एक सींग वाले गैंडों के संरक्षण में कामयाबी | पर्यावरण | DW | 18.01.2022

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पर्यावरण

एक सींग वाले गैंडों के संरक्षण में कामयाबी

पूर्वोत्तर राज्य असम ने एक सींग वाले गैंडों के संरक्षण में सराहनीय कामयाबी हासिल की है. फिलहाल राज्य में 2,657 गैंडे हैं. उनमें से अकेले काजीरंगा नेशनल पार्क में ही 2,413 गैंडे रहते हैं.

इस प्रजाति के गैंडों का सबसे बड़ा घर कहे जाने वाला असम और जोरहाट जिले में स्थित काजीरंगा नेशनल पार्क बीते कोई दो दशकों के दौरान इस दुर्लभ जानवर के शिकार के लिए ही बहुत सुर्खियों में रहा है. लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदली है. वर्ष 2021 के दौरान पूरे राज्य में सिर्फ एक गैंडे की मौत हुई.

गैंडे की सींग से जुड़े मिथकों की वजह से हर साल ऐसे कई गैंडे अवैध शिकारियों के हाथों मारे जा रहे थे. लेकिन सरकार ने ठोस पहल के जरिए न सिर्फ इस मिथक को तोड़ा है बल्कि इनके शिकार पर भी अंकुश लगा दिया है. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने एक ट्वीट में गैंडों का अवैध शिकार रोकने में मिली कामयाबी की सराहना की है. उन्होंने इसके लिए वन विभाग के सुरक्षाकर्मियों और काजीरंगा नेशनल पार्क के अधिकारियों की भी सराहना की है.

मौतों का आंकड़ा

असम देश में एक सींग वाले गैंडों का सबसे बड़ा घर है. फिलहाल राज्य में 2,657 गैंडों हैं. इनमें से काजीरंगा नेशनल पार्क में 2,413 गैंडें रहते हैं. राज्य के मानस नेशनल पार्क में 43, ओरांग नेशनल पार्क में 101 और पबित्रा वन्यजीव अभ्यारण्य में 100 गैंडे हैं.

सरकारी आंकड़ों में कहा गया है कि काजीरंगा नेशनल पार्क में बीते साल अप्रैल में एक गैंडे की अवैध शिकारियों के हाथों मौत हुई थी. कोहरा रेंज में उसका शव बरामद किया गया था और शिकारियों ने उसका सींग काट लिया था. उससे पहले वर्ष 2020 में दो, 2019 में तीन, 2018 में सात और 2017 में छह गैंडे मारे गए थे. उससे पहले के आंकड़े तो भयावह हैं. वर्ष 2016 में शिकारियों ने राज्य के विभिन्न नेशनल पार्कों में एक सींग वाले 18 गैंडों को मार दिया था. वर्ष 2015 में यह आंकड़ा 17 था.

वन विभाग के एक अधिकारी बताते हैं, "वर्ष 2013 और 2014 के दौरान राज्य में गैंडों का अवैध शिकार चरम पर था. उस दौरान हर साल 27-27 गैंडे मारे गए थे. वर्ष 2000 से 2015 के दौरान राज्य में कुल 153 गैंडों की मौत हो गई थी. ऐसे तमाम मामलों में उनकी हत्या सींग के लिए की गई थी."

यह आंकड़ा तो सरकारी है. वन्यजीव संगठनों का दावा है कि शिकारियों के हाथों मारे गए गैंडों की असली संख्या कहीं ज्यादा है.

शिकार की वजह

दरअसल, इन गैंडों का शिकार उनके सींग के लिए होता है. दक्षिण एशियाई देशों में उसकी भारी मांग है और यह बेहद ऊंची कीमत पर बिकता है. इसके साथ यह मिथक जुड़ा है कि इससे बनने वाले दवाएं पौरुष बढ़ाने में काफी फायदेमंद हैं. वन विभाग के एक अधिकारी बताते हैं, "गैंडों के सींग के पाउडर का इस्तेमाल कई तरह की पारंपरिक चीनी पद्धति में इलाज के लिए किया जाता है. इनमें बीमारियों में कैंसर से लेकर हैंगओवर और कामोत्तेजक से लेकर कई तरह की बीमारियां शामिल हैं."

वीडियो देखें 04:37

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गैंडे के सींग से जुड़े मिथकों को दूर करने के लिए बीते साल 22 सितंबर को असम सरकार ने ऐसे करीब ढाई हजार सींगों को आग से जला कर नष्ट कर दिया. वन विभाग की ओर से बीते कुछ वर्षों के दौरान शिकारियों के कब्जे से करीब ढाई हजार सींग बरामद किए गए थे. असम सरकार और वन विभाग ने तब इसे गैंडा संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर बताया था. उनका कहना था कि इस कार्यक्रम के आयोजन का मकसद शिकारियों और तस्करों को यह संदेश देना है कि सींग से जुड़े मिथक बेबुनियाद हैं.

हर साल 22 सितंबर को विश्व गैंडा दिवस मनाया जाता है. इसका मकसद इस जानवर के संरक्षण के उपायों को बढ़ावा देना है. केंद्रीय पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने वर्ष 2020 में एक सींग वाले गैंडों के संरक्षण के लिए ‘राष्ट्रीय संरक्षण रणनीति' जारी की थी. काजीरंगा में एक सींग वाले गैंडों के संरक्षण और शिकार-रोधी उपायों की जानकारी के लिए वर्ष 2016 में ब्रिटेन के प्रिंस विलियम और उनकी पत्नी केट ने भी इस पार्क का दौरा किया था. एक सींग वाला गैंडा पहले आईयूसीएन की रेड लिस्ट के अनुसार खतरे वाली श्रेणी में था, उसे अब 'असुरक्षित' के रूप में सूचीबद्ध किया गया है.

सरकारी पहल

वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में एक सींग वाले गैंडों के संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाने का वादा किया था. सत्ता में आने के तुरंत बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय को गुवाहाटी से काजीरंगा ट्रांसफर कर दिया और विभाग के अधिकारियों से अवैध शिकार को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा गया.

वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री सोनोवाल ने अवैध शिकार पर अंकुश लगाने के लिए स्पेशल राइनो प्रोटेक्शन फोर्स (एसआरपीएफ) का गठन किया था. सरकार ने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से सटे इलाकों के 90 युवाओं की एसआरपीएफ में नियुक्ति की थी. उनको काजीरंगा नेशनल पार्क, ओरांग नेशनल पार्क और मानस नेशनल पार्क की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया था.

उसी दौरान वन विभाग के सुरक्षा कर्मियों को शिकारियों से निपटने के लिए आधुनिक हथियार भी मुहैया कराए गए. सरकार ने वर्ष 2016-17 के बजट में राज्य के बाघ अभयारण्यों और गैंडों वाले संरक्षित क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए हथियारों और उपकरणों के आधुनिकीकरण योजना के तहत वन विभाग के लिए आधुनिक हथियारों की खरीद के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा था. उसी वर्ष शिकारियों और वन्यजीव अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्यवाही के लिए 10  वन्यजीव फास्ट ट्रैक कोर्ट भी स्थापित किए गए थे. एक सींग वाले गैंडों की सुरक्षा के लिए असम सरकार ने बीते साल विशेष पुलिस महानिदेशक जीपी सिंह की अध्यक्षता में शिकार-रोधी कार्यबल का गठन किया था.

असम के वन मंत्री परिमल शुक्लवैद्य कहते हैं, "सरकार ने काजीरंगा नेशनल पार्क समेत तमाम पार्कों में एक सींग वाले गैंडों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए हैं. वर्ष 2021 में महज एक गैंडे की शिकारियों के हाथों मौत इस जानवर के संरक्षण की दिशा में सरकार की ठोस पहल का सबूत है.”

वीडियो देखें 05:34

गैंडे के मल से कागज

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