ओबामा ने चुना तेज तर्रार सलाहकार | दुनिया | DW | 06.06.2013
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दुनिया

ओबामा ने चुना तेज तर्रार सलाहकार

राष्ट्रपति बराक ओबामा ने रिपब्लिकन विरोध किनारे कर तेज तर्रार सुजन राइस को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाया है. राष्ट्रपति की पुरानी दोस्त पर बेनगाजी में अमेरिकी नागरिकों पर हमले के बारे में देश को भ्रमित करने का आरोप है.

बेनगाजी पर उनकी गलतबयानी ने ओबामा के दूसरे कार्यकाल के लिए सुजन को विदेश मंत्री बनाने की उम्मीदें ध्वस्त कर दीं हालांकि अब सलाहकार बना कर एक तरह से उन्हें मुख्यधारा में लाया जा रहा है. ओबामा राइस को रिपब्लिकन आलोचना से बचाते आए हैं और बुधवार को भी उन्होंने अपने इस करीबी दोस्त, "देशभक्त जिसने हमेशा देश को आगे रखा," कह कर उनकी तारीफ की. ओबामा ने व्हाइट हाउस में रोज गार्डन उत्सव के दौरान कहा, "सुजन न्याय और मानवीय शालीनता की जबरदस्त हिमायती हैं. इसके साथ ही वह इस बात का भी पूरा ध्यान रखती हैं कि हम अपनी ताकत का इस्तेमाल बुद्धिमानी से सोच समझ कर करें."

बुधवार को सुजन राइस की नियुक्ति के साथ ही संयुक्त राष्ट्र में उनकी खाली हुई जगह लेने के लिए सामंथा पावर का नाम तय कर दिया गया. इन नियुक्तियों से ओबामा के रुख में बदलाव के भी संकेत मिल रहे हैं. उन्होंने ऐसी आवाजों को अपने सलाहकारों में जगह दी है जो देश के बाहर मानवीय कारणों पर ज्यादा अमेरिकी दखलंदाजी की वकालत करते हैं. हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि यह नीति सीरिया के मामले में राष्ट्रपति के रूख को बदलेगी या नहीं जहां गृहयुद्ध जैसी स्थिति है और अब तक ओबामा बल प्रयोग से बचते रहे हैं.

48 साल की राइस इस नियुक्ति के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति के सबसे करीबी घेरे में आ जाएंगी, यह जगह अब तक टॉम डेनिलॉन के पास थी. डेनिलॉन चार साल तक यह जिम्मेदारी उठाने के बाद इस साल जुलाई में पद से हट रहे हैं. एशिया प्रशांत क्षेत्र की ओर अमेरिकी ध्यान का वापस लौटना और रूस के साथ पेचीदा संबंधों को संभालने में उनकी बड़ी भूमिका रही है. राष्ट्रपति ने खुद कहा कि डेनिलॉन ने,"मेरे राष्ट्रपति काल में हरेक राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को आकार दिया."

ओबामा ने विदेश नीति के एजेंडे में कुछ बड़े मुद्दों पर काम शुरू करने के साथ ही टीम के वरिष्ठ सदस्यों में भी फेरबदल कर दिया है. राष्ट्रपति इसी शुक्रवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से कैलिफोर्निया के एक सम्मेलन में मिल रहे हैं. महीने के आखिर में वह यूरोप और अफ्रीका के दौरे पर भी जाएंगे.

ओबामा ने इन नियुक्तियों के जरिए उन विवादों को भी निबटाने की कोशिश की है जिन्होंने रिपब्लिकनों का मान बढ़ा रखा है और जिसकी छाया उनकी विदेश नीति पर पड़ रही है. अमेरिका की कर उगाहने वाली एजेंसी रुढ़िवादी राजनीतिक गुटों को निशाना बना रही है, उधर न्याय विभाग ने एसोसिएटेड प्रेस के पत्रकारों के टेलीफॉन रिकॉर्ड जब्त लिए हैं और बेनगाजी में राजदूत समेत चार अमेरिकी लोगों की मौत की दोबारा जांच शुरू हो गई है. बेनगाजी वाले हमले के बारे में राइस ने टीवी पर बयान दे दिया था कि भीड़ के अचानक उग्र होने की वजह से हादसा हुआ जो बाद में गलत साबित हुआ. हालांकि राइस ने प्रशासन से मिली जानकारी को इसका आधार बताया लेकिन रिपब्लिकन सांसदों ने इसे राष्ट्रपति चुनाव के दौरान आतंकवादी हमले को छिपाने की कोशिश कह उन्हें निशाना बनाया.

राइस की नियुक्ति को सीनेट से मंजूरी लेने की जरूरत तो नहीं पड़ेगी लेकिन कुछ सीनेटरों ने इस नियुक्ति की कड़ी आलोचना की है. राइस ने 2008 में राष्ट्रपति के चुनाव अभियान के साथ उनके साथ काम करना शुरू किया था हालांकि वह उसके पहले से ही उनकी और उनके कई सलाहकारों की करीबी दोस्त हैं. वह ईरान और उत्तर कोरिया पर संयुक्त राष्ट्र के कड़े प्रतिबंधों की बड़ी पैरोकार रही हैं. राइस ने लीबिया के विद्रोहियों को गद्दाफी के खिलाफ अमेरिका और उसके सहयोगियों की सैन्य मदद के लिए भी काफी दबाव बनाया. वह बिल क्लिंटन के राष्ट्रपति काल में भी सुरक्षा मामलों से जुड़ी कई जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं.

एनआर/एएम (एपी, एएफपी)

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