करतारपुर कॉरिडोर खुला, पूर्व पीएम मनमोहन भी गए पाक | दुनिया | DW | 09.11.2019
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दुनिया

करतारपुर कॉरिडोर खुला, पूर्व पीएम मनमोहन भी गए पाक

भारत और पाकिस्तान के बीच खुले नए कॉरिडोर से होकर पहले भारतीय सिख श्रद्धालुओं का जत्था करतारपुर पहुंच गया है. इस कॉरिडोर से जाने के लिए वीजा नहीं चाहिए. यह कॉरिडोर भारत और पाकिस्तान के बीच सहयोग की एक अनोखी मिसाल है.

भारत और पाकिस्तान ने शनिवार, 9 नवंबर को इस कॉरिडोर का उद्घाटन किया, जिसके जरिए भारतीय सिख श्रद्धालु पाकिस्तान में पड़ने वाले अपने सबसे पवित्र स्थलों में से एक गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर की यात्रा कर सकेंगे.

करतारपुर गुरुद्वारे की स्थापना खुद सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक ने की थी, जो भारत-पाकिस्तान सीमा से सिर्फ चार किलोमीटर दूर है. उनकी जिंदगी के आखिरी साल इसी जगह पर गुजरे. लेकिन जब 1947 में देश का बंटवारा हुआ तो करतारपुर पाकिस्तान में चला गया.

सीमा पर भारत की तरफ होने वाले उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिस्सा लिया. उन्होंने भारतीय श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की सराहना की.

इस कार्यक्रम में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी मौजूद थे. प्रधानमंत्री मोदी से मिलने के बाद वे भी कॉरिडोर से पाकिस्तान गए. उधर पाकिस्तान में भी इस मौके पर ऐसा ही एक भव्य कार्यक्रम हुआ जिसमें भारत की तरफ से आने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया.

शुक्रवार को पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भारत और पाकिस्तान के बीच करतारपुर कॉरिडोर खुलने को बर्लिन की दीवार गिरने से जोड़ा. यह संयोग है कि जिस दिन करतारपुर कॉरिडोर को खोला गया है, उसी दिन बर्लिन दीवार गिरने की 30वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है. पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा, "यह उसी तरह दक्षिण एशिया को बदल सकता है जिस तरह 1989 की घटनाओं ने यूरोप को बदला."

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भारत और पाकिस्तान के बीच हाल के महीनों में जिस तरह के कड़वे संबंध रहे हैं, उसे देखते हुए करतारपुर कॉरिडोर का खुलना बहुत बड़ी बात है. खास कर, जब भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में तब्दील किया, उसके बाद से तनाव एक नए स्तर पर चला गया.

बंटवारे के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच तल्ख रिश्तों के कारण सिख श्रद्धालुओं को करतारपुर गुरुद्वारे के दर्शन के लिए बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता था. इसीलिए सिख समुदाय  की लंबे समय से मांग थी कि सड़क मार्ग के जरिए भारतीय पंजाब में स्थित डेरा बाबा नानक साहब को पाकिस्तान में पड़ने वाले दरबार साहिब से जोड़ा जाए और यात्रा को आसान बनाया जाए.

पाकिस्तान में इमरान खान ने प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद ही करतारपुर कॉरिडोर को खोलने का फैसला किया था. इसे बनाने का काम नवंबर 2018 में शुरू हुआ. कॉरिडोर बनाने के अलावा यात्रियों के रुकने की व्यवस्था और गुरुद्वारे की साज सज्जा का काम रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया है.

अधिकारियों का कहना है कि इस कॉरिडोर के जरिए हर रोज पांच हजार श्रद्धालु दरबार साहिब करतारपुर जा सकते हैं. लेकिन पाकिस्तान प्रति यात्री लगभग 1500 रुपये लेगा, जिसका भारत में विरोध हो रहा है.

12 नवंबर को गुरु नानक की 550वीं जयंती है, जिसे दुनिया भर में फैले करोड़ों सिख पूरे हर्षोल्लास से मनाने की तैयारी कर रहे हैं. इससे पहले करतारपुर कॉरिडोर का खुलना उनके लिए किसी तोहफे से कम नहीं है.

एके/आईबी (एएफपी, डीपी)

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