कठुआ गैंगरेप और हत्याकांड में तीन को उम्रकैद | दुनिया | DW | 10.06.2019
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दुनिया

कठुआ गैंगरेप और हत्याकांड में तीन को उम्रकैद

जम्मू और कश्मीर के कठुआ में 2018 में आठ साल की बच्ची के साथ हुए गैंगरेप और हत्या के मामले में पंजाब के पठानकोट की अदालत ने छह आरोपियों को दोषी करार दिया है. तीन को आजीवन कारावास की सुनाई गई है.

Indien Kaschmir Vergewaltigung und Tod einer Achtjährigen (Reuters/C. McNaughton)

कठुआ कांड के बाद बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा को लेकर नई दिल्ली में बच्चों के विरोध प्रदर्शन की तस्वीर.

पंजाब के पठानकोट की एक अदालत ने जनवरी 2018 में जम्मू और कश्मीर के कठुआ में एक आठ साल की बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या के लिए आरोपित सात में से छह लोगों को दोषी करार दिया है. अदालत ने छह में से तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सुनाई है. अभियोजन पक्ष ने पुजारी समेत तीन दोषियों के लिए मृत्युदंड की सिफारिश की थी. जिन तीन अन्य के खिलाफ अपराध के सबूत मिटाने का आरोप सिद्ध हुआ है उन्हें भी पांच-पांच साल की जेल हुई है.

इस मामले ने देश भर में हचलच मचा दी थी जब सत्ताधारी दल बीजेपी के कुछ सदस्यों ने आरोपियों को बचाने की कोशिश की थी. पीड़ित बच्ची कश्मीर के जंगलों में अपने मवेशियों के साथ एक जगह से दूसरे जगह जाकर बसने वाले घुमंतू बकरवाल समुदाय से आती थी. पुलिस में दर्ज 15 पेजों की चार्चशीट में लिखा है कि कठुआ में कुछ लोगों ने बच्ची को अगवा कर एक मंदिर में कैद कर रखा. करीब एक हफ्ते तक कैद में रखने के दौरान उसे नशीली दवाएं देकर उसके साथ कई लोगों ने बलात्कार किया. इसके बाद इन लोगों ने उसकी गला दबाकर हत्या कर दी और पहचान छुपाने के लिए बच्ची का सिर पत्थर से कुचल दिया. जनवरी में ही बच्ची की शव जंगल में बरामद हुआ.

Indien Kaschmir Nomadenvolk Bakarwal (Getty Images/AFP/S. Hussain)

अप्रैल 2018 में जम्मू कश्मीर के कठुआ में पीड़िता के घर के बाहर ली गई तस्वीर.

दोषी पाए गए लोगों में मंदिर का पुजारी और एक स्थानीय पुलिस अधिकारी था. इस घटना के बाद से इलाके में सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया था जिसके चलते मुकदमा चलाने में भी परेशानियां आई. सु्प्रीम कोर्ट के निर्देश पर केस को पठानकोट ट्रांसफर किया गया. यहां पीड़िता का केस लड़ने वाले वकील एम फारुकी ने कोर्ट के फैसले को "सच की जीत" बताया और इसे पीड़िता और उसके परिवार वालों को मिले न्याय पर संतोष जताया. रोपियों का पक्ष रखने वाले वकील एके साहनी ने फैसले के खिलाफ अपील करने की बात कही है.

एक साल पहले ही भारत में पॉक्सो कानून (प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड अगेंस्ट सेक्सुअल ऑफेंसेस एक्ट) में संशोधन कर 12 साल के कम उम्र की बच्ची के साथ बलात्कार सिद्ध होने पर मृत्युदंड की सजा का प्रावधान किया गया है. बीते एक साल से इस मामले की सुनवाई हो रही थी. पठानकोट में कैमरे के सामने इस दौरान गवाहों और सबूतों को पेश किया गया. कठुआ में ट्रायल शुरु होने के साथ ही लड़की के परिवार वालों और वकील ने बताया कि उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं. धमकी देने वालों में स्थानीय वकीलों और कुछ हिंदू नेताओं का नाम लिया गया जिनमें बीजेपी की सदस्य भी थे. जम्मू और कश्मीर भारत का इकलौता मुस्लिम-बहुल राज्य है. हालांकि दक्षिण जम्मू के जिस इलाके में यह वारदात हुई वहां हिंदुओं की आबादी ज्यादा है.

भारत में बच्चों के साथ यौन हिंसा की खबरें आती रहती हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2016 में ही नाबालिकों के खिलाफ करीब 20,000 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए. ग्रामीण इलाकों में तो अब भी कई सारे मामले दर्ज नहीं होते हैं. 2014 की संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत में हर तीन में से एक बलात्कार नाबालिग के साथ होता है. कठुआ मामले में कुल आठ आरोपी थे, जिनमें से एक व्यक्ति को दोषी नहीं पाया गया. एक आरोपी नाबालिग है जिसकी सुनवाई अभी जुवेनाइल कोर्ट में शुरु नहीं हुई है.

आरपी/एए (रॉयटर्स, डीपीए)

वीडियो देखें 01:05

खौफ में जीता बकरवाल समुदाय

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