उत्तर कोरिया में क्या देखने जा रहे हैं टूरिस्ट | दुनिया | DW | 25.06.2019
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दुनिया

उत्तर कोरिया में क्या देखने जा रहे हैं टूरिस्ट

इन दिनों उत्तर कोरिया पर्यटकों के लिए एक पसंदीदा डेस्टिनेशन है. आलोचक मान रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को टूरिज्म भी प्रतिबंध के दायरे में लाना चाहिए लेकिन समर्थक पर्यटन को प्रोत्साहित करते हैं.

अकसर गलत कारणों से चर्चा में रहने वाला देश उत्तर कोरिया इन दिनों पर्यटकों के चलते खबरों में बना हुआ है. उत्तर कोरिया घूमने जाने वालों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है. लेकिन उत्तर कोरिया से भाग कर आए लोगों का कहना है कि पर्यटकों को छुट्टियां बिताने के लिए किसी और ठिकाने पर जाने के बारे में सोचना चाहिए.

उत्तर कोरिया जाने वालों में चीनी पर्यटक सबसे आगे हैं. चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक 2019 की पहली छमाही में उत्तर कोरिया जाने वालों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है. साल के पहले तीन महीनों में करीब दो हजार लोगों ने चीन से उत्तर कोरिया की सीमा को पार किया. उत्तर कोरिया के पास सैलानियों को संभालने के लिए होटल और रेस्तरां आदि से जुड़ा बेहद ही सीमित बुनियादी ढांचा है. इसके चलते कोरियाई प्रशासन ने मार्च 2019 में अपनी घोषणा में कहा कि विदेशी टूरिस्टों की सीमा तय की जाएगी.

कुल मिलाकर तकरीबन एक लाख पर्यटकों ने साल 2018 में उत्तर कोरिया की यात्रा की. घूमने गए लोगों को वे जगह और चीजें दिखाई जाती हैं जो कोरियाई नेता किम जांग उन की सरकार दुनिया को दिखाना चाहती है. जैसे कि किम इल सुंग स्क्वेयर. यह वही जगह है जहां अकसर परेड करते हुए सैनिक टीवी पर नजर आते हैं. इसके अलावा टावर ऑफ जुचे और किम जोंग इल की जन्मस्थली की बताई जाने वाली पहाड़ियों की हुबहू बनाई नकल भी पर्यटकों को दिखाई जाती है. किम जोंन इल उत्तर कोरिया के मौजूदा शासक किम जांग उन के पिता थे.

सबसे बड़ा आकर्षण

यहां आने वालों के लिए एक बड़ा आकर्षण मास गेम्स रहा है. मास गेम्स में हजारों की संख्या में बच्चे डांस करते हैं और परफॉर्म करते हैं. प्योंगयांग के पास एक स्टेडियम में बच्चे अपने देश और नेताओं प्रशंसा में ऐसे कार्यक्रम पेश करते हैं. स्टेडियम में करीब 1.14 लाख लोग एक साथ बैठ सकते हैं. हालांकि किम जोंग उन ने नाराजगी जताते हुए इस साल के कार्यक्रमों को रोक दिया और अब तक यह साफ नहीं है कि इसे वापस कब शुरू किया जाएगा. इसके बावजूद लोग यहां आते हैं.

उत्तर कोरिया से भागकर दक्षिण कोरिया जाकर बसे ग्युंगबे जू के मुताबिक लोगों को ऐसा नहीं करना चाहिए. उन्होंने डीडब्ल्यू से बातचीत में कहा, "पर्यटकों को उत्तर कोरिया में कदम भी नहीं रखना चाहिए. जो भी वहां जाता है उसे सत्ता अपने तरीके से ढालने की कोशिश  करती है और वही बताती है जो वह सुनना चाहती है."

उन्होंने कहा कि ये दुखद है कि लोगों के पास असल जानकारी का कोई और स्रोत नहीं है और वे उत्तर कोरिया की कठिन परिस्थितयों में रहने वाले आम लोगों का जीवन नहीं देख पाते. ऐसे में वे शायद यही सोच कर लौटेंगे कि उत्तर कोरिया कितना सुरक्षित और खुशहाल है.  जू के मुताबिक असल में उत्तर कोरिया ना तो सुरक्षित है और ना ही खुशहाल. 

जू साल 2008 में उत्तर कोरिया से भागे थे. उनके पिता एक राजनीतिक कैदी थे. जब जू की उम्र महज नौ साल थी, तो उनके पिता के जेल में डाल दिया गया. जू की बड़ी बहन को भी राजनीतिक कैदी मान कर जेल भेज दिया है और अब उन्हें नहीं पता कि वह जिंदा हैं या मर गईं. हालांकि जू को इस बात का भरोसा है कि उसकी बहन जिंदा होगी और अब भी बतौर डॉक्टर काम कर रही होगी लेकिन जू ने उनसे संपर्क करने की कोई कोशिश नहीं की. जू कहते हैं कि अगर वे संपर्क करते हैं तो उसके लिए खतरा हो सकता है. सुरक्षा अधिकारियों को पता चल जाएगा कि वह देश से बाहर किसी के संपर्क में है.

जू ने बताया, "पर्यटकों को जूचे विचारधारा की जीत के बारे में बताया जाता है. साथ ही किम परिवार की महानता के किस्से भी सुनाए जाते हैं. " जू कहते हैं कि उन्हें ये सब इसलिए पता है कि क्योंकि यही सब उन्हें स्कूल में पढ़ाया जाता था, जो झूठ है.

प्रोपेगैंडा और पैसा

क्वांगी हो साल 1985 में उत्तर कोरिया से भाग कर दक्षिण कोरिया आ गए थे. हो आज दक्षिण कोरिया में कमिटी फॉर द डेमोक्रैटाइजेशन ऑफ नार्थ कोरिया के चैयरमेन हैं. हो मानते हैं कि उत्तर कोरिया के पास टूरिस्टों को बुलाने की दो बड़ी वजहें हैं. पहली यह कि प्योंगयांग उनको अपना प्रोपेगैंडा बता पाता है. दूसरा मकसद है ऐसी मुद्रा को हासिल करना जिसका जल्दी अवमूल्यन ना हो. हो के मुताबिक, "संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के बाद से ही उत्तर कोरिया जूझ रहा है. ऐसे में टूरिज्म एक ऐसा तरीका है जिससे वह पैसा बना सकता है."

हो ने बताया कि जो पैसा टूरिस्ट उत्तर कोरिया में खर्च करते हैं, वह सीधे किम जोंग उन के राजनीतिक फंड में जाता है. पैसे का इस्तेमाल राजनीतिक गुटों और सैन्य नेताओं की वफादारी खरीदारी करने के लिए किया जाता है. किम को सत्ता में बने रहने के लिए ऐसे लोगों को खुश करना भी जरूरी है. उन्होंने कहा, "टूरिज्म उत्तर कोरिया की सत्ता को जिंदा रहने का मौका दे रहा है और मेरे हिसाब से टूरिज्म को भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को तहत आना चाहिए ताकि किम के पास पैसा जाना थम सके."

दुनिया की समझ

हालांकि टूरिज्म पर प्रतिबंध से सभी सहमत नहीं  हैं. उत्तर कोरिया की ट्रैवल एजेंसी कोरयो टूर्स के जनरल मैनेजर सिमोन कॉकेरेल ने कहा, "उत्तर कोरिया की सत्ता को टूरिज्म सहयोग नहीं कर रहा है और ना ही उत्तर कोरिया की यात्रा करने वाले लोग वहां की सत्ता के प्रति समर्थन दिखा रहे हैं."

कॉकरेल के मुताबिक, इस तरह तो किसी भी ट्रैवल कंपनी को कोई भी व्यक्ति चीन नहीं भेजना चाहिए और यही मानना चाहिए कि चीन जाने वाले लोग चीन की सत्ता को समर्थन देंगे. कॉकरेल ये भी नहीं मानते है कि टूरिज्म सेक्टर से मिला पैसा राष्ट्रीय सरकार को भेजा जाता है. कॉकरेल के मुताबिक उस पैसे को रेस्तरां और अन्य ट्रैवल पार्टनर के बीच बांटा जाता है जिससे स्टाफ और अन्य खर्चे पूरे होते हैं.

कॉकरेल कहते हैं, "उत्तर कोरियाई लोगों के पास विदेशियों से बातचीत करने का कभी कोई मौका नहीं था. उन लोगों के पास विदेशियों को लेकर बस उतनी ही समझ थी जो उनकी सरकार ने उन्हें बताया. ऐसे में जब वे लोग किसी विदेशी से मिलते हैं तो उन्हें एक अलग दृष्टिकोण नजर आता है."

कॉकरेल ये भी कहते हैं कि जब उन्हें यह समझ आएगा कि उनकी सत्ता ने अब तक जो कुछ भी उन्हें बताया था वह गलत था तो वे सवाल करेंगे और सच को समझ पाएंगे. 

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