एक तिहाई दुनिया मोटी | दुनिया | DW | 29.05.2014
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दुनिया

एक तिहाई दुनिया मोटी

दुनिया की करीब एक तिहाई आबादी मोटापे का शिकार है. 180 देशों के आंकड़े के आधार पर ये स्टडी लांसेट जर्नल में प्रकाशित की गई है.

तीन दशक पहले यानि 1980 में 85.7 करोड़ लोग दुनिया में मोटापे का शिकार थे जबकि 2013 में इनकी संख्या बढ़कर 2.1 अरब हो गई. दुनिया की जनसंख्या बढ़ने की तुलना में यह बढ़ोत्तरी ज्यादा है. 1980 से 2013 के बीच बच्चों और वयस्कों में वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा वजन और मोटापे की समस्या नाम की स्टडी ब्रिटेन की लांसेट पत्रिका में छापी गई है. यह शोध वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवेल्यूएशन इंस्टीट्यूट (आईएचएमई) ने किया. स्टडी के मुताबिक मोटापे की समस्या औद्योगिक और विकासशील देशों, दोनों में बराबर बढ़ी है.

ज्यादा वजन से ग्रस्त जनता दुनिया के दस देशों में रहती है. इनमें पहले नंबर पर अमेरिका, दूसरे पर चीन, फिर भारत और जर्मनी हैं.

कौन है मोटा

किसी व्यक्ति को मोटा तब कहा जाता है जब ऊंचाई की तुलना में वजन ज्यादा होता है. इस स्केल को बॉडी मास इंडेक्स कहते हैं. यानि प्रति किलोग्राम वजन को प्रति सेंटीमीटर में बांटा जाता है. कोई व्यक्ति मोटा तब कहलाता है जब बीएमआई 25 से 29.9 हो जबकि ओबेसिटी या एडिपोसिटी में बीएमआई 30 या उससे ज्यादा होता है. आईएचएमई के निदेशक क्रिस्टोफर मरे के मुताबिक, "मोटापा ऐसा मुद्दा है जो सभी उम्र, आय और दर के लोगों को प्रभावित करता है." इतना ही नहीं कोई देश मोटापे से निबटने में सक्षम नहीं है. मरे कहते हैं कि आय और मोटापे में भी मजबूत संबंध है. जितनी ज्यादा संपन्नता आती है, कमर का आकार बढ़ने लगता है.

भारत टॉप टेन में

मोटापे से पीड़ित 67.1 करोड़ लोगों में जिनका बीएमआई 30 या उससे ज्यादा है, ऐसे अधिकतर लोग अमेरिका में रहते हैं. पिछले तीन दशकों में जिन देशों में वजन बढ़ने की समस्या जहां तेजी से बढ़ी है, उन देशों में मिस्र, सऊदी अरब और ओमान शामिल हैं. मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में अब करीब 60 फीसदी पुरुष और 65 फीसदी महिलाएं मोटी हैं. दुनिया के मोटे लोगों के 13 फीसदी अमेरिका में रहते हैं. भारत और चीन में दुनिया के 15 फीसदी मोटे लोग रहते हैं. शोधकर्ताओं की सबसे बड़ी चिंता ये है कि बच्चे और युवाओं में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है. स्टडी की प्रमुख लेखक मैरी एनजी कहती हैं, "हम जानते हैं कि बचपन से होने वाले मोटापे के स्वास्थ्य पर गंभीर परिणाम होते हैं, उनमें दिल की बीमारी, मधुमेह और कई तरह के कैंसर शामिल हैं. हमें सोचना होता कि कैसे इस ट्रेंड को उल्टा किया जाए."

खा खा कर मर रहे

खराब पोषण, कम कसरत और सस्ते में मिलने वाला वसा से भरा खाना इस समस्या का मुख्य कारण है. इसके अलावा कुछ दवाएं, तनाव, नींद की कमी और आनुवांशिक कारण भी मोटापे के कारणों में शामिल हैं.

पिछले सप्ताह ही विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉ. मार्गरेट चैन ने कहा, "हमारे बच्चे मोटे हो रहे हैं. हमारी दुनिया सच में खा खा कर मर रही है." यूएई यूनिवर्सिटी में मोटापे पर काम करने वाले सैयद शाह कहते हैं, "वहीं आधुनिकता स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं है." वह कहते हैं कि पाकिस्तान में दूर दराज के पहाड़ी गांवों में मोटापे की दर पिछले 20 साल में पांच गुना बढ़ गई है. उन्होंने हाल ही में अपना शोध बुल्गारिया में प्रस्तुत किया.

ताजा स्टडी के मुताबिक दुनिया के दस देशों में सबसे ज्यादा मोटे लोग रहते हैं. इनमें चीन दूसरे और भारत तीसरे पर हैं. यहां दुनिया के मोटापे से ग्रस्त लोगों की संख्या 4.60 लाख और तीन लाख है. इसके बाद देशों में रूस, ब्राजील, मेक्सिको, मिस्र, जर्मनी, पाकिस्तान और इंडोनेशिया शामिल हैं.

एएम/आईबी (डीपीए, एएफपी, एपी)

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