करतारपुर के बाद शारदा शक्तिपीठ भी खोलेगा पाकिस्तान | NRS-Import | DW | 26.03.2019
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करतारपुर के बाद शारदा शक्तिपीठ भी खोलेगा पाकिस्तान

पाकिस्तान की सरकार कश्मीर में स्थित शारदा शक्तिपीठ को दुनिया के लिए खोला जा सकता है. आखिर हिंदुओं के लिए क्यों खास है यह जगह और क्या है इसका इतिहास, आइए जानते हैं.

सिखों के पवित्र तीर्थ स्थल करतारपुर साहिब को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच अभी बातचीत चल रही है. भारत और पाकिस्तान के बीच एक गलियारा बनाने की बात चल रही है जिससे सिख श्रद्धालु पाकिस्तान जाकर करतारपुर साहिब में अरदास कर सकें. करतारपुर साहिब में सिख धर्म के संस्थापक गुरुनानक का आखिरी समय गुजरा था. वहीं उनका देहांत हुआ था. इसी बीच पाकिस्तान हिंदुओं के तीर्थस्थान शारदा शक्तिपीठ के रास्ते भी खोलने पर विचार कर रहा है. इसे शारदा पीठ कॉरिडोर के नाम से जाना जाएगा.

क्यों खास है शारदा शक्तिपीठ?

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक शिव की पत्नी सती ने आग में कूदकर अपनी जान दे दी थी. शिव ने सती के शव के साथ तांडव नृत्य किया. इस नृत्य के दौरान सती के शरीर के हिस्से 18 अलग-अलग जगहों पर गिरे. ये 18 जगह देवी महाशक्तिपीठ कहलाए. इन 18 महाशक्तिपीठों में से एक श्रीलंका और एक पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में भी है. हिन्दू मान्यता के अनुसार सती का दाहिना हाथ हिमालय की तराई में स्थित किशनगंगा नदी के किनारे नीलम घाटी में गिरा. जहां यह गिरा उस गांव का नाम भी शारदा है. यह जगह भारत-पाक नियंत्रण रेखा से लगभग 17 मील दूर है.

यह मंदिर कब बना, इसे लेकर कोई पुख्ता जानकारी नहीं है. लेकिन पहली बार इसका विकास सम्राट अशोक के समय शुरू हुआ. अशोक ने शारदापीठ को एक विश्वविद्यालय की तरह विकसित किया. यहां पर हिंदुओं के साथ बौद्ध भी शिक्षा प्राप्त करने आते थे.

प्राकृतिक आपदाओं ने बंद किया विश्वविद्यालय

यह क्षेत्र भूकंप प्रभावित जोन-5 यानी भूकंप के सबसे ज्यादा खतरे वाले क्षेत्र में है. 14वीं सदी तक यह विश्वविद्यालय चलता रहा लेकिन उसके बाद हुए विदेशी आक्रमणों और भूकंपों के चलते यह बार-बार क्षतिग्रस्त होता रहा. विश्वविद्यालय बंद हो गया लेकिन मंदिर चलता रहा. कश्मीर के राजा गुलाब सिंह डोगरा ने 19वीं सदी में आखिरी बार इस मंदिर का जोर्णोद्धार करवाया था.

भारत-पाकिस्तान बनने के बाद मंदिर भी बंद

1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद कश्मीर को लेकर दोनों देशों में युद्ध शुरू हो गया. इस मंदिर के इलाके को शुरुआत में पश्तून कबायलियों और फिर पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की सरकार ने अपने कब्जे में ले लिया. यहां पर बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया. तब से हिंदू और खासकर कश्मीरी पंडित इस मंदिर को खोलने और भारतीयों को पूजा करने की अनुमति की मांग कर रहे थे. 2004 में आए भूकंप से इस मंदिर को बड़ा नुकसान हुआ था. तब से यह बंद ही है.

हालांकि शारदा शक्तिपीठ को खोलने का आधिकारिक ऐलान अभी नहीं किया गया है लेकिन भारत से रिश्ते सुधारने की मुहिम में इसे पाकिस्तान का एक बड़ा कदम कहा जा रहा है.

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