ऑस्ट्रेलियाई स्कूलों में शुरू होगी हिन्दी | लाइफस्टाइल | DW | 28.10.2012
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लाइफस्टाइल

ऑस्ट्रेलियाई स्कूलों में शुरू होगी हिन्दी

एशिया के उदय को अबाध बताते हुए ऑस्ट्रेलिया ने रविवार को एशियाई ताकतों के साथ संबंध बढ़ाने का एक विस्तृत प्लान बनाया है. इसमें ऑस्ट्रेलिया के स्कूलों में हिन्दी और मैंडरीन भाषाएं सिखाने का भी प्रस्ताव है.

ऑस्ट्रेलिया की प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने नई नीति का पहला खाका रखते हुए कहा, "जिस समय ऑस्ट्रेलिया बदल रहा था उसी समय एशिया में भी बदलाव हो रहा था. इस सदी में चाहे जो मिले, यह निश्चित ही एशिया को नेतृत्व में फिर से लाएगा. एशिया के उत्थान को कोई नहीं रोक सकता. यह तेज हो रहा है."

एशियन सेंचुरी व्हाइट पेपर नाम के इस दस्तावेज में कहा गया है कि सभी ऑस्ट्रेलियाई स्कूल कम से कम एक एशियाई स्कूल से जुड़ेंगे और इसमें मैंडरीन, हिन्दी, जापानी या इंडोनेशियाई भाषा सिखाई जाएगी. यह प्रस्ताव इसलिए बनाया गया है ताकि एशिया के साथ ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रों में संबंध बनाए जाएं और 2025 तक ऑस्ट्रेलिया को 10 सबसे अमीर देशों की सूची में ले लाए.

उदार ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत क्लासरूम और ट्रेनिंग सेंटरों में होगी." पिछले समय से अलग हम ऐसा नहीं होने देंगे कि एक छात्र कक्षा में पीछे बैठा रहे और स्कूल से दूर होता रहे. हम अब इसे ओके नहीं कर सकते क्योंकि हमारे पास हाथ के ऐसे काम हैं जो अनपढ़ या कम पढ़े लिखे बच्चों के लिए हैं."

गिलार्ड ने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया सभी देशों का मित्र है. हम स्थिरता के लिए अमेरिका की उपस्थिति को समर्थन दे रहे हैं, एक मजबूत सेना, इलाके में विश्वास और सहयोग बढ़ाने के लिए. वॉशिंगटन हमारा साथी है, बीजिंग में आदर और जकार्ता, दिल्ली, टोक्यो और सिओल में खुले दरवाजे."

गिलार्ड ने कहा कि 2025 तक ऑस्ट्रेलिया में मध्यवर्ग की संख्या बहुत ज्यादा होगी. दुनिया में तब भी प्रतियोगिता होगी और हमें अपनी जीवन धारा खुद तय करनी है. लेकिन सही प्लान के साथ. गिलार्ड का कहना है कि 2025 तक ऑस्ट्रेलिया का सकल घरेलू उत्पाद दुनिया के सबसे अमीर दस देशों में हो जाएगा और वह कतर, सिंगापुर, हांग कांग, ब्रुनेई, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका के साथ खड़ा हो जाएगा. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के हिसाब से ऑस्ट्रेलिया फिलहाल 13वें नंबर पर है.

2025 के लिए ऑस्ट्रेलिया का लक्ष्य है कि पांच मुख्य तरीकों से ऑस्ट्रेलिया की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जाए और उसकी क्षमताएं बढ़ाई जाएं. साथ ही एशिया की जानकारी और एशिया के बाजार की समझ बेहतर की जाए.

पिछले कुछ साल के दौरान ऑस्ट्रेलिया में भारतीय नागरिकों पर जानलेवा हमलों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ था. जिसके बाद वहां पढ़ने जाने वाले छात्रों की संख्या में कमी आई थी. ऑस्ट्रेलिया ने शिक्षा नीति में बदलाव किया था जिसके बाद कई फर्जी यूनिवर्सिटियों का मामला भी सामने आया था जो पैसे लेकर विदेशियों को वीजा दिलवाने में मदद करती थीं.

रिपोर्टः आभा मोंढे (पीटीआई)

संपादनः मानसी गोपालकृष्णन

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