कसाब को भगोड़ा घोषित पर पलटा पाकिस्तान | दुनिया | DW | 13.01.2011
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दुनिया

कसाब को भगोड़ा घोषित पर पलटा पाकिस्तान

मुंबई पर 26 नवंबर को हुए हमले में शामिल सात संदिग्ध लोगों की सुनवाई कर रही पाकिस्तान की अदालत में अभियोजन पक्ष अपने रुख से पलट गया है. अभियोजन पक्ष कसाब और फहीम अंसारी को भगोड़ा घोषित करने का प्रस्ताव वापस ले रहा है.

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पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी एफआईए लाहौर हाईकोर्ट के कसाब और फहीम को भगोड़ा घोषित करने से इंकार के फैसले को चुनौती देने की याचिका जारी रखने की तैयारी में है. अभियोजन पक्ष ने हाल ही में आतंकवाद निरोधी अदालत से कहा था कि वह अपनी याचिका वापस लेने जा रहे हैं. मुंबई हमले में शामिल सात संदिग्धों के खिलाफ पाकिस्तान की इसी अदालत में सुनवाई चल रही है.

हाईकोर्ट में एफआईए की याचिका पर गुरुवार को सुनवाई होगी. अभियोजन पक्ष से जुड़े एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को यह जानकारी दी. नाम जाहिर न करने की शर्त पर इस अधिकारी ने कहा, "हम ने अब इस याचिका को वापस न लेने का फैसला किया है." बचाव पक्ष के वकीलों में से एक शहबाज राजपूत ने भी यह कहा कि अभियोजन पक्ष अपने पिछले रुख से पलट गया है.

कानूनी जानकारों का मानना है कि अभियोजकों का इस तरह से अचानक अपना रुख बदलना संदिग्धों के खिलाफ मामले को और जटिल बना देगा. इन सात संदिग्धों में लश्कर ए तैयबा का कमांडर जकी उर रहमान लखवी भी शामिल है. जानकारों के मुताबिक अब लाहौर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी होने तक आतंकवाद निरोधी अदालत में सुनवाई नहीं हो सकेगी.

एफआईए ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कसाब और फहीम को भगोड़ा घोषित करने की मांग की है. इसके साथ ही उन दोनों के खिलाफ गैर जामानती वॉरंट जारी करने की मांग भी याचिका में की गई है. एफआईए यह भी चाहती है कि इन दोनों का मुकदमा बाकी सात लोगों के मुकदमे से अलग करके चलाया जाए. कसाब को 26 नवंबर को मुंबई पर हुए हमले में उसकी भूमिका के लिए मुंबई की एक अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है. इस हमले में 166 लोगों की जान गई थी. एफआईए ने अपनी याचिका में कहा है कि कसाब और फहीम को भगोड़ा घोषित कर दिया जाना चाहिए क्योंकि दोनों भारत सरकार की कैद में हैं और उन्हें पाकिस्तान नहीं लाया जा सकता.

अभियोजन पक्ष के रुख से इस मामले में पाकिस्तान सरकार की दुविधा सामने आ गई है. इन संदिग्धों पर हमले की साजिश रचने, जरूरी धन जुटाने और हमलों को अंजाम देने के आरोप हैं. अब तक 160 गवाहों में से सिर्फ एक की पेशी हुई है और आतंकवाद निरोधी अदालत के जज तीन बार बदले जा चुके हैं.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः वी कुमार

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