उत्तर अफ्रीकी देशों को जर्मनी ने माना सुरक्षित | दुनिया | DW | 13.05.2016
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दुनिया

उत्तर अफ्रीकी देशों को जर्मनी ने माना सुरक्षित

जर्मन संसद के निचले सदन में तीन उत्तर अफ्रीकी देशों को "सुरक्षित देश" घोषित करने पर सहमति बन गई. इसका असर इन देशों से जर्मनी पहुंचे प्रवासियों को राजनैतिक शरण दिए जाने के फैसले पर पड़ेगा.

मोरक्को, अल्जीरिया और ट्यूनीशिया- इन तीन अफ्रीकी देशों के नागरिकों को अब जर्मनी में शरण मिलना बहुत मुश्किल होगा. जर्मन संसद बुंडेसटाग में पास हुए कानून के मसौदे के अनुसार यह सुरक्षित देश माने जाएंगे और इनके नागरिकों का शरण आवेदन रद्द होने पर उन्हें उनके देश वापस भेजना आसान होगा.

कई मानवाधिकार समूह इस कानून की आलोचना कर रहे हैं. उनके अलावा जर्मनी की विपक्षी ग्रीन पार्टी और वामपंथी डी लिंके भी इसके खिलाफ हैं. कानून बनाने के लिए संसद के ऊपरी सदन बुंडेसराट में भी इसका पास होना जरूरी होगा.

बुंडेसटाग में चांसलर अंगेला मैर्केल की कंजर्वेटिव पार्टी और सरकार में उनके साझेदार सोशल डेमोक्रैट गुट के बहुमत में होने के कारण इस प्रस्ताव को बड़ी आसानी से मंजूरी मिल गई. 424 सांसदों ने इसके पक्ष में और केवल 143 ने इसके खिलाफ वोट दिया. तीन सांसदों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया. असली परीक्षा ऊपरी सदन में देखने को मिलेगी.

कानून के प्रभाव में आने से प्रशासन को इन देशों के नागरिकों को डिपोर्ट करने में आसानी होगी. गृह मंत्री थोमास दे मेजियेर ने कानून के समर्थन में बोलते हुए बताया कि साल के पहले तीन महीने में स्वीकार किए गए शरणार्थियों में केवल 0.7 प्रतिशत आवेदन इन तीन अफ्रीकी देशों के नागरिकों के थे.

इस साल जनवरी से ही जर्मन सरकार शरणार्थी नियमों को और सख्त बना कर शरणार्थियों की संख्या को कम करने की कोशिश कर रहे हैं. पिछले एक साल में सीरिया, इराक और अफगानिस्तान जैसे देशों से 10 लाख से भी ज्यादा लोग जर्मनी शरणा की तलाश में पहुंचे थे. शरणार्थी मुद्दे को लेकर सत्ताधारी सीडीयू-एसपीडी गठबंधन की नेता चांसलर अंगेला मैर्केल की लोकप्रियता में काफी कमी दर्ज की गई है.

आरपी/ओएसजे (एएफपी, रॉयटर्स)

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