतर नतीजे दिए.

फिलहाल यह प्रयोग सिर्फ सिविल सर्विस वालों के लिए है लेकिन नगर पार्षद मैट्स पिलहेम को भरोसा है कि सभी लोगों के लिए यह नियम लागू किया जा सकता है, "लोग बहुत सालों तक काम करते हैं. और यह जरूरी है कि उनके लिए बेहतर माहौल तैयार किया जा सके."

विरोधी भी कम नहीं

लेकिन इसके आलोचक इसे सही नहीं मानते. साहलेन कहते हैं कि 25 फीसदी कम काम करा कर ज्यादा पैसे देना अजीब मामला है, "यह सनक भरा विचार है और मुझे नहीं लगता कि यह चलेगा." इसका विरोध करने वाले कहते हैं कि फ्रांस और जर्मनी ने 35 घंटे के हफ्ते और नीदरलैंड्स ने हफ्ते में 30 घंटे काम का प्रयोग किया है और उनका नतीजा मिला जुला ही रहा है.

गोथेनबुर्ग नगर परिषद की सदस्य मारिया राइडन का कहना है, "यह लोकप्रिय और सामाजिक विचार है लेकिन अर्थव्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक और हमें इस पर आगे नहीं बढ़ना चाहिए. हम ज्यादा काम कर सकते हैं."

लेकिन दूसरी विचारधारा के लोगों का कहना है कि छह घंटे के काम में लोग बीमार भी कम पड़ते हैं और काम के दौरान ब्रेक भी कम लेते हैं. इससे अंत में नतीजा बेहतर ही होगा. वामपंथी पार्षद पिलहेम कहते हैं कि अच्छे नतीजे आ रहे हैं, चाहें तो नीसलन के टोयोटा वाले वर्कशॉप को ही देख लीजिए.

शहर के टोयोटा वर्कशॉप ने 2002 में छह घंटे काम का नियम अपनाया. उसने एक लंबी शिफ्ट की जगह दो छोटी छोटी शिफ्ट बना दी. नीलसन कहते हैं कि उनके लिए भी छह घंटे काम करना बेहतर रहता है क्योंकि वह कम ब्रेक लेते हैं, "हर बार के ब्रेक में 10-15 मिनट तो लगता है. आपको देखना पड़ता है कि आपने काम कहां छोड़ा था."

और उन्हें तनख्वाह भी ज्यादा मिलती है. स्वीडन में महीने की औसत सैलरी 25,100 क्रोनर है और नीलसन को 29,700 मिलते हैं. टोयोटा सर्विस सेंटर की मैनेजर एलिजाबेथ जॉनसन कहती हैं, "इसका फौरन फायदा होने लगा."

एजेए/एमजे (एएफपी)

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