एक बस्ती ने पेरिस की उम्मीद जगा दी है | दुनिया | DW | 06.10.2018
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दुनिया

एक बस्ती ने पेरिस की उम्मीद जगा दी है

सजीले पत्थरों की बनी इमारतों और रेलवे ट्रैक के बीच पेरिस के उत्तर पश्चिम इलाके में बसी कॉलोनी में छोटे छोटे पौधों से भरे तालाब, खेल के मैदान और खूब हरियाली है.

क्लैरिसे गेंटन क्लिशी बाटिग्नोलेस के प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर हैं उनका कहना है कि मकसद "पर्यावरण के लिहाज से जिम्मेदार" बनने का था. बिजली के लिए सोलर पैनल और गर्मी के लिए जियोथर्मल एनर्जी इसके कुछ उदाहरण हैं. पर्यावरण की बेहतरी के साथ इसका एक सामाजिक लक्ष्य भी है. परियोजना का मकसद शहर में सस्ते मकानों की किल्लत को भी दूर करना है और हरियाली के फायदे को अमीरों के साथ साथ गरीबों तक भी पहुंचाना है. गेंटन का कहना है, "हम ऐसा डिस्ट्रिक्ट बनाना चाहते थे जो सबकी पहुंच में हो और शहर के अमीर और गरीब इलाकों के बीच की खाई दूर कर सके."

पेरिस दुनिया के उन 70 शहरों में शामिल है जिन्होंने 2050 तक कार्बन उदासीन होने की शपथ ली है. इसका मतलब यह है कि वे इतना कार्बन उत्सर्जन नहीं करेंगे जिससे कि पर्यावरण को नुकसान हो. वास्तव में इसका मतबल खूब पेड़ लगाने जैसे उपाय करना है जो कार्बन को सोख कर प्रकृति को उसके दुष्प्रभाव से बचा सकें. हर शहर इसके लिए अपने अपने तरीके से कदम उठा रहा है. दुनिया की दो तिहाई ऊर्जा का इस्तेमाल और तीन चौथाई कार्बन डाइ ऑक्साइड का उत्सर्जन शहरों में होता है. ऐसे में यह शहर चाहे नाकाम हो या सफल उनकी इस कोशिश का संसार के लिए जलवायु लक्ष्य को हासिल करने पर बड़ा असर जरूर होगा.

प्रिंस ऑफ वेल्स कॉर्पोरेट लीडर्स ग्रुप ऐसे कारोबारों का एक संघ है जो पर्यावरण के लिए कदम उठा रहे हैं. संस्था के निदेशक एलियट व्हाइटिंगटन कहते हैं, "शहर वो जगह है जहां सारी चीजें साथ आती हैं, घर, ट्रांसपोर्ट, सार्वजनिक जगह, ऐसे में उनकी असली भूमिका भविष्य के लिए रहने की जगह बनाने में मदद करने की है." 

2015 के पेरिस एग्रीमेंट में ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस पर सीमित करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े बता रहे हैं कि दुनिया का तापमान इससे कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ेगा. लोगों से सलाह मशविरे के बाद पेरिस ने मार्च में अपना क्लाइमेट एक्शन प्लान तैयार कर लिया गया. इसमें शहर को 2050 तक कार्बन उदासीन और दोबारा इस्तेमाल होने वाली ऊर्जा से लैस करने का लक्ष्य है. शहर के स्वीमिंग पूल को गर्म करने से लेकर सीवेज के साथ ही 2020 आते आते पेरिस को पूरी तरह से साइकिल पथों से भर देना है.

क्लिशी बाटिग्नोलेस इलाका 130 एकड़ में फैला है, कभी इसे पेरिस का ओलंपिक गांव भी बनाने का सोचा गया था लेकिन 2012 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी हासिल करने में पेरिस नाकाम रहा. यह बस्ती स्केट पार्क, ओर लकड़ी के पुलों वाले 10 हेक्टेयर में बसे एक पार्क के चारों ओर बनी है. क्लैरिसे गेंटन इस पार्क को "बस्ती का फेफड़ा" कहते हैं. उन्होंने बताया कि बारिश के पानी को सीवेज में डालने की बजाय गीली जमीन की ओर मोड़ दिया गया है. घरों से निकलने वाला कूड़ा भी एक जमीन के भीतर बनी वायुचालित तंत्र के जरिए जमा होता है और इन्हें इकट्ठा करने के लिए ट्रकों की जरूरत नहीं पड़ती.

मकानों को नए जियोथर्मनल प्लांट के जरिए गर्म किया जाता है और दो करीब दो तिहाई घरों के छत पर सोलर पैनल लगे हुए हैं. हालांकि इस इकोफ्रेंडली शहर की खासियत सिर्फ ऊर्जा दक्षता या बायो डायोवर्सिटी ही नहीं है. इस बस्ती के आधे मकान सोशल हाउसिंग के तहत हैं जिन्हें 300 यूरो प्रति महीने के किराए पर दिया जा सकता है. स्थानीय लोगों ने इस बस्ती को लेकर उत्साह दिखाया है और उनका कहना है कि वे बाकी शहर से "ज्यादा जुड़े हुए" महसूस कर रहे हैं. हालांकि बहुत से लोग अब भी मेट्रो लाइन के इंतजार में हैं जिसका वादा किया गया है. इससे उन्हें इलाके में ट्रैफिक को घटाने और सार्वजनिक परिवहन के जाम को कम करने में मदद मिलेगी.

Frankreich Eröffnung der ersten Solar Straße (picture-alliance/dpa/C. P. Tesson)

फाइल

दो महीने पहले यहां रहने आए डेनिस मुसांगा यहां की साफ सफाई देख कर कर हैरान हैं. हालांकि उन्हें इसके किफायती होने पर भरोसा नहीं क्योंकि दो कमरे के फ्लैट में एक कमरे के लिए उन्हें 650 यूरो देने पड़ रहे हैं. पेरिस के उपनगरों में दूसरे मकानों की तुलना में बहुत ज्यादा है.

शहर को कार्बन मुक्त बनाना है तो शहरवासियों को इससे जुड़ना होगा जिसके लिए खुद लोगों ने ही सैकड़ों उपाय सुझाए हैं. अच्छी बात ये है कि उत्सर्जन में कटौती के कई तरीके ऐसे हैं जो पैसे बचाने में भी मददगार होंगे. यूरोपीय शहरों ने अपने घरों को गर्म रखने की तकनीकों में काफी निवेश किया है लेकिन अब भी पुरानी इमारतों का एक बहुत बड़ा बोझ इन शहरों के कंधे पर है जिनमें पुरानी, खर्चीली और कार्बन उत्सर्जन करने वाली तकनीकों का इस्तेमाल होता है. प्रोजेक्ट फिलहाल शुरुआती चरण में है. यहां एनर्जी की ऑडिट भी होगी और बची ऊर्जा को सुरक्षित रखने के लिए एक ऑनलाइन टूल भी विकसित किया जा रहा है. मुसांगा के घर की छत पर सोलर पैनल नहीं है वो नए विचारों का तो स्वागत कर रहे है लेकिन ये भी चाहते हैं कि उन्हें "पैसे बचने का" सबूत मिले. 

एनआर/ओएसजे (रॉयटर्स)

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