उत्तर कोरिया का वर्जित प्यार और समाजवाद पर जीत | दुनिया | DW | 13.02.2019
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दुनिया

उत्तर कोरिया का वर्जित प्यार और समाजवाद पर जीत

प्यार दीवाना होता है, कोई सीमा कोई अंतर नहीं देखता. लेकिन सीमाएं तो होती हैं, बाधाएं भी होती हैं. इस जोड़े को उन बाधाओं से निबटने में 31 साल लग गए. दो देशों के नागरिकों के प्यार की अद्भुत कहानी.

चेहरे पर एक जैसे भाव लिए एक जोड़ा परेशान नजरों से कैमरे में झांकता है. एक वियतनाम का स्टूडेंट जिसे अभी अभी जिंदगी का प्यार मिला है. तो दूसरी उत्तर कोरिया की लड़की जिसे प्यार करने की इजाजत नहीं. री योंग हुई के साथ ये तस्वीर खींचने के 31 साल बाद अब 69 साल के हो चुके फाम न्गोक कान्ह को 2002 में शादी करने की इजाजत मिली. तब उत्तर कोरिया ने पहली बार अपने नागरिकों को किसी विदेशी से शादी करने की अनुमति देने का फैसला लिया था.

हनोई में अपने अपार्टमेंट में 70 साल की री कहती हैं, "जब से मैंने उसे देखा तो मैं उदास थी क्योंकि मुझे लग रहा था कि ये प्यार कभी परवान नहीं चढ़ेगा." आज वियतनाम में उन्हें जो आजादी है उत्तर कोरिया में उसकी कल्पना नहीं की जा सकती थी. वियतनाम में हो रहे अमेरिका उत्तर कोरियाई शिखर भेंट से उन्हें उम्मीद है उत्तर कोरिया के साथ झगड़े खत्म होंगे. री कहती है, "यदि आप उत्तर कोरियाई हैं तो आप झगड़े का निबटारा चाहते हैं."

वियतनाम आज एशिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का हिस्सा है. वियतनाम को उत्तर कोरिया के लिए मॉडल समझा जा रहा है.

1967 में वियतनाम और अमेरिका भी युद्ध में उलझे थे. कान्ह उन 200 वियतनामी छात्रों में शामिल थे जिन्हें उत्तर कोरिया वो हुनर सीखने को भेजा गया था जिसकी युद्ध खत्म होने के बाद वियतनाम को राष्ट्र निर्माण के लिए जरूरत होती.

कुछ साल बाद एक खाद बनाने वाली फैक्टरी में केमिकल इंजीनियरिंग कोर्स के दौरान कान्ह को री एक प्रयोगशाला में काम करती दिख गई. कान्ह बताते हैं, "मैंने सोचा मुझे इसी लड़की से शादी करनी है." हिम्मत जुटाकर उन्होंने री से घर का पता पूछा. री ने बता दिया. उनकी सहेलियों ने उन्हें फैक्टरी में काम करने वाले एक वियक कॉन्ग के बारे में बताया था जो बिल्कुल उनकी तरह दिखता था. वह भी मिलने को उत्सुक थी. री कहती हैं, "देखते ही समझ गई कि यह वही है. तब तक मैंने सुंदर लड़कों को देखकर कुछ महसूस नहीं किया था, लेकिन जब उसने दरवाजा खोला तो मेरा दिल पिघल गया." लेकिन चुनौतियां थीं.

कुछ खतों के आने जाने के बाद री कान्ह को घर आने देने के लिए तैयार हुई. कान्ह को भी सावधान रहना था. एक वियतनामी कॉमरेड को स्थानीय लड़की के साथ देखकर लोगों ने पीट दिया था. उत्तर कोरियाई कपड़े पहनकर कान्ह तीन घंटे बस के सफर और दो किलोमीटर पैदल चलकर री के घर पहुंचे. फिर वियतनाम वापस लौटने से पहले वे हर महीने इसे दोहराते रहे. कान्ह बताते हैं कि वे री के घर छुपकर जाते गुरिल्ला की तरह. 

हनोई वापस लौटकर कान्ह निराश थे. उच्च पद वाले पार्टी कैडर का बेटा होने के बावजूद उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी ज्वाइन नहीं की. अपने लिए तय अच्छा खासा करियर छोड़ दिया. "मैं ऐसे समाजवाद के साथ सहमत नहीं था जो दो लोगों को प्यार करने से रोके." पांच साल बाद 1978 में कान्ह के इंस्टीट्यूट ने उत्तर कोरिया का ट्रिप ऑर्गेनाइज किया. कान्ह भी साथ गए और री से मिले. री बताती हैं कि हर बार जब वे मिलते तो  यह सोच कर और उदास हो जाते कि फिर शायद कभी न मिलें.

उसी साल वियतनाम ने कंबोडिया में हस्तक्षेप किया जिसकी वजह से चीन के साथ युद्ध शुरू हो गया. उत्तर कोरिया चीन का साथ दे रहा था  इसलिए उनकी खतोकिताबत भी रुक गई. 1992 में कान्ह एक खेल प्रतिनिधिमंडल के साथ उत्तर कोरिया गए लेकिन री से मुलाकात नहीं हुई. 1990 के दशक के अंत में उत्तर कोरिया भयानक भूखमरी झेल रहा था. चावल की मदद मांगने एक प्रतिनिधिमंडल हनोई आया लेकिन पश्चिम से संबंध बढ़ा रहे वियतनाम ने मना कर दिया.

री और उनके लोगों के लिए चिंतित कान्ह ने दोस्तों के साथ मिलकर 7 टन चावल इकट्ठा किया और उसे उत्तर कोरिया भेजा. ये ऐसी मदद थी जिसने कान्ह और री के मिलने का रास्ता खोल दिया. उत्तर कोरिया के अधिकारियों को कान्ह की सद्भावना के बारे में पता चला तो वे री के साथ उनकी शादी को सहमत हो गए. शर्त यही थी कि री अपनी नागरिकता नहीं छोड़ेगी. आखिरकार उन्होंने 2002 में प्योंगयोंग में स्थित वियतनाम के दूतावास में शादी की और हनोई में रहने का फैसला किया.

वे आज भी वहीं रहते हैं. कान्ह कहते हैं, "प्यार ने समाजवाद को परास्त कर दिया.

एमजे/एनआर (रॉयटर्स)

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