कान महोत्सव में ′केवल खूबसूरत′ लगने से आगे कब बढ़ेगा बॉलीवुड | लाइफस्टाइल | DW | 22.05.2019
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लाइफस्टाइल

कान महोत्सव में 'केवल खूबसूरत' लगने से आगे कब बढ़ेगा बॉलीवुड

कान फिल्म समारोह में पहुंचने वाले भारतीय सिनेमा जगत के सितारों की खूबसूरती की चर्चा तो होती है लेकिन एक फिल्म महोत्सव में उनकी किसी सम्मानित किए जाने लायक फिल्म की चर्चा आखिर कब होगी?

केवल 2018 में ही भारत भर में 1,800 से अधिक फिल्में बनीं, जो कि दुनिया में सबसे ज्यादा है. घरेलू स्तर पर तो बॉलीवुड का जवाब नहीं. हर साल यहां हजारों छोटी बड़ी फिल्में बनती हैं और कई करोड़ का फायदा होता है. एक इंडस्ट्री के रूप में बॉलीवुड लगातार फल फूल रहा है. लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर के फिल्म महोत्सवों में ऐसी इंडस्ड्री को अलग पहचान और प्रशंसा क्यों नहीं मिलती है?

कान फिल्म फेस्टिवल के रेड कार्पेट पर साल दर साल भारतीय सिनेमा जगत की सुंदरियां एक से एक शानदार लुक में नजर आती हैं. लेकिन अगर इस साल महोत्सव में शामिल फिल्मों पर नजर डालें, तो कोई भारतीय फिल्म नहीं मिलेगी. सन 1946 में शुरु हुए इस महोत्सव में कुछ भारतीय फिल्मों ने अहम पुरस्कार जीते हैं. लेकिन बीते कुछ दशकों से तो वे मुख्य प्रतियोगिता में शामिल भी नहीं हुई हैं. इस साल आधिकारिक रूप से समिति के पास भेजी गई कुल 1,845 फिल्मों में एक भी भारतीय फिल्म नहीं थी.

Gangs of Wasseypur (picture-alliance/dpa)

2012 में कान में

दक्षिणी फ्रांस के कान में आयोजित इस महोत्सव में हिस्सा लेने पहुंची भारतीय अभिनेत्री 32 वर्षीया हुमा कुरैशी का कहना है, "अब वक्त आ गया है कि भारत में भी चुनौतीपूर्ण सिनेमा का निर्माण हो". डिजायनर ड्रेस में रेड कार्पेट पर उतरी कुरैशी ने कहा, "दुर्भाग्य की बात है कि इस साल कान में कोई भी भारतीय फिल्म नहीं है." हालांकि बीते सालों में कई बॉलीवुड फिल्में प्रतियोगिता में रही हैं. हाल के सालों में बॉलीवुड में बड़ी बजट की हिट फिल्में बनाने पर ही जोर रहा है और इस दौर में बहुत बारीक, आर्ट हाउस परफॉर्मेंस वाली फिल्में बनाने की ओर ध्यान नहीं रहा. ऐसी खास और मौलिक किस्म की फिल्में ही कान जैसे अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में ध्यान खींचती हैं.

कुरैशी का कहना है, "हम बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों को लेकर इतने दीवाने हो चुके हैं कि इसे बदलने में लंबा वक्त लगेगा." कुरैशी ने सन 2012 में पहली बार कान में शिरकत की थी, जब उनकी पहली फिल्म "द गैंग्स ऑफ वासेपुर" रिलीज हुई थी. अपने आपको सबसे पहले कान फिल्म समारोह में ही बड़े पर्दे पर देखने वाली कुरैशी के लिए यह महोत्सव और भी खास है. वे कहती हैं, "हमें छोटी स्वतंत्र फिल्मों के फलने फूलने लायक जगह बनानी होगी. वरना कान या वेनिस फिल्म महोत्सवों में दिखाने लायक फिल्में कहां से आएंगी?"

कान में 12 दिनों तक चलने वाले इस सालाना फेस्टिवल में मुख्यधारा के कई भारतीय अभिनेता, अभिनेत्रियां और प्रोड्यूसर पहुंचने लगे हैं. बॉलीवुड के लीड हीरो और हीरोइनें अब नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्मों पर भी मूल संस्करणों में दिखने लगे हैं. खुद हुमा कुरैशी भी छह पार्ट्स में बनी भारतीय थ्रिलर सिरीज "लीला" लेकर आई हैं. पहले छोटे पर्दे पर दिखने को लेकर भी बड़े एक्टरों में काफी हिचकिचाहट रहती थी, जो अब कम होती दिख रही है. फेस्टिवल लायक फिल्में बनाना शायद बॉलीवुड के लिए अगला क्रांतिकारी कदम हो.

आरपी/एमजे (एएफपी)

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