′कमल हासन को फुल मार्क्स′ | मनोरंजन | DW | 02.02.2013
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मनोरंजन

'कमल हासन को फुल मार्क्स'

शानदार कैमरा वर्क और लीक से हट कर बनाई गई अभिनेता कमल हासन की महत्वाकांक्षी फिल्म विश्वरूपम पर तमिलनाडु में अदालती ताला दिया गया. दूसरे राज्यों में फिल्म देख चुके लोगों को फिल्म में क्या वाकई कुछ आपत्तिजनक लगा?

विश्वरूपम रिलीज होने से पहले ही कुछ मुस्लिम संगठनों ने इस पर एतराज जताया, जिसके बाद तमिलनाडु सरकार ने फिल्म पर पाबंदी लगा दी. मामला अदालत में गया और कोर्ट ने सरकार का साथ दिया, हासन सुप्रीम कोर्ट जाना चाहते थे लेकिन फिलहाल रुक गए हैं.

बड़ी समीक्षक जनता

भारत में फिल्म देख चुके डॉयचे वेले के पाठकों ने फेसबुक के जरिए बताया की उन्हें फिल्म कैसी लगी. अशोक गौरव जैन ने लिखा है, "कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है. यह एक जबरदस्त फिल्म है जिसे हर किसी को देखना चाहिए." पुणे के मनोज कामत ने लिखा, "फर्स्ट डे शो देखा. पुणे में फिल्म का किसी ने विरोध नहीं किया. काफी शांतिपूर्ण शो चल रहा हैं. बात रही फिल्म के कंटेंट की तो आपत्तिजनक क्या है, कुछ भी तो नहीं. एक्शन और अभिनय दोनों में कमल हासन जी को फुल मार्क्स."

विश्‍वरुपम का हिंदी संस्करण ‘विश्वरूप' दिल्‍ली, लखनऊ, नोएडा समेत उत्तर भारत के सभी शहरों में रिलीज हुआ. फिल्म देखने के बाद कई लोगों ने कमल हासन के साहस की तारीफ की है. फिल्म देखकर निकले मुस्लिम युवक उस्मान ने कहा, "फिल्म वास्तविकता को दर्शाती है, मुझे जहां तक लगता है कि अब तक मेरे द्वारा देखी गई आतंक पर आधारित बेहतरीन फिल्म है. इस फिल्म को देखने के बाद मुझे उन लोगों पर दया आ रही है जो बिना फिल्म देखे ही विरोध कर रहे हैं. ऐसी फिल्में बननी चाहिए."

फिल्म समीक्षकों की राय

ट्विटर और सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर फिल्म समीक्षकों ने भी विश्वरूप की जमकर तारीफ की है. तरन आदर्श ने फिल्म की तारीफ के साथ साथ फिल्म को मिली जबरदस्त ओपनिंग का जिक्र किया है, तो फिल्म समीक्षक नम्रता जोशी लिखती हैं, "विश्वरूपम बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल के दिनों में मनमोहन सिंह सबसे ज्यादा इसी के बारे में बोले हैं. मशहूर निर्देशक शेखर कपूर लिखते हैं, "मैंने विश्वरूपम के बारे में कई ट्वीट पढ़े, किसी को भी कुछ आपत्तिजनक नहीं लगा. कमल हासन को इतना दुख फिर क्यों दिया गया."

वहीं राजीव मसंद अपनी वेबसाइट पर फिल्म के बारे में लिखते हैं, "अफगानिस्तान में हमलों के दृश्यों में तकनीक टाइट थी लेकिन यही बात ढीले स्क्रीनप्ले और कुछ चरित्रों के बारे में नहीं कही जा सकती जो अरबी में बातचीत करते रहते हैं. ये और आखिरी एक्ट में प्लॉट का न्यूयॉर्क लौटना थकी हुई कहानी को और थका देता है."

किस बारे में है फिल्म

जासूस की कहानी पर आधारित विश्वरूपम में अफगानिस्तान और मुस्लिम जगत को दिखाया गया है. इसमें अमेरिका और अफगानिस्तान के रिश्तों को भी फिल्माया गया है. फिल्म करीब 100 करोड़ रुपये के बजट से बनी है और तकनीकी रूप से सराही जा रही है. हासन का कहना है कि तमिल में फिल्म न रिलीज होने के बाद उन्हें 60-70 करोड़ रुपये का घाटा हो चुका है. लेकिन उत्तर भारत में इस फिल्म की रिलीज अच्छी बताई जा रही है. शनिवार की शाम कमल हासन के विरोधी मुस्लिम गुटों से बातचीत सफल रही. अब इस फिल्म का विरोध नहीं होगा.

रिपोर्टः सामरा फातेमा

संपादनः आभा मोंढे

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