काट के छोड़ने पर भी भूरे नहीं होंगे सेब | विज्ञान | DW | 17.02.2015
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विज्ञान

काट के छोड़ने पर भी भूरे नहीं होंगे सेब

अमेरिकी रेगुलेटर्स ने व्यावसायिक उत्पादन के लिए तैयार दुनिया के पहले बायोटेक सेब को अनुमति दे दी है. इसकी खासियत है कि काट कर छोड़ने पर भी यह भूरा नहीं पड़ेगा.

ऑर्गेनिक इंडस्ट्री और जीएम उत्पादों के कई आलोचक इस सेब के खिलाफ थे. इन सभी विरोधों को दरकिनार करते हुए अमेरिका के कृषि विभाग (यूएसडीए) की एनीमल एंड प्लांट हेल्थ इंस्पेक्शन सर्विस ने सेब की ऐसी दो किस्मों को मंजूरी दे दी है. ये जेनेटिकली इंजीनियर्ड सेब इस तरह से डिजाइन किए गए हैं कि इनमें भूरा पड़ने के गुण को रोका जा सके. कनाडा की एक कंपनी ओकानागन स्पेश्यालिटी फ्रूंट्स ने इसे विकसित किया है.

सेब में ब्राउनिंग यानि भूरे पड़ने का आम गुण पाया जाता है. ब्राउनिंग की प्रक्रिया सेबों में पाए जाने वाले एंजाइम्स के कारण होती है. जब भी सेब को काटा जाता है तो उसके टिशू में मौजूद एंजाइम से वातावरण की ऑक्सीजन की प्रतिक्रिया होती है. ये एंजाइम पॉलीफिनॉल ऑक्सिडेज (पीपीओ) होते हैं जो कि रिएक्शन के बाद ओ-क्विनोन्स में बदल जाते हैं. यही ओ-क्विनोन्स फिर प्रोटीन से रिएक्ट कर सेब को भूरा रंग देते हैं.

Obstbörse Äpfel

सेबों की ये किस्में 'आर्कटिक ग्रेनी' और 'आर्कटिक गोल्डेन' के नाम से बाजार में मिलेंगी

कनाडा की ओकानागन कंपनी अपनी इन दोनों किस्मों को 'आर्कटिक ग्रेनी' और 'आर्कटिक गोल्डेन' के नाम से बाजार में उतारने की योजना बना रही है. देखने में बिल्कुल आम सेबों जैसे दिखने वाले इन सेबों में यह खास गुण होगा कि काटे जाने या रगड़ से छिल जाने के बाद भी उनमें भूरापन नहीं आएगा और वह ताजे लगेंगे. ऐसे सेबों की पहली खेप 2016 के अंत तक बाजार में दिख सकती है.

सेबों की इन जीएम किस्मों को बहुत सारा प्रतिरोध भी झेलना पड़ा है. ऑर्गेनिक कंज्यूमर्स एसोसिएशन (ओसीए) ने यूएसडीए में अपील की थी कि वह इसे रोक दे. उनका कहना था कि खाने की चीजों में ऐसे जीएम बदलाव इंसानों की सेहत के लिए खराब साबित होंगे और इससे सेबों में कीटनाशकों का स्तर भी बहुत बढ़ जाएगा. ओसीए ने कहा है कि वह आगे भी कंपनियों और थोक विक्रेताओं को इन सेबों को इस्तेमाल करने के लिए हतोत्साहित करेगा. कई वैज्ञानिक, पर्यावरणविद् और उपभोक्ता संगठन इस बात से चिंतित हैं कि इसमें किए गए कृत्रिम बदलावों का कीड़े-मकोड़ों, जानवरों और इंसानों में भी कोई बुरा असर हो सकता है.

आरआर/आईबी (रॉयटर्स)

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