उन्नाव रेप केस में जज ने एम्स में भर्ती पीड़िता का बयान दर्ज किया | भारत | DW | 11.09.2019
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भारत

उन्नाव रेप केस में जज ने एम्स में भर्ती पीड़िता का बयान दर्ज किया

निचली अदालत के न्यायाधीश ने उन्नाव मामले की विशेष सुनवाई एम्स में कराने का आग्रह किया था, जहां दुष्कर्म पीड़िता और उसका वकील इलाज करा रहे हैं.

राजधानी नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स में स्थापित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में न्यायाधीश ने बुधवार को उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता का बयान दर्ज किया. उन्नाव कांड की पीड़िता एम्स अस्पताल में अपना इलाज करा रही है. मामले के आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर को सुनवाई के लिए तिहाड़ जेल से एम्स लाया गया. विशेष न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने यहां ट्रॉमा सेंटर में स्थापित कोर्ट में मामले की सुनवाई की. ट्रॉमा सेंटर में ही पीड़िता भर्ती है. केंद्रीय जांच ब्यूरो, सीबीआई ने अदालती कार्यवाही के लिए विशेष सुरक्षा इंतजाम किए थे.

All India Institute of Medical Sciences AIIMS in New Delhi (Manpreet Romana/AFP/Getty Images)

एम्स के ट्रॉमा सेंटर में स्थापित अस्थाई कोर्ट में हो रही है मामले की सुनवाई.

जिला न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने सात सितंबर को जय प्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में सुनवाई करने का निर्देश दिया था. जुलाई में राय बरेली में एक सड़क दुर्घटना में घायल हुई पीड़िता अब बयान देने की स्थिति में बताई जा रही है. न्यायाधीश शर्मा ने गवाही पूरी होने तक बुधवार से प्रतिदिन सुनवाई करने का निर्णय लिया है. विशेष अदालत ने यह भी कहा कि अदालत की सुनवाई बंद कमरे में होगी और बिना अनुमति कोई अन्य व्यक्ति कोर्ट में उपस्थित नहीं होगा.

कोर्ट ने एम्स प्रशासन को क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों को बंद रखने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पीड़िता की देखभाल के लिए एक अनुभवी नर्स को भी उपस्थित रखने का आग्रह किया है. कोर्ट ने गवाही और जिरह के दौरान आरोपी शशि सिंह और कुलदीप सिंह सेंगर के लिए सिर्फ दो बचाव सहयोगियों को आने की अनुमति दी.

दिल्ली हाई कोर्ट ने पिछले सप्ताह उन्नाव दुष्कर्म मामले की सुनवाई जारी रखने के लिए एम्स में कोर्ट स्थापित करने का आदेश दिया था. इस सुविधा के कारण पीड़िता एम्स में ही खुद अदालती कार्यवाही में शामिल हो सकेगी. आदेश में कहा गया, "दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 9(6) द्वारा प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए माननीय मुख्य न्यायाधीश और इस कोर्ट के न्यायाधीश खुशी के साथ यह घोषणा कर रहे हैं कि धर्मेश शर्मा तीस हजारी कोर्ट के साथ-साथ नई दिल्ली स्थित एम्स के ट्रॉमा सेंटर में पीड़िता की गवाही दर्ज करेंगे."

यह कदम निचली अदालत के न्यायाधीश के आग्रह पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट को निर्णय लेने का निर्देश देने के कुछ घंटों बाद ही उठाया गया है. निचली अदालत के न्यायाधीश ने उन्नाव मामले की विशेष सुनवाई एम्स में कराने का आग्रह किया था, जहां दुष्कर्म पीड़िता और उसका वकील इलाज करा रहे हैं.

न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट को निचली अदालत के न्यायाधीश की याचिका पर जल्द से जल्द हॉस्पिटल में कोर्ट स्थापित करने की अनुमति दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को भी उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की सड़क दुर्घटना की जांच के लिए दो और सप्ताह का समय बढ़ा दिया था.

--आईएएनएस

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